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Shiprocket IPO पर क्यों टूट पड़े रिटेल निवेशक? 8 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब, GMP ने भी बढ़ाया जोश

Shiprocket IPO को पहले ही दिन निवेशकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। कुछ ही घंटे में इश्यू ओवरसब्सक्राइब हो गया है। इसके अलावा ग्रे मार्केट में भी निवेशक दिलचस्पी दिखा रहे हैं, जिससे लिस्टिंग गेन की उम्मीद बढ़ गई है।

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शिपरॉकेट आईपीओ को मिला जबरदस्त रेस्पॉन्स

Shiprocket IPO GMP Subscription Status : गुरुग्राम की ई-कॉमर्स शिपिंग और लॉजिस्टिक्स कंपनी का IPO ओवरसब्सक्राइब हो गया है। खासतौर पर रिटेल निवेशकों ने इस इश्यू में जबरदस्त रुचि दिखाई है। इसकी वजह से कुल सब्सक्रिप्शन जहां 2 गुना हो गया है। वहीं, रिटेल कैटेगरी में सब्सक्रिप्शन 8 गुना से ज्यादा हो गया है।

हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि आखिर Shiprocket में रिटेल निवेशकों को ऐसा क्या दिखा वे इस पर टूट पड़े? जाहिर है कि इश्यू को लेकर ग्रे मार्केट में भी हलचल है। लेकिन, सिर्फ ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) इसकी पूरी वजह नहीं है। असल में निवेशक कंपनी की ग्रोथ की कहानी पर दांव लगा रहे हैं। क्योंकि तेजी से बढ़ता कारोबार, पिछले दो साल में घाटे में बड़ा सुधार और ई-कॉमर्स के बढ़ते बाजार के फैक्टर शामिल हैं।

GMP ने भरा जोश

Shiprocket IPO के लिए ₹92 से ₹97 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। अगर ऊपरी स्तर ₹97 पर करीब 35% का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) माना जाए, तो यह करीब ₹34 के प्रीमियम के बराबर बैठता है। इस हिसाब से ग्रे मार्केट में संकेतात्मक कीमत करीब ₹131 बनती है। यानी अनऑफिशियल बाजार फिलहाल IPO प्राइस के मुकाबले करीब 35% ऊपर की संभावित लिस्टिंग का संकेत दे रहा है। यही बात शॉर्ट टर्म लिस्टिंग गेन चाहने वाले निवेशकों को आकर्षित कर रही है।

कहानी का असली हीरो रेवेन्यू

Shiprocket का सबसे बड़ा आकर्षण GMP या प्राइस बैंड नहीं, बल्कि बल्कि कारोबार की बढ़ती रफ्तार है, जो रेवेन्यू में साफ दिख रही है। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी ने ऑपरेशंस से रेवेन्यू करीब ₹2,024.1 करोड़ रहा, जो एक साल पहले के करीब ₹1,632 करोड़ से लगभग 24% ज्यादा है। यानी कंपनी का बिजनेस बढ़ रहा है और ऑनलाइन कॉमर्स से जुड़ी सेवाओं की मांग उसके पक्ष में काम कर रही है। इसके साथ ही निवेशक यह भी देख रहे हैं कि कंपनी के घाटे में भी कमी आ रही है। वित्त वर्ष 2024 में कंपनी का घाटा करीब ₹595 करोड़ था, जो वित्त वर्ष 2026 में ₹79.2 रह गया है।

बढ़ते ई कॉमर्स का फायदा

Shiprocket का कारोबार भारत के बढ़ते डिजिटल कॉमर्स इकोसिस्टम से सीधे जुड़ा है। कंपनी का मॉडल छोटे कारोबारियों, डीटूसी ब्रांड्स और बड़े रिटेलर्स को एक ही प्लेटफॉर्म पर कई सेवाएं देने पर आधारित है। जैसे-जैसे ऑनलाइन बिक्री बढ़ती है, वैसे-वैसे शिपिंग, भुगतान, ऑर्डर मैनेजमेंट और फुलफिलमेंट जैसी सेवाओं की मांग भी बढ़ सकती है। यही वजह है कि निवेशक इसे सिर्फ एक लॉजिस्टिक्स कंपनी के रूप में नहीं, बल्कि ई-कॉमर्स इन्फ्रास्ट्रक्चर और एनेबलमेंट प्लेटफॉर्म के तौर पर देख रहे हैं।

₹1,617.5 करोड़ IPO, पैसा जाएगा कहां?

Shiprocket IPO से करीब ₹1,617.5 करोड़ जुटा रही है। इसमें ₹885.5 करोड़ का फ्रेश इश्यू और ₹732 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल है। फ्रेश इश्यू से मिलने वाली रकम में करीब ₹365.6 करोड़ मार्केटिंग और टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर तथा क्षमताओं पर खर्च करने की योजना है। करीब ₹210 करोड़ कर्ज के भुगतान या प्रीपेमेंट के लिए रखे गए हैं। बाकी रकम संभावित अधिग्रहण और सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों में इस्तेमाल की जानी है।

    Yateendra Lawaniya
    यतींद्र लवानियाauthor

    प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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