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'रिजीम चेंज' के लिए हिंसा की तो UP में नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी, योगी सरकार ने सख्त की चरित्र सत्यापन की नीति

सूत्रों के मुताबिक नई नीति के तहत हत्या, डकैती, बलात्कार, लज्जा भंग, भ्रष्टाचार ,आतंकवादी कृत्य, पेपर लीक और सॉल्वर गैंग से जुड़े मामलों में लिप्त पाए जाने वाले अभ्यर्थियों के लिए सरकारी नौकरी के दरवाजे पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं। यह नियम पहले से भी थे लेकिन इन्हें अब और स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।

Photo : PTI

Uttar Pradesh News: यूपी सरकार ने निर्गमन परिषदों और स्थानीय निकायों में सीधी भर्ती के तहत चयन होने वाले अभ्यर्थियों के लिए चरित्र सत्यापन को लेकर नीति और सख्त की है। ऐसे व्यक्ति जो किसी ऐसे संगठन के सदस्य हैं जिनका उद्देश्य हिंसा के दम पर व्यवस्था बदलना है यानी रिजीम चेंज करना है तो वह सरकारी नौकरी के लिए अपात्र होंगे। हालांकि, राजनीतिक विचारधारा के आधार पर किसी को अयोग्य नहीं माना जाएगा।

सरकारी नौकरी के दरवाजे पूरी तरह बंद

सूत्रों के मुताबिक नई नीति के तहत हत्या, डकैती, बलात्कार, लज्जा भंग, भ्रष्टाचार ,आतंकवादी कृत्य, पेपर लीक और सॉल्वर गैंग से जुड़े मामलों में लिप्त पाए जाने वाले अभ्यर्थियों के लिए सरकारी नौकरी के दरवाजे पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं। यह नियम पहले से भी थे लेकिन इन्हें अब और स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। इसमें कहा गया है कि 21 वर्ग की उम्र के बाद उसे पर दर्ज ऐसे मामलों की जांच की तिथि से 3 वर्ष के भीतर 'रिजीम चेंज' वाली गतिविधि में भाग लेने को इस बात का प्रमाण माना जाएगा कि व्यक्ति अभी भी ऐसी गतिविधियों में सक्रिय है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल एफआईआर दर्ज होने या जांच लंबित रहने से व्यक्ति को स्वत अयोग्य नहीं माना जाएगा।

30 दिन में देनी होगी चरित्र सत्यापन रिपोर्ट

जिला पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) को चरित्र सत्यापन रिपोर्ट मिलने के 30 दिन के भीतर नियुक्ति प्राधिकारी को रिपोर्ट देनी होगी। समय पर रिपोर्ट नहीं मिलने पर गृह विभाग इसकी निगरानी करेगा। सत्यापन के लिए पुलिस या एलआईयू अभ्यर्थी के घर जाकर पूछताछ नहीं करेगी और न ही उसकी भौतिक उपस्थिति जरूरी होगी। यदि रिपोर्ट प्रतिकूल होती है तो जिलाधिकारी अपनी संस्तुति भेजने से पहले अभ्यर्थी को ऑनलाइन या व्यक्तिगत रूप से अपना पक्ष रखने का अवसर देंगे।

प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक एम. देवराज की ओर से यह शासनादेश हाईकोर्ट के निर्देशों के पालन के तहत जारी किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नए प्रावधान पहले से लागू नियमों की तुलना में अधिक स्पष्ट हैं।

Vinod Mishra
विनोद मिश्राauthor

दिल्ली से लेकर यूपी की राजधानी लखनऊ में करीब दो दशक से टीवी पत्रकारिता कर रहें है। यूपी की सियासत की नब्ज और ब्यूरोकेसी की समझ है। पत्रकारिता एक पैशन है।

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