ATM management Charges : देश में लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों और श्रमिकों के वेतन में इजाफे ने नकदी लॉजिस्टिक सेवा कंपनियों ( Currency Cash logistics companies) की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इन कंपनियों की परिचालन लागत में करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो गई है। इसके चलते नकदी लॉजिस्टिक क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों ने बैंकों से एटीएम प्रबंधन शुल्क बढ़ाने की मांग की है। उद्योग से जुड़े संगठनों का कहना है कि मौजूदा खर्च के मुकाबले पुरानी शुल्क व्यवस्था अब टिकाऊ नहीं रह गई है।
भारतीय बैंक संघ को लिखा गया पत्र
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक नकदी लॉजिस्टिक क्षेत्र के उद्योग संगठन ‘करेंसी साइकल एसोसिएशन’ (सीसीए) ने इस मुद्दे को लेकर भारतीय बैंक संघ (आईबीए) को पत्र लिखा है। संगठन ने मांग की है कि एटीएम प्रबंधन और नकदी परिवहन सेवाओं के लिए तय शुल्क का दोबारा निर्धारण किया जाए। सीसीए का कहना है कि तेजी से बढ़ रही लागत को देखते हुए समय रहते शुल्क संरचना में बदलाव करना बेहद जरूरी हो गया है। संगठन के अनुसार, यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो नकदी लॉजिस्टिक सेवाओं पर असर पड़ सकता है। इससे एटीएम में समय पर नकदी पहुंचाने और अन्य बैंकिंग सेवाओं में भी दिक्कतें आ सकती हैं।
ईंधन महंगा होने से बढ़ा खर्च
सीसीए ने अपने पत्र में बताया कि पिछले कुछ समय से ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसका सीधा असर नकदी पहुंचाने वाली वैन और सुरक्षा वाहनों के संचालन पर पड़ा है। नकदी लॉजिस्टिक कंपनियों को रोजाना बड़ी संख्या में एटीएम और बैंक शाखाओं तक नकदी पहुंचानी होती है। ऐसे में डीजल और पेट्रोल महंगा होने से उनका खर्च काफी बढ़ गया है। संगठन का कहना है कि पहले के मुकाबले अब एक वाहन को चलाने की लागत कहीं ज्यादा हो चुकी है। इसके बावजूद कंपनियों को पुराने शुल्क पर ही काम करना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
कई राज्यों में बढ़ा न्यूनतम वेतन
नकदी लॉजिस्टिक कंपनियों के खर्च में बढ़ोतरी की एक बड़ी वजह कर्मचारियों का बढ़ा हुआ वेतन भी है। कई राज्यों में न्यूनतम वेतन दरों में बड़ा इजाफा किया गया है। सीसीए के मुताबिक, हरियाणा में अकुशल श्रमिकों का न्यूनतम वेतन करीब 35 प्रतिशत बढ़ाकर 15,220 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। वहीं उत्तर प्रदेश में यह वेतन लगभग 20 प्रतिशत बढ़कर 13,690 रुपये प्रति माह पहुंच गया है। उद्योग संगठन का कहना है कि सुरक्षा गार्ड, ड्राइवर और अन्य कर्मचारियों को नियमों के अनुसार वेतन देना अनिवार्य है। ऐसे में कंपनियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ गया है।
बीमा और तकनीकी खर्च भी बढ़े
सिर्फ ईंधन और वेतन ही नहीं, बल्कि बीमा, तकनीक और सरकारी नियमों के पालन से जुड़े खर्च भी तेजी से बढ़े हैं। नकदी लॉजिस्टिक सेवाओं में सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसके लिए कंपनियों को आधुनिक तकनीक, ट्रैकिंग सिस्टम और सुरक्षा उपकरणों पर लगातार निवेश करना पड़ता है। इसके अलावा बीमा प्रीमियम और अनुपालन से जुड़े कानूनी खर्च भी बढ़ गए हैं। इन सभी कारणों से कुल परिचालन लागत पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
कंपनियों ने बताया मौजूदा स्थिति अस्थिर
सीसीए के महासचिव यू.एस. पालीवाल ने कहा कि कंपनियां लागत कम करने के लिए कई उपाय अपना रही हैं। इनमें मांग के अनुसार एटीएम में नकदी भरना और बेहतर रूट प्लानिंग जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। इससे कुछ हद तक खर्च कम करने में मदद मिल रही है। हालांकि उनका कहना है कि इतनी बड़ी लागत वृद्धि की भरपाई केवल दक्षता उपायों से संभव नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि अब अतिरिक्त लागत का बोझ उठाना कंपनियों के लिए टिकाऊ नहीं रह गया है। इसलिए बैंकों के साथ शुल्क संरचना में जल्द बदलाव करना जरूरी हो गया है।
बैंकिंग सेवाओं पर पड़ सकता है असर
उद्योग एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि शुल्क में समय पर संशोधन नहीं किया गया तो इसका असर एटीएम सेवाओं पर पड़ सकता है। नकदी लॉजिस्टिक कंपनियां बैंकों और ग्राहकों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी का काम करती हैं। ऐसे में उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होने से नकदी आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। सीसीए को उम्मीद है कि भारतीय बैंक संघ इस मांग पर गंभीरता से विचार करेगा और जल्द कोई समाधान निकाला जाएगा, ताकि नकदी लॉजिस्टिक सेवाएं सुचारू रूप से जारी रह सकें।
