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गाजियाबाद की इस सोसाइटी में गिराए जााएंगे 2 टावर, होम बायर्स को ब्याज सहित मिलेगा पैसा

गाजियाबाद के मोहन नगर स्थित गुलमोहर ग्रीन्स हाउसिंग सोसाइटी में अवैध निर्माण को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने दो रेजिडेंशियल टावरों को पूरी तरह गिराने का आदेश दिया है।

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रेजिडेंशियल टावर गिराए जााएंगे

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गाजियाबाद की गुलमोहर ग्रीन्स रेजिडेंशियल सोसाइटी में अवैध रूप से बनाए गए दो टावरों को गिराने का आदेश दिया है। बता दें कि गुलमोहर ग्रीन्स सोसाइटी में बनी 10-10 मंजिल की दो इमारतों (टावरों) को गिराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि इनका निर्माण अवैध तरीके से किया गया था। साथ ही, कोर्ट ने इन इमारतों को बनाने वाली कंपनी 'फ्रेंड्स लैंड डेवलपर्स' के खिलाफ FIR दर्ज करने का भी आदेश दिया है। यह मामला काफी हद तक 'सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट' केस जैसा है, जिसके कारण 2022 में नोएडा की एक सोसाइटी में दो ऊंची आवासीय इमारतों को गिराया गया था।

गाजियाबाद विकास प्राधिकरण को भी फटकार

हाई कोर्ट ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) को भी फटकार लगाई है, क्योंकि उसने बिल्डर के साथ मिलीभगत करके गुलमोहर ग्रीन्स में इन दो अवैध टावरों को बनने दिया। जस्टिस सुधांशु चौहान और जस्टिस सरल श्रीवास्तव की खंडपीठ ने चार अन्य टावरों (टावर 16 से 19) में बनाए गए दो अतिरिक्त मंजिलों को भी दो महीने के भीतर गिराने का आदेश दिया है। इन अतिरिक्त मंजिलों की वजह से, जो टावर मूल रूप से 8 मंजिल के लिए मंजूर थे, वे 10 मंजिल के हो गए। इन चार टावरों की अवैध मंजिलों पर कुल 32 फ्लैट हैं (जो अभी निर्माणाधीन हैं)।

80 फ्लैट दोनों टावर में

टावर 27 और 28, जिन्हें पूरी तरह से गिराया जाना है, उनमें 80 फ्लैट हैं जो अभी खाली पड़े हैं। कोर्ट ने गाजियाबाद प्रशासन और पुलिस को निर्देश दिया है कि वे इन इमारतों को गिराने के दौरान GDA को सुरक्षा और मदद मुहैया कराएं। साथ ही, कोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए दो महीने का समय दिया है।

गुलमोहर ग्रीन्स विवाद: मामले की शुरुआत कैसे हुई?

- 2006: SVP Builders India Limited और Friends Land Developers ने गुलमोहर ग्रीन्स प्रोजेक्ट शुरू किया। मूल योजना में 34 टावर और 904 फ्लैट प्रस्तावित थे।

- 2010: भारतीय वायुसेना ने 4,560 वर्ग मीटर जमीन के रक्षा मंत्रालय की होने को लेकर आपत्ति जताई। इसके बाद GDA ने 3 जुलाई 2010 को नक्शे की मंजूरी रद्द कर दी।

- 2011 से 2024: बिल्डर ने निर्माण को नियमित कराने के लिए कई बार कंपाउंडिंग आवेदन दिए। GDA ने इन्हें मंजूरी दी।

- 2025: रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन और 11 निवासियों ने कथित अवैध निर्माण और लेआउट में बदलाव को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट का रुख किया।

निवासियों का आरोप था कि बिल्डर ने मूल लेआउट में बदलाव कर 112 अतिरिक्त यूनिट जोड़ीं और मशीन रूम व जनरेटर रूम जैसी सुविधाओं के लिए कॉमन एरिया का इस्तेमाल किया।

हाई कोर्ट ने क्या आदेश दिया?

1. दो टावरों को गिराना होगा: टावर 27 और 28 को पूरी तरह ध्वस्त करने का आदेश दिया गया है। इनमें 80 खाली फ्लैट हैं।

2. चार टावरों की अतिरिक्त मंजिलें हटेंगी: टावर 16, 17, 18 और 19 में बनाई गई दो-दो अनधिकृत अतिरिक्त मंजिलें गिराई जाएंगी। इनमें 32 निर्माणाधीन फ्लैट हैं।

3. दो महीने की समय-सीमा: ध्वस्तीकरण की पूरी कार्रवाई दो महीने में पूरी करनी होगी। GDA को प्रशासन और पुलिस की मदद से कार्रवाई करनी होगी।

4. बिल्डर पर ₹25 लाख का जुर्माना: Friends Land Developers पर जुर्माना लगाया गया है।

5. FIR दर्ज करने का निर्देश: पुलिस को फैसले के दो सप्ताह के भीतर बिल्डर के खिलाफ FIR दर्ज करनी होगी।

85 फ्लैट खरीदारों को क्या मिलेगा?

अदालत ने पाया कि बिल्डर ने कॉमन एरिया के संबंध में तथ्य गलत तरीके से पेश किए और इन जगहों को फ्लैट मालिकों को बेचा। इसलिए Friends Land Developers को ग्राउंड फ्लोर के 85 निवासियों को कॉमन एरिया की बिक्री कीमत, निर्माण लागत और 10% ब्याज सहित लौटानी होगी। इसके अलावा, 11 याचिकाकर्ताओं को GDA की ओर से ₹50,000 प्रति व्यक्ति दिए जाएंगे। यानी उन्हें कुल ₹5.5 लाख मिलेंगे।

डेवलपर्स पर लगाया 25 लाख का जुर्माना

अदालत ने 'फ्रेंड्स लैंड डेवलपर्स' पर 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और पुलिस को आदेश दिया कि फैसले के दो सप्ताह के भीतर FIR दर्ज की जाए। कॉमन एरिया (साझा जगहों) पर हुए अवैध निर्माण के लिए, अदालत ने बिल्डर को निर्देश दिया कि वह ग्राउंड फ्लोर पर रहने वाले 85 निवासियों को इन जगहों की बिक्री कीमत, निर्माण लागत और 10% ब्याज वापस करे। अदालत ने फैसला सुनाया, "यह स्पष्ट मामला है जहां प्रमोटर ने तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया और कॉमन एरिया बेचकर अपार्टमेंट मालिकों के साथ धोखाधड़ी की है, जो कि एक अपराध है।"

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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