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शेयरों की जगह बारिश की ट्रेडिंग! NCDEX ने लॉन्च किया वेदर डेरिवेटिव, मुंबई की बारिश बनी कमोडिटी

शेयरों की ट्रेडिंग अब पुरानी बात हो गई है। अब आप कमोडिटी और शेयरों की तरह बारिश की ट्रेडिंग कर सकते हैं। NCDEX ने देश का पहला वेदर डेरिवेटिव पेश किया है। इसमें मुंबई की बारिश की ट्रेडिं की जाएगा।

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बारिश की होगी ट्रेडिंग

मुंबई की बारिश को अक्सर आफत के तौर पर ही देखा जाता है। क्योंकि देश की आर्थिक राजधानी बारिश की वजह से थम से जाती है। लेकिन, अब इस बारिश की पहचान बदलने वाली है। इस बारिश को गोल्ड, सिल्वर और शेयरों की तरह एक कीमती कमोडिटी माना जाएगा। हर बूंद पर दांव लगाया जाएगा। देश के प्रमुख कमोडिटी एक्सचेंज National Commodity and Derivatives Exchange (NCDEX) ने 1 जून से देश का पहला एक्सचेंज-ट्रेडेड वेदर डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट लॉन्च करने का ऐलान किया है। यह कॉन्ट्रैक्ट मुंबई में होने वाली बारिश के आंकड़ों पर आधारित होगा।

कैसे तय होगी वैल्यू?

यह कैश-सेटल्ड फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट होगा। इसकी वैल्यू भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के रेनफाल डेविएशन डाटा से तय होगी। यानी मोटे तौर पर मुंबई में सामान्य से ज्यादा या कम बारिश होने को लेकर ट्रेडर्स और कंपनियां दांव लगा पाएंगी।

क्यों खास है यह कॉन्ट्रैक्ट?

मुंबई में हर साल मानसून के दौरान भारी बारिश होती है। इसकी वजह से यहां आम लोग तो जूझते ही हैं। इसके साथ ही ट्रांसपोर्ट, सप्लाई चेन, कंस्ट्रक्शन और बिजनेस एक्टिविटी भी प्रभावित होती है। ऐसे में कंपनियों को करोड़ो का नुकसान होता है। इस नुकसान पर किसी का कोई नियंत्रण भी नहीं होता है। ऐसे में NCDEX पर मौसम से होने वाले नुकसान से बचने के लिए फाइनेंसियल हेजिंग की जा सकेगी।

किन्हें मिलेगा इसका फायदा?

ट्रेंडिंग तो कोई भी कर सकता है। लेकिन, NCDEX के मुताबिक खेती-किसानी, लॉजिस्टिक्स, कंस्ट्रक्शन, पावर और बैंकिंग सेक्टर इस प्रोडक्ट का इस्तेमाल कर हेजिंग के लिए खासतौर पर कर पाएंगे। क्योंकि, मौसम को लेकर ये सेक्टर काफी संवेदनशील होते हैं।

कैसे काम करेगा Weather Derivative?

अगर किसी कंपनी को डर है कि ज्यादा बारिश से उसका कारोबार प्रभावित हो सकता है, तो वह इस कॉन्ट्रैक्ट के जरिए अपने संभावित नुकसान को हेज कर पाएगी। वहीं, दूसरी तरफ ट्रेडर्स बारिश के अनुमान के आधार पर मुनाफे का मौका तलाश पाएंगे। दुनिया के कई देशों में तापमान और बारिश पर आधारित डेरिवेटिव पहले से ट्रेड होते हैं, लेकिन भारत में यह पहली बार होगा जब बारिश को सीधे ट्रेडेबल कमोडिटी का दर्जा मिलेगा।

कमजोर मानसून की चिंता के बीच लॉन्च

भारत फिलहाल हीटवेव से जूझ रहा है। खासतौर पर अल नीनो की वजह से 2026 के लिए सामान्य से कम मानसून का अनुमान जताया गया है। लिहाजा Weather Derivatives कम बारिश के जोखिम को मैनेज करने में मददगार साबित हो सकता है। NCDEX ने अपनी इस नई ऑफरिंग को सोशल मीडिया पर प्रमोट किया है।

NCDEX का प्रमोशनल कैंपेन में “TradeRain” खूब चर्चा में है। इसके लिए NCDEX टैगलाइन भी दिलचस्प बनाई है। “किसी के लिए यह सिर्फ बारिश है, लेकिन किसी के लिए यह अवसर है।”

डिस्क्लेमर: TimesNow Navbharat किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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