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Senior Citizen Savings Scheme: मैच्योरिटी के बाद भी होती रहेगी कमाई, जानिए अकाउंट एक्सटेंशन का नियम

सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम में सुरक्षित निवेश के साथ नियमित ब्याज का फायदा मिलता है। SCSS की शुरुआती अवधि 5 साल होती है लेकिन इस स्कीम में निवेश को आगे भी जारी रखा जा सकता है।

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मैच्योरिटी के बाद भी होती रहेगी कमाई, जानिए कैसे (Photo: iStock)

रिटायरमेंट (Retirement) के बाद नियमित आय के लिए सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम (Senior Citizen Savings Scheme) देश के वरिष्ठ नागरिकों के बीच काफी लोकप्रिय निवेश विकल्प है। सरकार की इस स्कीम में सुरक्षित निवेश के साथ नियमित ब्याज का फायदा मिलता है। इस स्कीम में वर्तमान ब्याज दर 8.2% प्रति वर्ष है।SCSS की शुरुआती अवधि 5 साल होती है, लेकिन मैच्योरिटी पूरी होने के बाद भी निवेशक इसे आगे बढ़ा सकते हैं।

कई वरिष्ठ नागरिकों के मन में यह सवाल रहता है कि 5 साल पूरे होने के बाद SCSS अकाउंट का क्या होगा? क्या पैसा निकालना जरूरी है या इसे आगे भी जारी रखा जा सकता है? इस आर्टिकल में SCSS एक्सटेंशन के नियम (SCSS Extension Rules) को लेकर ही जानकारी दे रहे हैं-

5 साल बाद बढ़ा सकते हैं SCSS की अवधि

SCSS अकाउंट की शुरुआती मैच्योरिटी अवधि 5 साल होती है। अगर निवेशक इस अवधि के बाद भी स्कीम में पैसा बनाए रखना चाहते हैं, तो वह इसे आगे 3 साल के लिए बढ़ा सकते हैं। इसके लिए मैच्योरिटी की तारीख से एक साल के अंदर एक्सटेंशन के लिए आवेदन करना होता है। यानी अगर किसी व्यक्ति का SCSS अकाउंट 5 साल बाद मैच्योर हो जाता है तो वह तुरंत पैसा निकालने के बजाय इसे अगले तीन साल तक जारी रख सकता है और योजना के तहत ब्याज प्राप्त कर सकता है।

एक्सटेंशन के बाद कितना मिलेगा ब्याज?

SCSS को आगे बढ़ाने पर निवेशक को वही ब्याज दर नहीं मिलती जो अकाउंट खोलते समय लागू थी। एक्सटेंड किए गए अकाउंट पर मैच्योरिटी की तारीख पर लागू SCSS ब्याज दर के अनुसार ब्याज मिलता है।

इसलिए अगर किसी निवेशक ने कुछ साल पहले ज्यादा ब्याज दर पर SCSS शुरू किया था, तो एक्सटेंशन के समय ब्याज दर बदल सकती है।

एक्सटेंशन के लिए क्या करना होगा?

SCSS अकाउंट को बढ़ाने के लिए निवेशक को संबंधित बैंक या पोस्ट ऑफिस में जाकर निर्धारित फॉर्म (Form-4) जमा करना होता है। इसके साथ जरूरी दस्तावेज और पासबुक की जरूरत पड़ सकती है। अगर निवेशक तय समय में एक्सटेंशन के लिए आवेदन नहीं करता है, तो उसे मैच्योरिटी राशि निकालने का विकल्प चुनना पड़ सकता है।

SCSS में मिलता है नियमित ब्याज

SCSS की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें ब्याज का भुगतान तिमाही आधार पर किया जाता है। इससे रिटायरमेंट के बाद नियमित आय की जरूरत पूरी करने में मदद मिलती है। इसके अलावा यह सरकार समर्थित योजना है, इसलिए कई वरिष्ठ नागरिक इसे सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में पसंद करते हैं।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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