बिजनेस

दुनिया देखती रह गई और भारत ने बदल दिया तेल का खेल, ईरान संकट के बीच ऐसे भरा अपना भंडार

ईरान संकट से कच्चे तेल की सप्लाई में आई गिरावट ने वैश्विक बाजार में हलचल मचा दी। ऐसे माहौल में जहां कई देश ऊर्जा संकट से जूझ रहे हैं, वहीं भारत ने हालात को अपने पक्ष में मोड़ लिया है।

Image

तेल की कीमतों में उछाल

Photo : iStock

India oil imports: ईरान संकट और मिडिल ईस्ट (Middle East) में बढ़ते तनाव के चलते दुनियाभर में कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसके चलते क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर के पार पहुंच गई है। होर्मुज रूट बंद होने से भारत में भी गैस और तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। हालांकि, भारत ने इस संकट के समय में अपनी सूझ-बूझ से रास्ता निकाल लिया है। भारत ने खाड़ी देशों से इतर रूस अफ्रीका, ईरान और वेनेजुएला जैसे देशों से कच्चे तेल का आयात कर अपना भंडार भर लिया है। आइए समझते हैं कि भारत कैसे अपनी जरूरत का तेल बिना किसी पेरशानी के ला रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से बढ़ी थी परेशानी

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% तेल आयात करता है। इसमें से आधा तेल 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) के रास्ते आता है। 28 फरवरी को जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया, तब से इस समुद्री रास्ते पर जहाजों की आवाजाही बहुत कम हो गई है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी कि तेल के रिजर्व कम होने के कारण भारत को सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है, लेकिन भारत ने अपनी चतुराई से इस संकट को टाल दिया।

रूस बना सबसे बड़ा सहारा

ईरान संकट के बीच रूस सबसे बड़ा मददगार साबित हुआ है। पिछले साल अमेरिकी पाबंदियों के कारण भारत रूसी तेल से थोड़ा दूर रहा था, लेकिन मार्च में भारत ने रूस से रिकॉर्ड 1.98 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) तेल मंगाया। ट्रेड इंटेलिजेंस फर्म केप्लर के अनुसार, 1.98 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) इंपोर्ट किया। भारतीय रिफाइनर ने मार्च में रूस से औसतन लगभग यह जनवरी और फरवरी की तुलना में लगभग दोगुना है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका द्वारा दी गई अस्थायी छूट का भारत ने भरपूर फायदा उठाया। माना जा रहा है कि भारत ने 60 मिलियन बैरल अतिरिक्त तेल और खरीदा है, जो अप्रैल तक भारत पहुंच जाएगा।

अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका देशों से भी आयात

भारत ने अपनी निर्भरता केवल एक देश पर नहीं रखी है। आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में अंगोला से होने वाला आयात फरवरी के मुकाबले तीन गुना बढ़ गया। वहीं, नाइजीरिया से भी तेल की खरीदारी तेज की गई है। सरकारी रिफाइनरी के अधिकारियों का कहना है कि भारत पहले से ही रूस के अलावा अन्य विकल्पों की तलाश कर रहा था, जो अब काम आ रहे हैं। इतना ही नहीं, भारत ने ईरान और वेनेजुएला से भी तेल लेना शुरू कर दिया है। अप्रैल के मध्य तक ईरान से 276,000 bpd और वेनेजुएला से 137,000 bpd तेल भारत पहुंचा है।

क्या आगे मुश्किलें बढ़ेंगी?

हालांकि भारत ने आपूर्ति सुरक्षित कर ली है, लेकिन चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। अफ्रीका से आने वाला तेल मध्य पूर्व के तेल से अलग किस्म का तेल होता है, जिसे रिफाइन करने में भारतीय कंपनियों को थोड़ी समस्या हो सकती है। साथ ही, अब 'सस्ते तेल' का दौर भी खत्म होता दिख रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ गई हैं।

आम जनता पर क्या असर होगा?

बढ़ती कीमतों के बावजूद भारत सरकार ने अभी तक पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए हैं। सरकार ने एक्साइज ड्यूटी कम करके जनता को राहत दी है। हालांकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि राज्यों में चुनाव खत्म होने के बाद तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। लेकिन तेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत ने पिछले चार सालों में कीमतें स्थिर रखी हैं और वे नागरिकों को वैश्विक महंगाई से बचाने के लिए हर संभव कदम उठा रहे हैं। भारत अकेला ऐसा देश है जहां पिछले चार सालों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ी हैं।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

और पढ़ें
End of Article