भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का दिन बेहद निराशाजनक और उथल-पुथल से भरा रहा। सप्ताह के दौरान बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा था, लेकिन आज बिकवाली का ऐसा दौर आया जिसने पूरे मार्केट को लाल निशान में धकेल दिया। प्रमुख इंडेक्स बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स आज करीब 1092 अंकों की भारी गिरावट के साथ क्रैश हो गया और 74,775.74 पर बंद हुआ। वहीं दूसरी ओर, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी अपनी मजबूती नहीं बचा सका और 50 अंकों से अधिक की कमजोरी दर्ज करते हुए 23,600 के नीचे फिसल गया। बाजार में आई इस अचानक गिरावट की वजह से दलाल स्ट्रीट पर हड़कंप मच गया और महज कुछ ही घंटों के भीतर निवेशकों के लाखों-करोड़ों रुपये डूब गए।
बैंकिंग, आईटी, ऑटो और रियल्टी जैसे लगभग सभी प्रमुख सेक्टर्स के शेयरों में आज भारी बिकवाली देखी गई, जिसने बाजार के सेंटिमेंट को पूरी तरह से बिगाड़ दिया। एक आम निवेशक के मन में अब यही सवाल उठ रहा है कि आखिर अचानक बाजार में ऐसा क्या हुआ कि देखते ही देखते पूरा मार्केट ताश के पत्तों की तरह ढह गया।
क्यों गिरा बाजार?
बाजार के विशेषज्ञों और एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आज की इस बड़ी गिरावट के पीछे कोई एक वजह नहीं है, बल्कि कई घरेलू और वैश्विक (Global) कारणों ने मिलकर बाजार पर दबाव बनाया है। इस गिरावट का सबसे पहला और मुख्य कारण है विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा की जा रही लगातार बिकवाली। पिछले काफी समय से विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से अपना पैसा लगातार बाहर निकाल रहे हैं। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लेकर अपनाए जा रहे कड़े रुख और वहां बॉन्ड यील्ड (Bond Yield) में हो रही बढ़ोतरी की वजह से विदेशी निवेशकों को अब भारतीय बाजार के मुकाबले अमेरिकी बाजार ज्यादा सुरक्षित और आकर्षक लग रहा है। इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) यानी दुनिया के कुछ हिस्सों में चल रहे युद्ध और संघर्ष की स्थिति ने भी निवेशकों को डरा दिया है, जिससे वे जोखिम वाले एसेट्स (जैसे शेयर) से पैसा निकालकर सोने और सरकारी बॉन्ड में निवेश कर रहे हैं।
तिमाही नतीजे हैं बाजार गिरने की वजह
दूसरा बड़ा कारण भारतीय कंपनियों के तिमाही नतीजे (Quarterly Results) उम्मीद के मुताबिक न होना है। हाल ही में जारी हुए कई बड़ी और दिग्गज कंपनियों के वित्तीय नतीजे बताते हैं कि कंपनियों की कमाई की रफ्तार (Earnings Growth) धीमी हुई है। इसके साथ ही देश में महंगाई (Inflation) के बढ़ते आंकड़ों ने भी चिंता बढ़ा दी है। जब महंगाई बढ़ती है, तो लोगों की खर्च करने की क्षमता कम होती है, जिससे कंपनियों की बिक्री और मुनाफे पर सीधा असर पड़ता है। महंगाई को काबू में रखने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी ब्याज दरों में कटौती करने से बच रहा है, जिससे लोन महंगे बने हुए हैं और कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए बिजनेस बढ़ाना महंगा साबित हो रहा है। इसके अलावा, आज बैंकिंग और हैवीवेट शेयरों (जैसे रिलायंस और एचडीएफसी) में आई भारी गिरावट ने इंडेक्स को नीचे खींचने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई। जब बाजार के इन बड़े दिग्गजों में बिकवाली आती है, तो पूरे मार्केट का मूड खराब हो जाता है।
क्या करें निवेशक?
इस भारी गिरावट के बीच अब छोटे और रिटेल (आम) निवेशकों के मन में यह चिंता है कि उन्हें इस स्थिति में क्या करना चाहिए। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि बाजार में ऐसी गिरावटें अल्पावधि (Short-term) के लिए होती हैं और पैनिक (डर) में आकर अपने शेयर घाटे में बेचना समझदारी नहीं है। अगर आपने अच्छी और मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों के शेयरों में निवेश किया है, तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है। बल्कि, लंबे समय के नजरिए से देखें तो ऐसी गिरावटें अच्छे शेयरों को निचले स्तरों पर यानी कम कीमत में खरीदने का एक बेहतरीन मौका (Buying Opportunity) देती हैं।
इसके अलावा, जो लोग म्यूचुअल फंड के जरिए एसआईपी (SIP) कर रहे हैं, उन्हें अपनी एसआईपी बिल्कुल भी बंद नहीं करनी चाहिए, क्योंकि गिरते बाजार में आपको समान पैसों में ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं, जो आगे चलकर बड़ा मुनाफा देती हैं।
