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अब नहीं होगी गैस की किल्लत, कोयले से तैयार होगी गैस, Coal India लगाने जा रही नई यूनिट्स

सिनगैस मुख्यतः कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन का मिश्रण होता है। इसे कोयला, प्राकृतिक गैस या बायोमास से बनाया जाता है और इसका उपयोग बिजली, उर्वरक व ईंधन बनाने में होता है।

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गैस की किल्लत होगी दूर, कोयले से तैयार होगी गैस, Coal India लगाने जा रही नई यूनिट्स

सार्वजनिक क्षेत्र की कोयला कंपनी कोल इंडिया लि. (सीआईएल) पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण गैस आपूर्ति में आ रही बाधाओं के बीच कोयले से सिनगैस उत्पादन इकाइयां स्थापित करने की तैयारी कर रही है, हालांकि यह गैस घरेलू इस्तेमाल के लिए नहीं, बल्कि इंडस्ट्रीज के लिए होगी।

सिनगैस मुख्यतः कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन का मिश्रण होता है। इसे कोयला, प्राकृतिक गैस या बायोमास से बनाया जाता है और इसका उपयोग बिजली, उर्वरक व ईंधन बनाने में होता है।

सूत्रों के अनुसार, कंपनी इन संयंत्रों को या तो कोयला खदानों के पास (पिटहेड) लगाएगी या फिर उर्वरक संयंत्रों, गैस आधारित बिजलीघरों तथा डायरेक्ट-रिड्यूस्ड आयरन (डीआरआई) इकाइयों जैसे औद्योगिक उपभोक्ताओं के आसपास स्थापित करेगी।

कोयला उत्पादन में 80 प्रतिशत की हिस्सेदारी

पीटीआई भाषा के मुताबिक देश के कुल घरेलू कोयला उत्पादन में 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी रखने वाली कोल इंडिया ने इस दिशा में शुरुआती कदम भी उठा दिए हैं। यह पहल राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन और रसायन तथा कच्चे माल की सुरक्षा को मजबूत करने की सरकारी रणनीति के अनुरूप मानी जा रही है।

Syngas Production

Syngas Production

सूत्रों के मुताबिक, कंपनी सिनगैस संयंत्रों को बनाओ-स्वामित्व रखो-चलाओ (बीओओ) अथवा बनाओ-चलाओ-देखरेख करो (बीओएम) मॉडल पर विकसित करने की योजना बना रही है। इन परियोजनाओं में डेवलपर या गठजोड़ कोयले से सिनगैस का उत्पादन करेंगे। सिनगैस का उपयोग स्वच्छ ईंधन, उर्वरक, रसायन और बिजली उत्पादन जैसे क्षेत्रों में किया जाता है।

दो मॉडल प्रस्तावित

कोल इंडिया ने संभावित बोलीदाताओं की पहचान के लिए रुचि पत्र (ईओआई) भी जारी किए हैं। इसके तहत कंपनी ने दो मॉडल प्रस्तावित किए हैं। पहले मॉडल के अंतर्गत कोल इंडिया की खदानों के क्षेत्रों में सिनगैस उत्पादन इकाइयां स्थापित की जाएंगी, जहां से आसपास के औद्योगिक संकुलों को पाइपलाइन नेटवर्क के जरिये गैस की आपूर्ति होगी। इसका उद्देश्य कोयले के परिवहन पर आने वाली लागत को कम करना और उद्योगों को सस्ती दर पर सिनगैस उपलब्ध कराना है।

दूसरे मॉडल में सिनगैस उत्पादन इकाइयों को किसी गैस आधारित बिजलीघर, डीआरआई संयंत्र, उर्वरक इकाई या बड़े औद्योगिक उपभोक्ता के ठीक पास स्थापित किया जाएगा। इससे संचालन दक्षता और आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिलेगी। कंपनी का मानना है कि इस व्यवस्था से अंतिम उपभोक्ता को निर्बाध सिनगैस आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।

कोल इंडिया संभावित औद्योगिक ग्राहकों की भी तलाश कर रही है, जो दीर्घकालिक समझौतों के तहत सिनगैस को ईंधन या कच्चे माल के रूप में उपयोग कर सकें। इसके लिए कंपनी ने बाजार की रुचि, आपूर्ति मॉडल और व्यावसायिक अपेक्षाओं का आकलन करने को अलग से ईओआई जारी किया है।

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेयauthor

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिया को समझने और उसे आम पाठकों तक सरल व उपयोगी रूप में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। प्रदीप अब तक 11,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। वह गैजेट रिव्यू, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक टिप्स और नवीनतम टेक इनोवेशन पर लगातार काम करते हैं। एआई टूल्स पर एक्सपेरिमेंट करना, नए ऐप्स टेस्ट करना और टेक से जुड़े प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस खोजने में उनकी खास रुचि है।

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