Stock Market Prediction Vijay Kedia : शेयर बाजार में निवेश करके जल्दी और आसानी से मोटा मुनाफा कमाने की उम्मीद लगाए बैठे निवेशकों को अभी धैर्य रखना पड़ सकता है। दिग्गज निवेशक विजय केडिया (Vijay Kedia) का मानना है कि निफ्टी को अपना नया ऑल टाइम हाई बनाने में अभी समय लग सकता है।
विजय केडिया के मुताबिक, 2028 से पहले इंडेक्स के नया रिकॉर्ड बनाने की संभावना कम है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि शेयर बाजार में कमाई के मौके खत्म हो गए हैं। केडिया का फोकस अब चुनिंदा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर है, जहां कंपनियों के प्रदर्शन और वैल्यूएशन के आधार पर निवेश के अवसर मिल सकते हैं। उन्होंने साफ कहा कि पहले जैसा 'ईजी मनी' यानी आसानी से पैसा बनाने वाला दौर अब पीछे छूट चुका है।
2028 से पहले नया हाई क्यों मुश्किल?
Business Today को दिए एक इंटरव्यू में विजय केडिया ने पुराने बुल मार्केट का उदाहरण देते हुए समझाया कि शेयर बाजार हमेशा एक जैसी रफ्तार से नहीं चलता। तेजी के लंबे दौर के बाद बाजार में करेक्शन और कंसोलिडेशन का समय भी आता है।
केडिया के मुताबिक, 2003 में शुरू हुआ बुल मार्केट 2007 के अंत या 2008 के शुरुआती महीनों तक खत्म हो गया था। इसके बाद इंडेक्स को नया हाई बनाने के लिए करीब छह साल इंतजार करना पड़ा।
इसी ऐतिहासिक अनुभव के आधार पर उनका अनुमान है कि मौजूदा बाजार चक्र में भी निवेशकों को बेंचमार्क इंडेक्स के नए रिकॉर्ड के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि बाजार की चाल को देखते हुए उन्हें नहीं लगता कि 2028 से पहले नया हाई बन पाएगा।
कब बना ऑल टाइम हाई?
जनवरी 2026 में निफ्टी ने सितंबर 2024 के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए नया ऑल टाइम हाई बनाया था। NSE के निफ्टी 50 का इंट्राडे रिकॉर्ड 5 जनवरी 2026 को 26,373.20 रहा। हालांकि, यह स्तर सितंबर 2024 के स्तर से बहुत ऊपर नहीं था। ऐसे में अब भी एक आम धारणा के तौर पर 2024 के हाई को महत्व दिया जाता है।
कहां बन सकता है पैसा?
विजय केडिया का साफ कहना है कि अब इंडेक्स में पैसा बनाना मुश्किल है। लेकिन, चुनिंदा स्टॉक्स में पैसा बनाए जाने की संभावनाओं से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि निफ्टी में 50 कंपनियां और सेंसेक्स में 30 कंपनियां शामिल हैं, जबकि भारतीय शेयर बाजार में हजारों कंपनियां सूचीबद्ध हैं। ऐसे में कुछ बड़ी कंपनियों के कमजोर प्रदर्शन से बेंचमार्क इंडेक्स दबाव में रह सकता है, जबकि दूसरी कंपनियों के शेयर तेजी दिखा सकते हैं।
केडिया के मुताबिक, मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में चुनिंदा शेयरों में तेजी के अवसर मिल सकते हैं। हालांकि, हर मिडकैप या स्मॉलकैप शेयर में तेजी आएगी, ऐसा मानना सही नहीं होगा। निवेशकों को कंपनी के कारोबार, मुनाफे की संभावनाओं और शेयर की मौजूदा कीमत का आकलन करना होगा।
अब बॉटम-अप अप्रोच अपनाने का समय
केडिया का मानना है कि निवेशकों को अब सिर्फ निफ्टी या सेंसेक्स की दिशा देखकर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। इसके बजाय बॉटम-अप अप्रोच अपनानी चाहिए। इसमें पहले उन कंपनियों की पहचान की जाती है जिनका कारोबार मजबूत है और जिनमें भविष्य में ग्रोथ की संभावना है। इसके बाद उनके शेयरों के वैल्यूएशन को देखकर निवेश का फैसला लिया जाता है।
डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या कमोडिटी में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।
