Iran Crisis: ईरान संकट के कारण पिछले हफ्ते शेयर बाजार में बड़ी गिरावट रही। इससे निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये डूब गए। ऐसे में इस सप्ताह शेयर बाजारों की दिशा मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से जुड़े घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर इसके प्रभाव से तय होगी। विश्लेषकों ने कहा कि इसके अलावा, वैश्विक बाजार के रुझान और विदेशी निवेशकों के रुख से भी निवेशकों की धारणा प्रभावित होगी। ऑनलाइन कारोबार और संपत्ति फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि आने वाला सप्ताह अस्थिर रहने की संभावना है, क्योंकि बाजार की धारणा काफी हद तक पश्चिम एशिया में लगातार जारी भू-राजनीतिक तनाव से प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि निवेशक वैश्विक घटनाक्रमों, विशेष रूप से कच्चे तेल की कीमतों पर नजर रखेंगे क्योंकि ऊर्जा बाजार जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कच्चे तेल की कीमतों का बाजार पर होगा
रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के शोध उपाध्यक्ष अजीत मिश्रा ने कहा कि इस सप्ताह वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण बाहरी कारक बने रहेंगे। इसके साथ ही, कुछ प्रमुख व्यापक आर्थिक आंकड़े भी जारी होंगे, जो निकट भविष्य की धारणा को आकार दे सकते हैं। घरेलू मोर्चे पर निवेशक 12 मार्च को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर बारीकी से नजर रखेंगे। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 8.52 प्रतिशत उछलकर 92.69 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है।
पिछले सप्ताह सेंसेक्स 2,368 अंक टूटा था
पिछले सप्ताह बीएसई सेंसेक्स 2,368.29 अंक या 2.91 प्रतिशत टूट गया, जबकि निफ्टी में 728.2 अंक या 2.89 प्रतिशत की गिरावट आई। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर अनिश्चितता, बाजार में लगातार गिरावट, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के प्रति भारतीय अर्थव्यवस्था की संवेदनशीलता और रुपये की तेज गिरावट ने एफआईआई की बिकवाली को बढ़ाया। विजयकुमार ने कहा कि जब तक संघर्ष के परिणाम पर कुछ स्पष्टता नहीं आती और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट नहीं होती, तब तक एफपीआई के खरीदार के रूप में बाजार में लौटने की संभावना कम है। उन्होंने कहा कि ब्रेंट क्रूड का 90 डॉलर से ऊपर होना भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजारों के लिए बुरी खबर है।
शीर्ष 10 में आठ कंपनियों का बाजार पूंजीकरण घटा
पिछले सप्ताह शेयर बाजार में गिरावट के रुख के चलते देश की शीर्ष 10 मूल्यवान कंपनियों में आठ के संयुक्त बाजार मूल्यांकन में 2,81,581.53 करोड़ रुपये की कमी आई है। इसमें भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ा। पिछले सप्ताह बीएसई सेंसेक्स 2,368.29 अंक यानी 2.91 प्रतिशत टूट गया। शीर्ष 10 की सूची में रिलायंस इंडस्ट्रीज और इंफोसिस ही ऐसी कंपनियां रहीं, जिनके मूल्यांकन में बढ़ोतरी दर्ज की गई। आंकड़ों के अनुसार भारतीय स्टेट बैंक का बाजार मूल्यांकन 53,952.96 करोड़ रुपये घटकर 10,55,567.27 करोड़ रुपये रह गया। आईसीआईसीआई बैंक के मूल्यांकन में 46,936.82 करोड़ रुपये की गिरावट आई और यह 9,40,049.82 करोड़ रुपये पर आ गया। एचडीएफसी बैंक का मूल्यांकन 46,552.3 करोड़ रुपये घटकर 13,19,107.08 करोड़ रुपये रह गया।
लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) के बाजार पूंजीकरण में 45,629.03 करोड़ रुपये की कमी आई और यह 5,43,208.36 करोड़ रुपये रहा। बजाज फाइनेंस का मूल्यांकन 28,934.56 करोड़ रुपये घटकर 5,91,136.03 करोड़ रुपये पर आ गया। इसके विपरीत, रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार मूल्यांकन 14,750.39 करोड़ रुपये बढ़कर 19,01,583.05 करोड़ रुपये हो गया। इंफोसिस का मूल्यांकन भी 3,459.99 करोड़ रुपये चढ़कर 5,30,546.54 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
बाजार पूंजीकरण के मामले में रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी हुई है।
