अगर आप नया घर बनाने की योजना बना रहे हैं या पुराने घर में AC, बाथरूम फिटिंग या किचन का सामान बदलने का सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए अहम है। आने वाले समय में इन सभी जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसकी वजह घरेलू नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में धातुओं की कीमतों में आई तेज उछाल है। कॉपर, एल्युमिनियम और निकेल जैसी धातुएं, जो इन प्रोडक्ट्स के निर्माण में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होती हैं, अब रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुकी हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में एल्युमिनियम की कीमत 3,000 डॉलर प्रति टन से ऊपर चली गई है, जो पिछले तीन वर्षों का उच्चतम स्तर है। वहीं कॉपर का दाम 12,000 डॉलर प्रति टन के पार पहुंच चुका है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। इन धातुओं की कीमतों में आई इस तेजी का सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ रहा है, जो AC, किचन अप्लायंसेज, बाथ फिटिंग और कुकवेयर जैसे उत्पाद बनाती हैं।
क्यों महंगी होंगी ये चीजें
कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, खासतौर पर कॉपर की कीमतों में उम्मीद से ज्यादा बढ़ोतरी के कारण मैन्युफैक्चरर्स की इनपुट कॉस्ट तेजी से बढ़ गई है। कंपनियां पहले ही बढ़ती लागत का बोझ झेल रही थीं, लेकिन अब उनके लिए इसे और सहन करना मुश्किल हो गया है। ऐसे में वे मजबूरी में अपने प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं, ताकि मार्जिन को बचाया जा सके।
क्या है कॉपर का हाल?
भारत के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी कॉपर की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। हाल ही में कॉपर का भाव 1,300 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया। उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, कई मैन्युफैक्चरर्स आने वाले महीनों में 5 से 8 प्रतिशत तक कीमतें बढ़ा सकते हैं। इसका असर सीधे आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।
बाथवेयर सेक्टर पर भी दबाव बढ़ रहा है। बाथ फिटिंग्स में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाली धातु पीतल (ब्रास), जो कॉपर पर आधारित होती है, उसकी कीमतों में वित्त वर्ष की शुरुआत से दोहरे अंकों में बढ़ोतरी हो चुकी है। इसका मतलब साफ है कि नल, शॉवर, मिक्सर और अन्य बाथरूम फिटिंग्स भी जल्द महंगी हो सकती हैं।
एल्युमिनियम क्यों हो रहा है महंगा?
एल्युमिनियम की कीमतों में तेजी के पीछे भी कई वैश्विक वजहें हैं। चीन में स्मेल्टिंग क्षमता पर लगी रोक और यूरोप में बढ़ती बिजली लागत के कारण उत्पादन में कमी आई है। वहीं दूसरी ओर, कंस्ट्रक्शन, रिन्यूएबल एनर्जी और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से एल्युमिनियम की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। सीमित सप्लाई और बढ़ती मांग ने कीमतों को और ऊपर धकेल दिया है।
कॉपर की कीमतों में आई भारी तेजी का एक बड़ा कारण बार-बार सप्लाई में आने वाली रुकावटें भी हैं। इंडोनेशिया, चिली और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो जैसे देशों में माइनिंग दुर्घटनाएं हुई हैं। इसके अलावा चिली की एक बड़ी खदान में मजदूरों की हड़ताल के कारण भी उत्पादन प्रभावित हुआ है। ट्रेड से जुड़ी अनिश्चितताओं के चलते अमेरिका को कॉपर शिपमेंट में तेजी आई, जिससे बाकी बाजारों में सप्लाई और तंग हो गई।
इसी तरह निकेल की कीमतों में भी उछाल देखा गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दुनिया के बड़े उत्पादक इंडोनेशिया द्वारा प्रोडक्शन में कटौती के संकेत और पीटी वेल इंडोनेशिया की एक खदान में अस्थायी रोक के कारण सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। इसका असर कीमतों पर साफ नजर आ रहा है।
धातुओं की तेजी सिर्फ इंडस्ट्रियल मेटल्स तक सीमित नहीं है। सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। साल 2025 में सोने ने करीब 65 प्रतिशत और चांदी ने लगभग 145 प्रतिशत तक का रिटर्न दिया है।
