Gold Investment Risk: आमतौर पर सोने को सुरक्षित निवेश यानी 'सेफ हेवन' माना जाता है। इसके पीछे यह धारणा है कि सोने की कीमतों में शेयर बाजार जैसी तेज गिरावट या क्रैश नहीं आता, लेकिन यह पूरी सच्चाई नहीं है। हकीकत इससे अलग है। इतिहास गवाह है कि सोने की कीमतों में भी कई बार बड़ी गिरावट आई है, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
पिछले एक साल के दौरान भी सोना अपने रिकॉर्ड हाई से करीब 23% तक टूट चुका है। इससे साफ है कि सोना भी पूरी तरह जोखिम-मुक्त निवेश नहीं है। ऐसे में आंख मूंदकर सोने में पैसा लगाने के बजाय इसके जोखिमों को समझना जरूरी है। आइए, इतिहास की बड़ी गिरावटों पर नजर डालते हैं और इससे मिलने वाले जरूरी सबक को समझते हैं।
कब-कब सोने में आई बड़ी गिरावट?
22 जनवरी 1980: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव एक दिन में 13.24% टूटकर 850 डॉलर से गिरकर 737.50 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। इस बड़ी गिरावट ने एक लंबे 'बुल रन' (तेजी के दौर) को खत्म कर दिया। यह गिरावट 1971 में अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के कार्यकाल के दौरान डॉलर को सोने में बदलने की सुविधा खत्म होने के बाद शुरू हुई थी, हालांकि यह इस गिरावट का तात्कालिक कारण नहीं था। यह गिरावट आसमान छूती महंगाई, भू-राजनीतिक उथल-पुथल और सट्टेबाजी के कारण आई तेजी के बाद हुई थी।
28 फरवरी 1983: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में लगभग 12.1 प्रतिशत (करीब 55 से 56 डॉलर) की गिरावट आई और यह 408.50 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के स्तर पर बंद हुआ। तेल की कीमतों में कमी की उम्मीदों और अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने के अनुमानों ने सोने पर दबाव डाला, जिससे मुद्रास्फीति से बचाव (हेज) के रूप में इसकी अहमियत कम हो गई और सोने की कीमतों पर दबाव पड़ा।
13 अक्टूबर 2008: वैश्विक वित्तीय संकट से सोने की कीमतों पर दबाव पड़ा क्योंकि निवेशकों ने नकदी जुटाने और अपनी तत्काल वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी संपत्तियां बेचना शुरू कर दिया। 'सुरक्षित निवेश' (सेफ-हेवन) माने जाने के बावजूद, सोने को भी व्यापक बाजार बिकवाली का सामना करना पड़ा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना सोना करीब 7.7% टूटकर 831.50 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वित्तीय तनाव और अनिश्चितता के बीच इसकी कीमतों में भारी गिरावट आई।
24 अगस्त 2011: वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी आने की आशंका और बाजार में बिकवाली से सोने की कीमत में बड़ी गिरावट आई। सोने का वायदा भाव 5.60% टूटकर 1,754 डॉलर पर आ गया।
15 अप्रैल 2013: सोने में ऐतिहासिक बिकवाली देखी गई, जिसमें एक ही दिन के कारोबार के दौरान कीमतें 9.3 प्रतिशत तक गिरकर लगभग 1,180.50 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर आ गईं। रिपोर्टों के अनुसार, निवेशकों द्वारा भारी बिकवाली, चीन के आर्थिक आंकड़ों का उम्मीद से कमजोर रहना और केंद्रीय बैंकों द्वारा सोना बेचे जाने की आशंकाओं ने इस गिरावट को और तेज कर दिया, जिससे सोने की कीमतों में एक बड़ा बदलाव आया। दिसंबर 2015 में सोने की कीमतों में लगभग 5.6 प्रतिशत की गिरावट आई और इसकी हाजिर (स्पॉट) कीमतें गिरकर लगभग 1,046.45 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर आ गईं।
21 अक्टूबर 2022: वैश्विक आर्थिक दृष्टिकोण को लेकर चिंताएं और निवेशकों की बदलती धारणाओं ने बाजार पर दबाव डाला। अमेरिकी मौद्रिक नीति के सख्त होने की उम्मीदों और डॉलर के मजबूत होने से भी सोने की कीमतों पर दबाव पड़ा। 21 अक्टूबर, 2022 को अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने और अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों के बीच सोने की कीमतों में 6.30% की गिरावट आई, जिससे स्पॉट कीमतें गिरकर लगभग 1,617.28 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर आ गईं।
30 जनवरी 2026: बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली और अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने के कारण स्पॉट गोल्ड की कीमत लगभग 9.5% गिरकर लगभग 4,883.62 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस रह गई। वास्तविक यील्ड (रिटर्न) को लेकर बदलती उम्मीदों, व्यापार से जुड़ी अनिश्चितता और फेडरल रिजर्व के आगामी नेतृत्व को लेकर बनी अनिश्चितता ने निवेशकों को और अधिक परेशान कर दिया। इससे कुछ ही दिन पहले, 28 जनवरी, 2026 को स्पॉट गोल्ड की कीमत उछलकर 5,419 डॉलर प्रति औंस के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई थी।
सोने का इतिहास
निवेश से पहले किन बातों का ध्यान रखें
- सारी रकम एक साथ न लगाएं
- पोर्टफोलियो में संतुलन रखें
- निवेश का उद्देश्य तय करें
- निवेश के तरीके को समझें
- गिरावट को सस्ता होने का प्रमाण न मानें
ऐतिहासिक गिरावट निवेशकों को क्या सिखाती है?
सोने की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट निवेशकों को दिखाती है कि एक ऐसी संपत्ति जिसे व्यापक रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है, वह भी भारी गिरावट से अछूती नहीं है। जानकारों का कहना है कि सोने की कीमतों में भारी गिरावट आ सकती है जब कीमतें बहुत तेजी से बढ़ती हैं, सट्टा लगाने वालों की संख्या बढ़ जाती है, निवेशक मुनाफा कमाते हैं, या व्यापक आर्थिक परिस्थितियां बदल जाती हैं। वित्तीय संकट के समय में, सोने की कीमत अस्थायी रूप से गिर सकती है क्योंकि निवेशक नकदी की जरूरतों को पूरा करने के लिए सोने को बेचते हैं।
सोने को हर हाल में सबसे सुरक्षित निवेश नहीं मानना चाहिए। याद रखें, सोना जोखिम कम करने का एक जरिया हो सकता है, नुकसान से पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं। हालांकि, दूसरी ओर इतिहास से यह सबक भी मिलती है कि सोने की कीमत में भारी गिरावट के बाद खरीदारी करना फायदेमंद हो सकता है। इसलिए हमेशा सोने में निवेश लंबी अवधि की सोच के साथ करें। लंबी अवधि में सोना नुकसान नहीं कराता है।
