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5 साल नहीं, 1 साल में ग्रेच्युटी का लाभ, जानें किन वर्कर्स को होगा सबसे ज्यादा लाभ

नौकरी करने वाले लोगों के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है। अब ग्रेच्युटी पाने के लिए लंबे 5 साल तक नौकरी करना जरूरी नहीं होगा। नया नियम लागू होते ही सिर्फ 1 साल काम करने वाले कर्मचारियों को भी ग्रेच्युटी का हक मिलेगा। यानी कम समय में नौकरी बदलने वाले, कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले और प्राइवेट सेक्टर के लाखों कर्मचारियों की जेब में सीधा फायदा पहुंचने वाला है।

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सरकार ने श्रम कानूनों में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है, जिससे करोड़ों नौकरीपेशा लोगों को सीधे फायदा मिलेगा। केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने बताया है कि जल्द ही ऐसा प्रावधान लागू किया जाएगा, जिसके तहत केवल एक साल नौकरी करने वाले कर्मचारियों को भी ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा। अभी तक यह सुविधा उन लोगों को मिलती थी, जिन्होंने कम से कम 5 साल लगातार एक ही कंपनी में काम किया हो। नया नियम लागू होने के बाद निजी क्षेत्र के कॉन्ट्रैक्ट और फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को भी यह फायदा मिलेगा।

क्या होती है ग्रैच्युटी?

दरअसल, ग्रेच्युटी उस इनाम की तरह है, जो किसी कर्मचारी को कंपनी के साथ लंबे समय तक जुड़े रहने पर दिया जाता है। देश में यह कानून 1972 से लागू है और इसका कैलकुलेशन भी एक तय फॉर्मूले से किया जाता है, लेकिन यह फॉर्मूला अभी 5 साल की सर्विस के आधार पर है। सरकार ने इस बात का संकेत दिया है कि एक साल में ग्रेच्युटी देने का तरीका भी जल्द बताया जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि कानून में पहले से ही एक प्रावधान मौजूद है, जिसके तहत अगर किसी कर्मचारी की नौकरी के दौरान एक साल के भीतर मृत्यु हो जाती है या वह दिव्यांग हो जाता है, तो भी उसे (या उसके परिवार को) ग्रेच्युटी दी जाती है।

ग्रेच्युटी उन्हीं कंपनियों में दी जाती है जहां कम से कम 10 कर्मचारी काम करते हैं। ग्रेच्युटी की सर्विस अवधि में प्रशिक्षण का समय नहीं जोड़ा जाता। नए नियम लागू होने के बाद कर्मचारियों को पाँच साल का इंतजार नहीं करना पड़ेगा सिर्फ एक साल काम करने पर ही उन्हें ग्रेच्युटी का हक मिल जाएगा। हालांकि, इसका कैलकुलेशन फॉर्मूला कैसा होगा, यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन अनुमान है कि मौजूदा फॉर्मूले को ही थोड़ा बदलकर लागू किया जाएगा।

कितनी मिलेगी ग्रैच्युटी?

अभी ग्रेच्युटी का हिसाब लगाने के लिए अंतिम मासिक वेतन (जिसमें बेसिक + डीए शामिल होता है) को 15 से गुणा करके, फिर उसे कर्मचारी की कुल सर्विस से गुणा किया जाता है और उसके बाद पूरी राशि को 26 से भाग दिया जाता है। आसान भाषा में समझाएं तो अगर किसी कर्मचारी की अंतिम सैलरी 1 लाख रुपये है और उसने पांच साल काम किया है, तो उसकी ग्रेच्युटी (1,00,000×15×5)/26 के अनुसार 2,88,461 रुपये बनेगी।

कानून में 5 साल की शर्त जरूर लिखी है, लेकिन असल में यह पूरी तरह सख्त नहीं है। अगर कोई कर्मचारी 4 साल 240 दिन (6 दिन काम करने वाली कंपनी में) या 4 साल 190 दिन (5 दिन काम करने वाली कंपनी में) पूरा कर लेता है, तो उसे भी ग्रेच्युटी के लिए योग्य मान लिया जाता है। इससे कम अवधि की नौकरी को इस लाभ के लिए मान्य नहीं माना जाता।

इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड 2020 में यह पहले ही तय किया जा चुका था कि फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी अगर एक साल या उससे ज्यादा काम करते हैं तो उन्हें अनुपातिक रूप से ग्रेच्युटी मिलेगी, चाहे उन्होंने 5 साल पूरे किए हों या नहीं। अब सरकार ने इसी प्रावधान को नए श्रम कानून में लागू करने की घोषणा की है। उम्मीद है कि यह नियम जल्द ही पूरी तरह लागू हो जाएगा और इससे लाखों कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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