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IPO लाने वाली कंपनियों को SEBI ने दी राहत, लिस्टिंग के लिए मिलेगा अतिरिक्त समय

भारतीय बाजार के नियामक सेबी ने ईरान युद्ध के चलते बाजार में आई वोलैटिलिटी को ध्यान में रखकर आईपीओ लाने वाली कंपनियों को राहत दी है। IPO की मंजूरी ले चुकी कंपनियों को अब लिस्टिंग के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।

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आईपीओ की लिस्टिंग के लिए मिलेगा अतिरिक्त समय

SEBI IPO Extension: भारतीय शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच IPO मार्केट को बड़ी राहत मिली है। निवेशकों की कमजोर भागीदारी और वैश्विक तनाव के चलते लिस्टिंग योजनाएं प्रभावित हो रही थीं। ऐसे में SEBI ने IPO मंजूरी की वैधता बढ़ाकर कंपनियों को रणनीति तय करने के लिए अतिरिक्त समय दिया है।

क्यों लिया यह फैसला?

भारत के बाजार नियामक Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने मौजूदा अस्थिर माहौल को देखते हुए IPO approvals की वैधता बढ़ाने का फैसला लिया है। जिन कंपनियों को ऑब्जर्वेशन लेटर मिल चुका है और जिनकी समयसीमा अगले छह महीनों में समाप्त होने वाली थी, उन्हें अब 30 सितंबर तक का अतिरिक्त समय दिया गया है। यह कदम सीधे तौर पर बाजार में गिरते भरोसे को स्थिर करने की कोशिश है।

मांग में कमजोरी से प्रभावित IPO बाजार

हाल के महीनों में IPO Market में गिरावट देखने को मिली है। कंपनियां Share Market की वोलैटिलिटी को देखते हुए लिस्टिंग से कतरा रही हैं। इसके अलावा वैश्विक जियोपॉलिटिकल तनाव ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को कम किया है। इसका असर IPO बाजार पर साफ दिख रहा है, जहां कंपनियां या तो अपने इश्यू टाल रही हैं या फिर वैल्यूएशन और साइज में बदलाव कर रही हैं। SEBI ने भी माना कि कई कंपनियां अपने इश्यू को डिफर, रीकैलिब्रेट या वापस लेने को मजबूर हुई हैं।

रिकॉर्ड फंडरेजिंग के बाद धीमी पड़ी रफ्तार

भारत का IPO बाजार पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है और 2025 में करीब 23 अरब डॉलर की फंडरेजिंग दर्ज की गई। हालांकि, मौजूदा अस्थिरता ने इस रफ्तार को धीमा कर दिया है। अब बाजार की नजर बड़े इश्यू पर टिकी है, खासकर रिलायंस इंडस्ट्रीज की टेलीकॉम यूनिट Jio Platforms के संभावित JIO IPO पर, जो बाजार के लिए एक बड़ा ट्रिगर बन सकता है।

कंपनियों को रणनीतिक लचीलापन मिला

इस फैसले से उन कंपनियों को राहत मिली है जिनकी IPO मंजूरी एक्सपायर होने के करीब थी। जैसे क्रेडिला फाइनेंशियल सर्विसेज और डॉर्फ केटल केमिकल्स अब बेहतर बाजार स्थितियों का इंतजार कर सकेंगी। इससे कंपनियों को अपने इश्यू की टाइमिंग और प्राइसिंग को लेकर ज्यादा लचीलापन मिलेगा।

नियमों में ढील से अनुपालन दबाव कम

SEBI ने इसके साथ ही मिनिमम पब्लिक शेयर होल्डिंग (MPS) नियमों के उल्लंघन पर पेनल्टी में भी कुछ राहत दी है। यह कदम लिस्टेड कंपनियों के लिए अनुपालन बोझ को कम करेगा और उन्हें बाजार की मौजूदा स्थिति के अनुसार अपने स्ट्रक्चर को एडजस्ट करने का अवसर देगा।

आगे क्या संकेत मिलते हैं

यह फैसला संकेत देता है कि रेगुलेटर बाजार को स्थिर बनाए रखने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहा है। अगर आने वाले महीनों में बाजार में स्थिरता लौटती है, तो साल के दूसरे हिस्से में IPO गतिविधियों में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है, जिससे निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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