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एक दिन में ₹250 का रह गया ₹2500 का स्टॉक, फिर भी शेयरहोल्डर्स को नहीं हुआ नुकसान

शेयर बाजार की उठा-पटक के बीच आज एक शेयर 90% टूट गया। एक ही दिन में 2500 रुपये का यह शेयर 250 रुपये का रह गया है। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि शेयर प्राइस में इतने बड़े क्रैश के बाद भी निवेशकों को खास नुकसान नहीं हुआ है।

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एक ही दिन में 90 फीसदी घट गया दाम

Photo : Times Now Digital

शेयर बाजार की मौजूदा उठापटक के बीच एक शेयर में 90% तक की गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया। करीब 2,500 रुपये पर ट्रेड कर रहा शेयर अचानक 250 रुपये के आसपास दिखने लगा। पहली नजर में यह बड़ा क्रैश लगता है, लेकिन हकीकत में यह तकनीकी एडजस्टमेंट है, न कि वैल्यू का नुकसान।

90% गिरावट क्यों दिखी?

यह गिरावट कंपनी द्वारा लागू किए गए 1:10 स्टॉक स्प्लिट का परिणाम है। स्टॉक स्प्लिट में कंपनी अपने शेयरों की फेस वैल्यू घटाकर शेयरों की संख्या बढ़ा देती है। यहां 10 रुपये फेस वैल्यू वाले एक शेयर को बांटकर 1 रुपये फेस वैल्यू के 10 शेयर कर दिए गए। स्प्लिट के बाद प्रति शेयर कीमत अनुपात के हिसाब से समायोजित हो जाती है। यही वजह है कि करीब 2,500 रुपये का शेयर घटकर लगभग 250 रुपये पर आ गया। लेकिन यह गिरावट सिर्फ गणितीय है, वास्तविक नुकसान नहीं।

निवेशकों की कुल वैल्यू क्यों नहीं बदली?

मान लीजिए किसी निवेशक के पास स्प्लिट से पहले एक शेयर था, जिसकी कीमत 2,500 रुपये थी। स्प्लिट के बाद उसके पास 10 शेयर होंगे और प्रत्येक की कीमत करीब 250 रुपये होगी। कुल निवेश की वैल्यू 2,500 रुपये ही रहेगी। यानी शेयर की संख्या बढ़ी है, कीमत घटाई गई है, लेकिन कुल होल्डिंग का मूल्य समान है। कंपनी की कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन में भी कोई बदलाव नहीं होता, क्योंकि यह केवल शेयर संरचना में बदलाव है।

कंपनियां स्टॉक स्प्लिट क्यों करती हैं?

जब किसी शेयर की कीमत काफी ऊंची हो जाती है, तो रिटेल निवेशकों के लिए उसे खरीदना कठिन हो सकता है। ऐसे में कंपनियां स्टॉक स्प्लिट कर शेयर को अधिक किफायती बनाती हैं। इससे बाजार में लिक्विडिटी बढ़ती है और ट्रेडिंग वॉल्यूम में सुधार होता है। कम कीमत वाला शेयर निवेशकों के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से भी अधिक आकर्षक होता है, हालांकि कंपनी के फंडामेंटल या वास्तविक वैल्यू पर इसका कोई असर नहीं पड़ता।

क्या यह कमजोरी का संकेत है?

90% की गिरावट जैसी दिखने वाली यह चाल वास्तव में कंपनी के प्रदर्शन या वित्तीय स्थिति से जुड़ी नहीं है। यह पूरी तरह कॉरपोरेट एक्शन का परिणाम है। इसलिए ऐसे मामलों में निवेशकों को घबराने के बजाय यह समझना जरूरी है कि कीमत में बदलाव का कारण क्या है। स्टॉक स्प्लिट में शेयर सस्ता दिखता जरूर है, लेकिन निवेश की वास्तविक वैल्यू जस की तस रहती है।

डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या कमोडिटी में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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