रिटायरमेंट के बाद ज्यादातर लोग ऐसे निवेश विकल्प की तलाश करते हैं, जहां उनका पैसा सुरक्षित रहे और नियमित आय भी मिलती रहे। ऐसे में दो सबसे लोकप्रिय विकल्प सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) ही काम आते हैं। दोनों ही कम जोखिम वाले निवेश विकल्प हैं, लेकिन ब्याज दर, सुरक्षा, निवेश अवधि और निकासी के नियमों के मामले में इनमें काफी अंतर है।
SCSS में मिल रहा है ज्यादा ब्याज
वर्तमान में सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) पर 8.2% सालाना ब्याज मिल रहा है। इसकी खास बात यह है कि निवेश के समय जो ब्याज दर तय होती है, वही पूरी 5 साल की अवधि के लिए लागू रहती है। यह योजना केंद्र सरकार द्वारा समर्थित है, इसलिए इसे सबसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में गिना जाता है।
वहीं दूसरी ओर, बैंक एफडी पर मिलने वाली ब्याज दर बैंक और अवधि के अनुसार अलग-अलग होती है। बड़े बैंक आमतौर पर वरिष्ठ नागरिकों को 7% से 7.75% के बीच ब्याज देते हैं, जबकि कुछ स्मॉल फाइनेंस बैंक 8% से अधिक ब्याज भी ऑफर कर सकते हैं।
नियमित आय चाहने वालों के लिए बेहतर विकल्प
SCSS में ब्याज हर तिमाही निवेशक के खाते में जमा होता है। यही वजह है कि यह योजना रिटायर्ड लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है। जिन लोगों को पेंशन के अलावा नियमित आय की जरूरत होती है, उनके लिए SCSS एक अच्छा विकल्प माना जाता है। हालांकि FD में भी मासिक या तिमाही ब्याज भुगतान का विकल्प मिलता है, लेकिन ब्याज दरें बैंक के अनुसार बदलती रहती हैं।
टैक्स के मामले में क्या है स्थिति?
SCSS में निवेश करने पर कुछ टैक्स लाभ मिलते हैं, हालांकि इसके साथ कुछ कर संबंधी नियम भी लागू होते हैं। इस योजना में किया गया निवेश आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत कर कटौती के लिए पात्र होता है, जिसके तहत एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट का लाभ लिया जा सकता है। इसी तरह, एफडी पर मिलने वाले ब्याज पर भी बैंक एक लिमिट के बाद टीडीएस काटता है। सीनियर सिटिजन ग्राहकों के लिए यह लिमिट एक वित्त वर्ष में 1 लाख रुपये तय की गई है।
कौन-सा विकल्प चुनें?
अगर आपका लक्ष्य अधिक ब्याज, सरकारी सुरक्षा और नियमित आय प्राप्त करना है तो SCSS बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। वहीं, अगर आपको निवेश अवधि में फ्लेक्सिबिलिटी चाहिए और जरूरत पड़ने पर पैसा निकालने की सुविधा चाहिए तो FD आपके लिए एक अच्छा ऑप्शन है। कई वित्तीय विशेषज्ञ वरिष्ठ नागरिकों को सलाह देते हैं कि वे अपने निवेश को केवल एक विकल्प में न रखें। SCSS और FD दोनों का संतुलित मिश्रण बनाकर सुरक्षा, नियमित आय और लिक्विडिटी का बेहतर लाभ लिया जा सकता है।
