Jackfruit King Success Story: हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो जमकर वायरल हुआ, जिसने पूरे देश के लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। यह वीडियो एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार की नातीन रेवती सुले के दिल्ली स्थित विवाह के रिसेप्शन का था। इस हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम में देश के कई दिग्गज राजनेता और उद्योगपति पहुंचे थे। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उस पल की हुई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक काली जैकेट पहने शख्स से बेहद ध्यान से बात करते नजर आए, जबकि पास में ही शरद पवार बैठे हुए थे। इस वीडियो के सामने आने के बाद हर कोई यही जानने को उत्सुक थे कि आखिर पीएम मोदी से इतनी गंभीरता से बात करने वाला यह व्यक्ति कौन है? गहन चर्चा में दिख रहे इस शख्स की पहचान मिथिलेश देसाई के रूप में हुई है। मिथिलेश महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले की लांजा तहसील के जापड गांव के रहने वाले एक प्रगतिशील किसान और उद्यमी हैं। उन्होंने कृषि के क्षेत्र में विशेष रूप से कटहल (Jackfruit) की खेती, अनुसंधान और उसके प्रोसेसिंग में क्रांतिकारी लाने का काम किया। उन्हें पूरे देश में 'जैकफ्रूट किंग ऑफ इंडिया' (भारत का कटहल राजा) के नाम से जाना जाता है।
हाई-प्रोफाइल शादी के रिसेप्शन में जब पीएम मोदी की नजर पड़ी
जैकफ्रूट किंग से पीएम की मुलाकात शरद पवार के नातीन रेवती सुले के विवाह समारोह के रिसेप्शन के दौरान का है। रेवती सुले ने नागपुर के उद्योगपति सारंग लखानी से मुंबई में शादी की थी। इसके बाद पवार परिवार ने नई दिल्ली में 6 जनपथ स्थित अपने सरकारी आवास पर एक भव्य रिसेप्शन आयोजित किया। इस समारोह में राजनीतिक दुनिया के कई बड़े चेहरे मौजूद थे। पीएम नरेंद्र मोदी के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई दलों के बड़े नेता और देश के प्रमुख उद्योगपति इस रिसेप्शन में शामिल हुए थे। इतनी बड़ी हस्तियों की मौजूदगी के बावजूद इंटरनेट पर सबसे ज्यादा सुर्खियां उस वीडियो ने बटोरीं, जिसमें मिथिलेश देसाई पीएम मोदी से बात करते दिखे। वीडियो में साफ दिख रहा है कि पीएम मोदी मिथिलेश की बातों को बहुत दिलचस्पी और ध्यान से सुन रहे हैं। मिथिलेश शरद पवार के कोई रिश्तेदार नहीं हैं, बल्कि शरद पवार उनके कृषि कार्यों से काफी समय से प्रभावित थे और उन्होंने ही मिथिलेश को पीएम मोदी से मिलने और अपना काम समझाने का मौका दिया था।
पीएम मोदी से बातचीत और शरद पवार का मार्गदर्शन
पीएम मोदी से हुई अपनी मुलाकात के बारे में मिथिलेश देसाई ने मीडिया को बताया कि यह उनके और उनके पूरे क्षेत्र के लिए एक बेहद गर्व का पल था। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने कटहल की खेती को लेकर जो सपना देखा था और वर्षों तक जो मेहनत की थी, आज वह सही मायनों में रंग ला रही है। अपने छोटे से गांव, तहसील और जिले के काम को देश के प्रधानमंत्री के सामने पेश करना पूरे महाराष्ट्र के लिए सम्मान की बात है। मिथिलेश ने इस मुलाकात का श्रेय एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार को दिया। उन्होंने बताया कि शरद पवार पिछले कई सालों से उनके काम को करीब से देख रहे थे और समय-समय पर खेती को लेकर उनका मार्गदर्शन करते रहते थे। रिसेप्शन के दौरान शरद पवार ने खुद प्रधानमंत्री मोदी को मिथिलेश के कटहल मॉडल और उनके द्वारा विकसित एग्रो-इकोसिस्टम के बारे में बताया और फिर मिथिलेश को पीएम से बातचीत करने का अवसर दिया।
दो अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था का विजन
प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई इस संक्षिप्त लेकिन बेहद महत्वपूर्ण बातचीत में मिथिलेश ने भारत में कटहल की अपार संभावनाओं पर बात की। उन्होंने पीएम मोदी को बताया कि भारत में पैदा होने वाले कुल कटहल का करीब 85% हिस्सा बिना इस्तेमाल के बर्बाद हो जाता है, क्योंकि हमारे पास इसके सही भंडारण और प्रोसेसिंग की व्यवस्था नहीं है। मिथिलेश ने प्रधानमंत्री के सामने अपनी रिसर्च रखते हुए बताया कि अगर कटहल का सही तरीके से प्रोसेसिंग और मार्केटिंग की जाए, तो भारत में कटहल की कुल अर्थव्यवस्था (Jackfruit Economy) आसानी से 2 डॉलर डॉलर (करीब 16000 से 17000 करोड़ रुपये) की हो सकती है। उनकी इस बात ने प्रधानमंत्री का ध्यान खींचा, क्योंकि पीएम मोदी भी हमेशा से कृषि में वैल्यू एडिशन और किसानों की आय बढ़ाने वाले इनोवेटिव आइडियाज के समर्थक रहे हैं।
मिथिलेश देसाई ने कहा कि प्रधानमंत्री से 12 से 15 मिनट तक मिलने का मौका मिला, मैं उन्हें कटहल के साथ किए जा रहे अपने काम के बारे में बता सका। कल मैंने उनके सामने कटहल से बने कई तरह के उत्पाद दिखाए और उन्हें कटहल के बहुत ज्यादा महत्व के बारे में बताया। यह वाकई बहुत अच्छी मुलाकात थी। मैं अपना काम अच्छे से उनके सामने रख पाया और मुझे खुशी है कि कटहल को अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल गई है। उनका रिएक्शन बहुत अच्छा था। उन्होंने मुझसे मेरे बैकग्राउंड और पूरे भारत में कटहल के लिए क्या किया जा सकता है, इस बारे में कई सवाल पूछे...
मिथिलेश का 'जैकफ्रूट किंग' बनने का सफर
मिथिलेश देसाई का कटहल से जुड़ा यह अनोखा सफर आज से करीब 24-25 साल पहले यानी साल 2000 के आसपास शुरू हुआ था। उनके पिता हरिश्चंद्र देसाई ने केरल से कटहल की अलग-अलग किस्में लाकर रत्नागिरी में अपने खेतों में लगानी शुरू की थीं। उस समय कटहल को बहुत ज्यादा व्यावसायिक महत्व नहीं दिया जाता था, लेकिन उनके पिता ने इसमें छिपी संभावनाओं को पहचाना। पिता की इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए मिथिलेश ने कटहल की खेती को सिर्फ एक पारंपरिक काम न रखकर, इसमें वैज्ञानिक और रिसर्च-आधारित दृष्टिकोण जोड़ा। आज रत्नागिरी में उनकी करीब 28 एकड़ की संपत्ति पर दुनिया भर से लाई गई कटहल की दर्जनों किस्में उगाई जाती हैं। उनके फार्म में लाल, नारंगी और पीले गूदे वाली कटहल की किस्मों के साथ-साथ गमलों में उगने वाली और साल में दो बार फल देने वाली किस्में भी शामिल हैं। दुनिया भर में पाई जाने वाली कटहल की करीब 128 प्रजातियों में से मिथिलेश ने कई पर गहरा शोध किया है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, उनके फार्म में 70 से लेकर 86 से भी अधिक कटहल की किस्मों को सफलतापूर्वक उगाया जा रहा है।
प्रतियोगी परीक्षा छोड़ खेती को बनाया अपना करियर
मिथिलेश देसाई की पढ़ाई-लिखाई और करियर का रास्ता भी काफी दिलचस्प रहा है। एक किसान परिवार में जन्मे मिथिलेश ने महाराष्ट्र की प्रतिष्ठित महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ (MPKV), राहुरी से एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद, कई अन्य युवाओं की तरह उन्होंने भी देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली यूपीएससी (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में कुछ समय बिताया। हालांकि, यूपीएससी की तैयारी के दौरान ही उन्हें एहसास हुआ कि उनका असली मकसद सरकारी नौकरी पाना नहीं, बल्कि देश की कृषि व्यवस्था को बदलना है। उन्होंने किसी कॉरपोरेट या सरकारी नौकरी के बजाय अपने गांव लौटकर खेती को ही अपना करियर बनाने का फैसला किया। उनकी एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग की पढ़ाई ने उन्हें कटहल को केवल उगाने तक सीमित रखने के बजाय उसके रिसर्च, फूड प्रोसेसिंग, व्यवसायीकरण और सस्टेनेबल फार्मिंग मॉडल के रूप में विकसित करने में मदद की।
सिर्फ फल ही नहीं, छिलके से बैग तक बनाए
मिथिलेश देसाई ने कटहल को एक बड़े कृषि व्यवसाय का रूप देने के लिए 'जैकफ्रूटकिंग एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड' की स्थापना की। इस कंपनी के जरिए वे न केवल कटहल की खेती को बढ़ावा दे रहे हैं, बल्कि किसानों को संगठित करके इसे एक बेहतर बिजनेस मॉडल में बदल रहे हैं। मिथिलेश की सबसे बड़ी उपलब्धि कटहल के हर हिस्से का मूल्य संवर्धन करना है। वे सिर्फ ताजा कटहल या उसका फल बेचने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने कटहल के बीज, पत्ते, छाल और यहां तक कि उसके छिलके का उपयोग करके कई प्रोडक्ट्स तैयार किए हैं। उनके द्वारा बनाए जाने वाले उत्पादों में शामिल हैं:-
- खाद्य प्रोडक्ट: कटहल का आटा (जो शुगर के मरीजों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है), कटहल के बीजों का आटा और पके हुए कटहल के चिप्स।
- अखाद्य और अनोखे प्रोडक्ट: कटहल के बचे हुए छिलकों और अवशेषों का प्रोसेसिंग करके वे डफल बैग और पासपोर्ट होल्डर जैसे टिकाऊ व फैशनेबल उत्पाद तैयार करते हैं।
मिथिलेश देसाई की यह कहानी यह साबित करती है कि अगर सही सोच, आधुनिक तकनीक और इच्छाशक्ति हो, तो एक आम किसान भी पारंपरिक खेती को अरबों रुपये के उद्योग में बदल सकता है और देश के शीर्ष नेतृत्व का ध्यान आकर्षित कर सकता है।