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SMS से शेयर खरीदने का झांसा देकर लूटे ₹144 करोड़! SEBI का बड़ा एक्शन, 221 संस्थाएं बैन

शेयर बाजार में पंप एंड डंप का खेल पुराना है। SEBI लगातार ऐसे घोटालों पर नजर रखता है। अब सेबी ने ₹144 करोड़ का घोटाले उजागर किया है। इसके साथ ही इससे जुड़ी 221 संस्थाओं को बैन कर दिया है।

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सेबी ने की बड़ी कार्रवाई

SEBI Action Against Pump And Dump : क्या आपको भी कभी मोबाइल पर ऐसा कोई आकर्षक SMS आया है जिसमें किसी शेयर को तुरंत खरीदने की सलाह दी गई हो और दावा किया गया हो कि यह रातों-रात मल्टीबैगर बन जाएगा? अगर हां, तो आप देश के सबसे बड़े मोबाइल SMS शेयर घोटाले के निशाने पर थे।

शेयर बाजार नियामक SEBI (Securities and Exchange Board of India) ने मोबाइल SMS के जरिए आम रिटेल निवेशकों को जाल में फंसाने वाले एक 'इंडस्ट्रियल स्केल' (बड़े पैमाने पर) के शेयर हेरफेर सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है।

Fake SMS share tips scam India मामले में सेबी ने ऐतिहासिक कार्रवाई करते हुए 221 संस्थाओं (Entities) को शेयर बाजार से पूरी तरह प्रतिबंधित (Ban) कर दिया है। इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड हनीफ शेख (Hanif Shekh) नाम का एक शातिर निवेशक था, जिस पर सेबी ने ₹10 करोड़ का व्यक्तिगत जुर्माना ठोकते हुए 7 साल का बैन लगाया है। इसके अलावा, जालसाजों को अवैध रूप से कमाए गए ₹143.79 करोड़ को 12% सालाना ब्याज के साथ वापस वसूलने (Disgorge) का आदेश दिया गया है।

कैसे बुना धोखाधड़ी का जाल?

सेबी की तरफ से जारी 394 पन्नों के अंतिम आदेश (Final Order) के मुताबिक, यह पूरा घोटाला साल 2017 से 2020 के बीच बेहद योजनाबद्ध तरीके से चलाया गया था। यह एक क्लासिक 'पंप-एंड-डंप' (Pump-and-Dump) स्कीम थी, जिसे चार बड़े चरणों में अंजाम दिया जाता था।

1. नकली डिमांड बनाना (Circular Trading) : सबसे पहले इस सिंडिकेट से जुड़े ऑपरेटर आपस में ही तय समय पर एक-दूसरे को शेयर बेचकर बाजार में कृत्रिम वॉल्यूम और डिमांड पैदा करते थे। इससे आम निवेशकों को लगता था कि इस शेयर में बहुत हलचल है।

2. भरोसेमंद नामों से फर्जी SMS भेजना : जब शेयर की कीमत कृत्रिम रूप से बढ़ जाती, तो मास्टरमाइंड हनीफ शेख के निर्देश पर लाखों मोबाइल नंबरों पर शेयर टिप्स के SMS भेजे जाते थे। चालाकी यह थी कि इन SMS के सेंडर आईडी (Sender IDs) को देश के जाने-माने, प्रतिष्ठित ब्रोकरेज हाउसों के नाम से मिलता-जुलता बनाया गया था ताकि लोग झांसे में आ जाएं।

3. रिटेल इनवेस्टर्स को 'डंप' करना : जैसे ही फर्जी मैसेजेस पर भरोसा करके हजारों मासूम रिटेल निवेशकों ने उन शेयरों को खरीदना शुरू किया और बाजार में खरीदारी बढ़ी, इस सिंडिकेट ने ऊंचे और आसमान छूते भावों पर अपने सारे शेयर रिटेल इनवेस्टर्स के मत्थे मढ़ (Dump) दिए और खुद बाहर निकल गए। इसके बाद शेयर की कीमतें धड़ाम से गिर गईं।

4. कमाई को ठिकाने लगाना (Money Laundering) : शेयर बेचने से मिले ₹144 करोड़ के भारी-भरकम मुनाफे को शेल (फर्जी) कंपनियों, फाइनेंशियर्स और विदेशी मुद्रा (Forex) फर्मों की कई परतों (Layers) के जरिए घुमाया गया, ताकि असली लाभार्थियों का पता न चल सके। अंत में यह पूरा पैसा कंपनी के प्रमोटर्स और हनीफ शेख के पास पहुंचता था।

इन 5 लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में हुआ था खेल

SEBI की गहन जांच में सामने आया कि इस पूरे सिंडिकेट ने किसी एक कंपनी में नहीं, बल्कि एक ही पैटर्न पर इन 5 लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में भारी हेरफेर की थी।

क्र.सं.प्रभावित कंपनी का नाम (Targeted Stocks)जालसाजों का मुख्य खेल
1Mauria Udyogसर्कुलर ट्रेडिंग के जरिए कृत्रिम वॉल्यूम और डिमांड बढ़ाना।
27NR Retailशेयर की कीमत को जबरन ऊपरी स्तर पर ले जाना।
3Darjeeling Ropeway Companyलिक्विडिटी का झूठा भ्रम पैदा करना।
4GBL Industriesरिटेल इनवेस्टर्स को ऊंचे भाव पर शेयर डंप करना।
5Vishal Fabricsसिंक्रोनाइज्ड ट्रेड्स के जरिए कीमतों में हेरफेर।

सेबी का हंटर: किसे क्या सजा मिली?

इस सुसंगठित सिंडिकेट को नेस्तनाबूद करने के लिए सेबी ने बेहद कड़े दंडात्मक कदम उठाए हैं। मास्टरमाइंड हनीफ शेख (Hanif Shekh) को शेयर बाजार से 7 साल के लिए प्रतिबंधित करते हुए ₹10 करोड़ का भारी जुर्माना किया गया है। इसके साथ ही हनीफ शेख से जुड़ी 5 संस्थाओं पर 6 साल का बैन और प्रत्येक पर ₹2-2 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है। अन्य 215 से ज्यादा पार्टिसिपेंट्स पर उनकी भूमिका के आधार पर 5 साल तक का बैन और ₹5 लाख से लेकर ₹1 करोड़ तक की पेनाल्टी लगाई गई है। इसके साथ ही अवैध रूप से कमाए गए ₹143.79 करोड़ को अक्टूबर 2020 से लेकर भुगतान के दिन तक 12% प्रति वर्ष के कड़े ब्याज के साथ कुर्क (Recover) किया जाएगा।

वॉट्सऐप चैट और फोन डेटा बने गवाह

इस हाई-प्रोफाइल घोटाले को साबित करने के लिए सेबी ने पूरी तरह आधुनिक और डिजिटल फॉरेंसिक जांच का सहारा लिया। आरोपियों को कोर्ट रूम में बचने का कोई मौका न मिले, इसलिए सेबी ने केवल बैंक रिकॉर्ड ही नहीं, बल्कि ट्रेडिंग लॉग्स, आरोपियों के मोबाइल फोन डेटा, डिलीट की गई वॉट्सऐप (WhatsApp) चैट्स, डोमेन और वेबसाइट रजिस्ट्रेशन डिटेल्स, टेलीकॉम ऑपरेटर्स का डेटा और यहाँ तक कि ट्रेवल कंपनियों के हवाई यात्रा इनवॉइस को आपस में लिंक किया। इन डिजिटल सबूतों की कड़ियों ने अकाट्य रूप से साबित कर दिया कि हनीफ शेख ही इस विशालकाय सिंडिकेट का रिंगमास्टर था।

    Yateendra Lawaniya
    यतींद्र लवानियाauthor

    प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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