देशभर के निवेशकों का भरोसा सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) पर बढ़ा है। इसकी वजह सिप करने में आसानी और मिलने वाला अच्छा रिटर्न है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि केवल एसआईपी ही एक आरामदायक भविष्य सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता है, खासकर जब महंगाई लगातार पैसे के मूल्य को कम कर रही हो। वित्तीय सलाहकार लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन के लिए "स्टेप-अप एसआईपी" करने की सलाह देते हैं। आइए जानते हैं कि सिप से कैसे अलग है Step Up SIP? अगर आप सिर्फ सिप कर रहे हैं तो अब रणनीति बदलने की क्यों जरूरत है?
स्टेप-अप-सिप क्या है?
एसआईपी में साल दर साल मंथली निवेश की राशि नहीं बदलती है। वहीं, स्टेप-अप सिप, निवेशकों को हर साल, आमतौर पर वेतन वृद्धि के अनुरूप, अपना योगदान बढ़ाने की अनुमति देता है। इस तरह धीरे-धीरे निवेश बढ़ाकर, निवेशक किसी भी समय वित्तीय बोझ महसूस किए बिना, काफी अधिक धन संचय कर लेता है।
उदाहरण से इसे समझते हैं—
मान लीजिए कि राम की उम्र 30 साल है। उसकी मंथली इनकम 40,000 रुपये है। अगर वह अपने वेतन का 30%, यानी 12,000 रुपये प्रति माह, 10 साल तक निवेश करता है तो उसे 40 की उम्र् में करीब 26,88,431 रुपये मिलेंगे। शेयर बाजाार में तेजी या मंदी के कारण इस रकम में वृद्धि या कमी भी हो सकती है।
अब मान लीजिए कि राम ने स्टेप-अप SIP का विकल्प चुना और हर साल अपना योगदान 10% बढ़ाता है। उस स्थिति में, उसे 10 साल बाद करीब 39,22,678 रुपये मिलेंगे। यानी 13 लाख रुपये अधिक मिलेंगे। अगर वह निवेश की अवधि को और बढ़ाता है तो उसे और बड़ा रिटर्न मिलेगा।
सिप के मुकाबले क्यों फायदेमंद?
स्टेप-अप SIP की सफलता इसकी आय वृद्धि के साथ तालमेल बिठाने की क्षमता में निहित है। जैसे-जैसे वर्षों में वेतन बढ़ता है, निवेशक दैनिक खर्चों को प्रभावित किए बिना धन सृजन के लिए एक बड़ा हिस्सा अलग रख पाते हैं। इसके अलावा, यह दृष्टिकोण मुद्रास्फीति को मात देने में मदद करता है, जो दीर्घकालिक योजना बनाने में एक महत्वपूर्ण कारक है। वित्तीय योजनाकार चेतावनी देते हैं कि यह तरीका प्रभावी होने के साथ-साथ सही निवेश माध्यम चुनना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इक्विटी म्यूचुअल फंड, विशेष रूप से लार्ज-कैप फंड, दीर्घकालिक धन सृजन के लिए विश्वसनीय विकल्प माने जाते हैं।
