Ramesh Damani Bullish on India: भारतीय शेयर बाजार में लंबे समय से सुस्ती, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अमेरिकी बाजारों में AI कंपनियों की तेजी के बीच दिग्गज निवेशक रमेश दमानी का भरोसा भारत पर कायम है। NDTV पर एक इंटरव्यू में में दमानी ने कहा कि शेयर बाजार से हर साल एक जैसा रिटर्न मिलने की उम्मीद करना गलत है। कभी बाजार कई साल तक ठहरा रहता है, तो कभी कुछ वर्षों में शानदार रिटर्न देता है। यही वजह है कि वह कमजोर इंडेक्स प्रदर्शन को भारत की पूरी निवेश कहानी का अंत नहीं मानते।
भी क्यों नहीं टूटा भरोसा?
शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए लगातार कमजोर रिटर्न सबसे बड़ी परेशानी बन जाते हैं। जब Nifty जैसे प्रमुख इंडेक्स में लंबे समय तक खास बढ़त नहीं दिखती और मिडकैप-स्मॉलकैप शेयरों में भी चुनिंदा कंपनियों को छोड़कर तेजी कमजोर पड़ जाती है, तो निवेशकों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि पैसा आखिर कहां बनेगा। रमेश दमानी का नजरिया इससे अलग है। उनका मानना है कि बाजार को हर साल एक निश्चित रिटर्न देने वाली मशीन की तरह नहीं देखना चाहिए।
उन्होंने कहा, शेयर बाजार निश्चित रिटर्न नहीं देता। उनके मुताबिक, अगर किसी निवेशक को तय रिटर्न चाहिए, तो उसे फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) जैसे विकल्पों पर विचार करना चाहिए। इक्विटी बाजार में रिटर्न कई बार एक साथ आते हैं। उनके मुताबिक, कुछ हजार अंक की गिरावट या लंबे समय तक इंडेक्स में ठहराव देखकर अनुभवी निवेशकों को अपना नजरिया नहीं बदलना चाहिए।
सुस्त बाजार में भी Infosys और Wipro ने बनाई दौलत
दमानी ने अपने नजरिये को समझाने के लिए 1993 से 2000 के आसपास के दौर का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक, उस समय Sensex लंबे समय तक सीमित दायरे में रहा, लेकिन इसके बावजूद कुछ टेक्नोलॉजी कंपनियों ने निवेशकों के लिए बड़ी संपत्ति बनाई।
उन्होंने Infosys और Wipro जैसी कंपनियों का जिक्र करते हुए बताया कि इंडेक्स में बड़ी तेजी नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि बाजार में हर कंपनी का प्रदर्शन खराब रहा। उन्होंने कहा कि एक विश्लेषक के तौर पर उनका काम ऐसी ही कंपनियों को पहचानना है। वह आकर्षक वैल्यूएशन वाले शेयर तलाश रहे हैं और जहां निवेश में गलती हुई है, वहां बिकवाली भी कर रहे हैं।
1991 के बाद निवेश का सबसे अच्छा आज
भारत को लेकर दमानी की सबसे बड़ी दलील उसकी लंबी अवधि की विकास क्षमता है। उनका कहना है कि भारत में निवेश करने का सबसे अच्छा समय 1991 में आर्थिक उदारीकरण के दौरान था और दूसरा सबसे अच्छा समय आज है। उन्होंने कहा, “अगले 20-30 भारत और खासतौर पर यहां के वित्तीय बाजार के लिए पिछले 20-30 साल की तुलना में बेहतर रहने वाले हैं।”
अभी और लुढ़क सकते हैं निफ्टी सेंसेक्स
दमानी कोरे आशावाद की बात नहीं करते हैं। बल्कि, उनके मुताबिक, भारत का बाजार विविध है और यहां अलग-अलग तरह के कारोबार करने वाली कंपनियां मौजूद हैं। मौजूदा कमजोरी के बाद कुछ कंपनियों के वैल्यूएशन आकर्षक स्तर पर आ गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बाजार निकट भविष्य में और नीचे जा सकता है। लेकिन उनके अनुसार, केवल इस डर से लंबी अवधि की संभावनाओं को खारिज नहीं कर देना चाहिए।
भारत की 3 ताकतों पर टिका दमानी का भरोसा
- पहली वजह: बड़ी आबादी और डेमोग्राफी। भारत का विशाल जनसंख्या आधार कारोबारों के लिए बड़ा उपभोक्ता बाजार तैयार करता है। आय और खपत में बढ़ोतरी होने पर कई उद्योगों के लिए विकास के अवसर बन सकते हैं।
- दूसरी वजह: डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर। भारत में डिजिटल सेवाओं के विस्तार ने कारोबार करने और ग्राहकों तक पहुंचने के तरीके बदले हैं। दमानी इसे देश की अहम संरचनात्मक ताकत मानते हैं।
- तीसरी वजह: लोकतांत्रिक व्यवस्था। उनके मुताबिक, भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था भी उसकी विशिष्टता है। चीन से तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी सब्सिडी और सप्लाई चेन पर नियंत्रण अपने आप में शेयर बाजार के निवेशकों के लिए अच्छे रिटर्न की गारंटी नहीं हैं।
रुपये पर भी भरोसा कायम
दमानी भारतीय रुपये को लेकर भी सकारात्मक नजरिया रखते हैं। उनका मानना है कि परचेजिंग पावर पैरिटी (PPP) के आधार पर रुपया कम मूल्यांकित है और अगले 3 साल में इसमें मजबूती आ सकती है।
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