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रुपया रिकॉर्ड लो पर! 1 डॉलर = करीब ₹90, क्यों टूट रहा है भारतीय रुपया? जानें असली कारण

करेंसी एक्सपर्ट का कहना है कि रुपये में गिरावट की कई वजह है। विदेशी निवेशक, भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकल रहे हैं। इसके अलावा भारत-US ट्रेड डील को लेकर अनिश्चितता है– जिसमें टैरिफ से जुड़े तनाव भी शामिल हैं। इन सभी ने मार्केट सेंटिमेंट पर असर डाला है। इसका असर भारतीय रुपये पर हो रहा है और भारतीय रुपया लगातार टूट रहा है।

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डॉलर Vs रुपया

भारतीर रुपये में गिरावट का सिलसिला थम नहीं रहा है। Q2 में GDP ग्रोथ के शानदार आंकड़ों के बावजूद, 1 दिसंबर को भारतीय रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ गया। US डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 89.76 पर आ गया, जो करीब दो हफ्ते पहले के अपने पिछले सबसे निचले स्तर 89.49 से भी नीचे है। इस तरह 1 डॉलर की कीमत करीब 90 रुपये के आसपास पहुंच गई है। हालांकि, उसके बाद रुपये में सुधाार देखने को मिल रहा है। 2 बजे तक रुपया, डॉलर के मुकाबले 89.68 पर ट्रेड कर रहा है। आखिर क्यों टूट रहा है भारतीय रुपया और कहां तक टूट सकता है? आइए जानते हैं।

क्यों टूट रहा है रुपया?

करेंसी एक्सपर्ट का कहना है कि रुपये में गिरावट की कई वजह है। विदेशी निवेशक, भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकल रहे हैं। इसके अलावा भारत-US ट्रेड डील को लेकर अनिश्चितता है– जिसमें टैरिफ से जुड़े तनाव भी शामिल हैं। इन सभी ने मार्केट सेंटिमेंट पर असर डाला है। इसका असर भारतीय रुपये पर हो रहा है और भारतीय रुपया लगातार टूट रहा है।

3 नवंबर के बाद से बड़ी गिरावट

3 नवंबर से अब तक रुपया US डॉलर के मुकाबले करीब 1 रुपया टूटा है। 2025 में रुपया डॉलर के मुकाबले सबसे खराब परफॉर्म करने वाली करेंसी में से एक रहा है। 2025 में रुपये ने सिर्फ टर्किश लीरा और अर्जेंटीना पेसो से बेहतर परफॉर्म किया। जुलाई-सितंबर के लिए भारत की 8.2% साल-दर-साल GDP रीडिंग ने इक्विटी को रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा दिया और सोमवार को बॉन्ड यील्ड को भी बढ़ाया, लेकिन करेंसी पर कोई खास असर नहीं पड़ा। विदेशी इन्वेस्टर्स ने शुक्रवार को लगभग $400 मिलियन की भारतीय इक्विटी बेची, जिससे इस साल अब तक का आउटफ्लो $16 बिलियन से ज़्यादा हो गया, जबकि 10-साल के सरकारी बॉन्ड यील्ड में मामूली बढ़ोतरी हुई।

क्या रुपया 90/डॉलर से नीचे जा सकता है?

इस साल रुपये में आई कमजोरी ने इसे न सिर्फ एशिया के सबसे कमजोर परफॉर्मर्स में से एक बना दिया है, बल्कि इसे साइकोलॉजिकली जरूरी 90 प्रति डॉलर के निशान के बहुत करीब ला दिया है। एनालिस्ट्स का मानना है कि मौजूदा मैक्रो सेट-अप के साथ, इस 90 के लेवल से नीचे गिरना तय है। मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि अगर कैपिटल आउटफ्लो जारी रहता है और ग्लोबल रिस्क सेंटिमेंट कमजोर रहता है, तो रुपया निश्चित रूप से रीटेस्ट कर सकता है और इसे पार भी कर सकता है।

Alok Kumr
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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