महंगाई के मोर्चे में राहत मिलती हुई नजर आ रही है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में रिटेल महंगाई दर घटकर 3.54 फीसदी पर आ गई, जो पिछले महीने की तुलना में तेज गिरावट है। जून में खुदरा महंगाई दर 5.08 फीसदी पर थी। इसके साथ ही खुदरा महंगाई दर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के मिड टर्म के लक्ष्य 4 फीसदी से नीचे आ गई है। सरकार द्वारा जारी आंकड़ों से पता चलता है कि खुदरा महंगाई दर पांच वर्षों के अपने निचले स्तर पर पहुंच गई है।
59 महीनों में सबसे कम
सरकार की प्रेस रिलीज में कहा गया है कि जुलाई 2024 के महीने के लिए ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) संख्या पर आधारित साल-दर-साल मुद्रास्फीति दर में तेज गिरावट आई है, जो पिछले 59 महीनों में सबसे कम है।
खाद्य वस्तुओं की कीमतों में नरमी
खाद्य वस्तुओं की कीमतों में नरमी से खुदरा महंगाई दर जुलाई में गिरावट आई है। करीब पांच साल में यह पहला मौका है जब मुद्रास्फीति भारतीय रिजर्व बैंक के 4 फीसदी के लक्ष्य से नीचे आई है। सोमवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गयी। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रास्फीति इस साल जून में 5.08 प्रतिशत थी। जबकि बीते साल जुलाई में यह 7.44 प्रतिशत थी।
2019 में थी 4 फीसदी से कम
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के आंकड़ों के अनुसार, खाद्य वस्तुओं की महंगाई जुलाई में 5.42 प्रतिशत रही। यह जून में 9.36 प्रतिशत थी। इससे पहले, खुदरा मुद्रास्फीति सितंबर, 2019 में चार प्रतिशत के नीचे रही थी। सरकार ने रिजर्व बैंक को खुदरा मुद्रास्फीति को दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत रखने की जिम्मेदारी दी हुई है।
