दूध को आयुर्वेद में पोषण देने वाला आहार माना गया है। यह शरीर को ताकत देता है और वात-पित्त को शांत करने में मदद कर सकता है। लेकिन हर व्यक्ति को एक ही समय पर दूध पीना लाभ नहीं पहुंचाता। सही समय आपकी उम्र, पाचन शक्ति, दिनचर्या और शरीर की प्रकृति पर निर्भर करता है। इसलिए सुबह या रात में से किसी एक समय को सबके लिए सही मानना ठीक नहीं होगा।
बच्चों, किशोरों और दिनभर शारीरिक मेहनत करने वालों के लिए सुबह दूध पीना फायदेमंद माना जाता है। इससे शरीर को ऊर्जा और पोषण मिल सकता है। हालांकि, कमजोर पाचन वाले लोगों को सुबह खाली पेट दूध पीने से भारीपन, गैस या सुस्ती महसूस हो सकती है। ऐसे लोग नाश्ते से अलग गुनगुना दूध लें। दूध पीने के तुरंत बाद नमकीन या खट्टा भोजन करने से भी बचें।
शाम को दूध पीने की मनाही नहीं है, लेकिन यह समय हर किसी के लिए अनुकूल नहीं होता। आयुर्वेद के अनुसार दूध स्वभाव से भारी होता है। शाम को पाचन धीमा पड़ने लगे तो इससे पेट भरा हुआ लग सकता है। यदि शाम को दूध पीना है तो इसे हल्का गर्म करके और कम मात्रा में लें। दूध के तुरंत बाद भारी रात का खाना खाने से बचना बेहतर होगा।
आयुर्वेदिक मान्यता में रात का समय दूध पीने के लिए अधिक अनुकूल माना जाता है। गुनगुना दूध शरीर को आराम देने और मन को शांत करने वाली दिनचर्या का हिस्सा बन सकता है। इसे रात के भोजन के तुरंत बाद न पिएं। भोजन और दूध के बीच लगभग डेढ़ से दो घंटे का अंतर रखें। सोने से 30 से 60 मिनट पहले थोड़ी मात्रा में दूध लिया जा सकता है।
आयुर्वेद में आमतौर पर उबला हुआ और हल्का गुनगुना दूध पीने की सलाह दी जाती है। फ्रिज से निकला बहुत ठंडा दूध कुछ लोगों के लिए पचाना मुश्किल हो सकता है। इससे पेट फूलना या कफ जैसा महसूस हो सकता है। दूध को उबालकर हल्का ठंडा करें। बार-बार गर्म करने से बचें। स्वाद के लिए थोड़ी इलायची डाल सकते हैं, लेकिन बिना सलाह के रोज कई जड़ी-बूटियां न मिलाएं।
दूध को अपने आप में पूरा आहार माना जाता है। इसलिए इसके साथ बहुत सारी चीजें मिलाने की जरूरत नहीं है। आयुर्वेद दूध के साथ नमक, खट्टी चीजें और खट्टे फलों का सेवन ठीक नहीं मानता। दूध पीते समय अचार, नमकीन, नींबू और खट्टे फल न लें। भोजन के साथ गिलास भरकर दूध पीने के बजाय इसे अलग समय पर लेना पाचन के लिए सहज हो सकता है।
यदि आपका पाचन अच्छा है और दिनभर ऊर्जा चाहिए तो सुबह दूध लिया जा सकता है। शाम को लेने पर भारीपन हो तो समय बदल दें। अच्छी नींद और आराम वाली दिनचर्या के लिए रात में गुनगुना दूध बेहतर विकल्प हो सकता है। शुरुआत आधा कप या अपनी सामान्य सहनशील मात्रा से करें। दूध से गैस, दस्त, पेट दर्द या खुजली हो तो जबरदस्ती न पिएं। लैक्टोज इन्टॉलरेंस, दूध की एलर्जी, किडनी रोग या किसी विशेष बीमारी में डॉक्टर अथवा योग्य आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।