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हरिद्वार अर्धकुंभ में 14 जनवरी से 20 अप्रैल तक होंगे 11 'अमृत स्नान', 15 मार्च को होगा 'देव डोलियों' का भव्य गंगा स्नान

Amrit Snan Dates: उत्तराखंड में आयोजित होने वाले हरिद्वार अर्धकुंभ मेले में 14 जनवरी मकर संक्रांति से 20 अप्रैल चैत्र पूर्णिमा तक 11 अमृत स्नान होंगे। 15 मार्च को देव डोलियां गंगा स्नान करेंगी।

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हरिद्वार अर्धकुंभ में 14 जनवरी से 20 अप्रैल तक होंगे 11 'अमृत स्नान', 15 मार्च को होगा 'देव डोलियों' का भव्य गंगा स्नान

Haridwar ArdhKumbh 2027: उत्तराखंड में आयोजित होने वाले हरिद्वार अर्धकुंभ मेले को लेकर मेला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मेला प्रशासन द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस भव्य धार्मिक आयोजन के दौरान 14 जनवरी (मकर संक्रांति) से लेकर 20 अप्रैल (चैत्र पूर्णिमा) तक कुल 11 'अमृत स्नान' आयोजित किए जाएंगे।

इसके साथ ही, उत्तराखंड की अनूठी लोक संस्कृति और देव परंपरा के प्रतीक स्वरूप राज्य के विभिन्न अंचलों से आने वाली देवी-देवताओं की पालकियों (देव डोलियों) का भव्य गंगा स्नान 15 मार्च को संपन्न होगा।

'देव डोली' शोभायात्रा और गंगा स्नान की विशेष रूपरेखा

अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में देव डोली शोभायात्रा और श्रद्धालुओं की व्यवस्थाओं पर विस्तृत चर्चा की गई:

ऋषिकेश में शोभायात्रा: 14 मार्च को ऋषिकेश में राज्यभर से जुटने वाली 'देव डोलियों' की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी।

हरिद्वार में अमृत स्नान: 15 मार्च को ये देव डोलियां हरिद्वार पहुंचकर हर की पौड़ी और संबंधित घाटों पर पवित्र गंगा स्नान करेंगी।

सांस्कृतिक धरोहर का प्रदर्शन: अपर मेलाधिकारी ने कहा कि यह आयोजन देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को 'देवभूमि' उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, धार्मिक मान्यताओं और सदियों पुरानी परंपराओं से रूबरू कराने का स्वर्णिम अवसर होगा। 'देवभूमि लोक संस्कृति विरासत शोभायात्रा समिति' के पदाधिकारी श्रद्धालुओं और देव प्रतिनिधियों के स्वागत की तैयारियों में जुटे हैं।

पंतद्वीप और घाटों का स्थलीय निरीक्षण, भीड़ प्रबंधन पर जोर

कुंभ क्षेत्र की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए मेलाधिकारी सोनिका ने पंतद्वीप क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने 'उत्तराखंड अवस्थापना एवं निवेश विकास बोर्ड' (UCIDB) की विकास परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लिया।

मेलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि:

1. भीड़ प्रबंधन (Crowd Management): कुंभ मेले के दौरान हर की पौड़ी के उत्तरी क्षेत्र और आसपास संभावित भारी भीड़ का व्यवस्थित प्रबंधन प्राथमिक आधार पर किया जाए।

2. सुगम आवाजाही: पैदल मार्गों और आसपास के प्रमुख गंगा घाटों के बीच तीर्थयात्रियों की आवाजाही को पूरी तरह सुगम, सुरक्षित और निर्बाध बनाया जाए।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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