Anthropic IPO के जरिये 100 अरब डॉलर जुटाने की तैयारी कर रही है। इसके अलावा कंपनी ने SEC को जो दस्तावेज दिए हैं, उनके मुताबिक कंपनी के पास के पास करीब ₹12.5 लाख करोड़ का कैश और शॉर्ट-टर्म निवेश है। कंपनी का रेवेन्यू भी तेजी से बढ़ रहा है। इसके बावजूद मशहूर निवेशक माइकल बरी (Michael Burry) ने उसके बिजनेस मॉडल और पूरे AI बूम की मजबूती पर सवाल उठाए हैं।
बरी का कहना है कि AI इंडस्ट्री की आपस में जुड़ी फाइनेंसिंग और कंप्यूटिंग पर भारी खर्च की व्यवस्था किसी बड़े झटके की स्थिति में बेहद कमजोर साबित हो सकती है। ‘द बिग शॉर्ट’ (The Big Short) के नाम से चर्चित बरी ने Anthropic की IPO फाइलिंग का विश्लेषण करते हुए चेतावनी दी है कि AI सेक्टर की मौजूदा तेजी के पीछे बड़े वित्तीय जोखिम छिपे हैं। आखिर इतनी मजबूत कैश पोजीशन के बावजूद उन्हें कंपनी में क्या खोट दिखाई दे रही है?
₹12.5 लाख करोड़ का कैश कहां से आया?
बरी कहते हैं कि कंपनी के पास 112.4 अरब डॉलर कैश और 19.3 अरब डॉलर के शॉर्ट-टर्म निवेश हैं। यानी दोनों को मिलाकर यह रकम करीब 131.7 अरब डॉलर या लगभग ₹12.55 लाख करोड़ बैठती है। लेकिन, बड़ा सवाल यह है कि ये रकम कहां से आई। असल में यह कंपनी की कमाई नहीं है। बल्कि, निवेशकों से मिली है।
क्यों मायने नहीं रखता कैश रिजर्व?
कंपनी के पास बड़ा कैश रिजर्व है। इसके बाद भी आईपीओ लाया जा रहा है। यह अपने आप में बड़े सवाल खड़ा करता है। माइकल बरी इसे डिकोड करते हुए कहते हैं। भले ही कंपनी के पास दिखाने के लिए AI कंपनियों में सबसे बड़ा कैश रिजर्व है। लेकिन, जब इसे कंपनी की देनदारियों के सामने रखकर देखा जाता है, तो पता चलता है कि यह रकम बहुत छोटी है। क्योंकि, कंपनी की सबसे बड़ी चिंता AI मॉडल चलाने के लिए कंप्यूटिंग क्षमता खरीदने पर होने वाले भारी खर्च है।
537 अरब डॉलर का सवाल
बरी के मुताबिक, Anthropic के आईपीओ आवेदन में दिए गए दस्तावेजों से पता चलता है कि कंपनी ने Amazon, Google और Microsoft समेत कई कंपनियों से करीब 537 अरब डॉलर की कंप्यूटिंग खरीद प्रतिबद्धताएं की हैं। लंबित समझौते जुड़ने पर यह आंकड़ा 800 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इन समझौतों में कुछ ऐसी शर्तें हैं, जिनके तहत तय कंप्यूटिंग क्षमता का पूरा इस्तेमाल नहीं होने पर भी कंपनी को भुगतान करना पड़ सकता है। इसे टेक और पे व्यवस्था कहा जाता है। अगर AI की मांग लगातार बढ़ती रही, तो यह निवेश काम आ सकता है, लेकिन मांग धीमी पड़ने पर यही प्रतिबद्धताएं आर्थिक दबाव बन सकती हैं।
रेवेन्यू ग्रोथ से ज्यादा खर्च का दबाव
बरी ने कंपनी की रिकॉर्ड रेवेन्यू ग्रोथ को भी सही संदर्भ में समझने की बात कही है। बरी के मुताबिक रेवेन्यू ग्रोथ को सालाना आधार पर देखने की जगह तिमाही आधार पर देखने की जरूरत है। इसके अलावा सही संदर्भ में समझना भी जरूरी है। बरी के मुताबिक भले ही कंपनी की कमाई की रफ्तार बढ़ी है। लेकिन, कंप्यूटिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले खर्च की तुलना में यह नाकाफी है। यदि आने वाले समय में रेवेन्यू की रफ्तार धीमी पड़ती है, तो कंपनी के लिए इतने बड़े खर्च को संभालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
क्यों पूरी AI इंडस्ट्री ढह सकती है?
बरी की चिंता सिर्फ Anthropic तक सीमित नहीं है। Amazon, Google और Microsoft जैसी कंपनियां AI कंपनियों को कंप्यूटिंग सेवाएं देने के साथ-साथ निवेशक, वित्तीय भागीदार या कारोबारी सहयोगी भी हैं। इस तरह AI इकोसिस्टम में कई वित्तीय रिश्ते एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। बरी के मुताबिक, तेजी के दौर में ये रिश्ते मजबूती देते दिखाई देते हैं, लेकिन मांग में ठहराव आने पर इनसे जोखिम भी बढ़ सकता है।
इसके अलावा, AI मॉडल अधिक कुशल होने से कम कंप्यूटिंग क्षमता में ज्यादा काम हो सकता है। छोटे और सस्ते मॉडल लोकप्रिय होने पर महंगी कंप्यूटिंग की मांग के अनुमान बदल सकते हैं। अगर कंपनियों की कमाई उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ी, तो लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश पर दबाव आ सकता है।
