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सिर्फ जोश में खुलवा लिए करोड़ों Demat खाते! अब 66% निवेशक आईडी-पासवर्ड भूलकर बैठे हैं खाली; SEBI का बड़ा खुलासा

शेयर बाजार में निवेश का क्रेज तो बढ़ा, लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। SEBI के ताजा डेटा के मुताबिक, देश के 66% डिमैट अकाउंट्स डॉर्मेंट पड़े हुए हैं। आखिर क्या वजह है कि करोड़ों लोग खाता खुलवाने के बाद निवेश करना ही भूल गए? आइए जानते हैं इस चौंकाने वाले खुलासे के पीछे का सच।

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demat account dormant

शेयर बाजार की रिकॉर्ड ऊंचाई और आईपीओ (IPO) की चकाचौंध देखकर पिछले कुछ वर्षों में देश में डिमैट अकाउंट खुलवाने की बाढ़ सी आ गई थी। हर कोई रातों-रात अमीर बनने का सपना देख रहा था। लेकिन अब जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) के डेटा के मुताबिक, देश के करीब दो-तिहाई डिमैट अकाउंट्स 'कोमा' में चले गए हैं। यानी करोड़ों लोगों ने खाता तो खुलवा लिया, लेकिन अब वे उनमें झांक तक नहीं रहे हैं और वो अकाउंट डॉर्मेंट हो गए हैं।

बाजार में मचे शोर को देखकर बहुत से लोगों ने सोशल मीडिया और दोस्तों के कहने पर जोश-जोश में डिमैट अकाउंट तो खुलवा लिए, लेकिन उनमें से अधिकतर अब धूल फांक रहे हैं। सेबी के आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में कुल 220 मिलियन (22 करोड़) से ज्यादा डिमैट अकाउंट्स में से केवल 33% ही एक्टिव हैं। इसका मतलब है कि बाकी के 67% यानी लगभग दो-तिहाई खाते निष्क्रिय (Dormant) पड़े हैं। इन खातों में पिछले एक साल या उससे अधिक समय से न तो कोई शेयर खरीदा गया और न ही बेचा गया। ऐसा लगता है कि निवेशक या तो अपना लॉगिन पासवर्ड भूल गए हैं या फिर शुरुआती घाटे के बाद उन्होंने बाजार से तौबा कर ली है।

आखिर क्यों बंद हो गए करोड़ों डिमैट खाते?

विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना काल के बाद शेयर बाजार में जो तेजी आई थी, उसे देखकर 'FOMO' (पीछे छूट जाने का डर) के चक्कर में लाखों नए युवाओं ने एंट्री ली थी। इनमें से कई लोगों ने केवल किसी एक बड़े आईपीओ (IPO) में किस्मत आजमाने के लिए खाता खुलवाया था। जब उन्हें अलॉटमेंट नहीं मिला या लिस्टिंग के बाद मुनाफा लेकर वे निकल गए, तो उन्होंने दोबारा मुड़कर नहीं देखा। इसके अलावा, कई निवेशकों ने 'पेनी स्टॉक्स' (कौड़ियों के दाम वाले शेयर) में पैसा लगाया और जब पैसा डूबने लगा, तो उन्होंने डर के मारे अपना ऐप ही डिलीट कर दिया।

मेंटेनेंस चार्ज का बोझ और लापरवाही

एक बड़ी वजह AMC (Annual Maintenance Charge) भी है। कई ब्रोकर्स खाता खोलने के पहले साल तो फीस नहीं लेते, लेकिन उसके बाद हर साल 300 से 800 रुपये तक चार्ज काटते हैं। कई छोटे निवेशकों को लगता है कि जब वे ट्रेडिंग ही नहीं कर रहे, तो पैसे क्यों दें, इसलिए वे खाते को ऐसे ही लावारिस छोड़ देते हैं। लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि खाता बंद न करने पर यह बकाया राशि (Outstanding Dues) बढ़ती रहती है, जो उनके सिबिल स्कोर या भविष्य के निवेश पर असर डाल सकती है।

SEBI की चिंता और आगे की राह

सेबी के लिए यह डेटा चिंता का विषय है क्योंकि इतने सारे निष्क्रिय खाते सुरक्षा के लिहाज से जोखिम भरे हो सकते हैं। बंद पड़े खातों का इस्तेमाल 'मनी लॉन्ड्रिंग' या 'शेयर मैनिपुलेशन' के लिए होने का खतरा रहता है। इसीलिए सेबी अब इन 'सोए हुए' खातों को लेकर नियम सख्त कर सकता है। अगर आपका भी कोई ऐसा खाता है जिसे आप इस्तेमाल नहीं कर रहे, तो बेहतर होगा कि आप उसे या तो चालू करें या फिर औपचारिक रूप से बंद (Close) कर दें।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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