Independence Day 2026: राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने शनिवार को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों की तीखी आलोचना की। कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि सरकार 12 साल बाद भी केवल "नए सपने बेचने" का काम कर रही है, जबकि देश की जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।
साथ ही, कपिल सिब्बल ने प्रधानमंत्री द्वारा उठाए गए चार प्रमुख मुद्दों- दिमागी नक्श (नक्सल मानसिकता), महिला आरक्षण विधेयक, युवाओं से मतदाता सूची में मदद की अपील और 'नेशन फर्स्ट' पर अपनी असहमति जताई।
मोदी सरकार पर बरसे कपिल सिब्बल
कपिल सिब्बल ने लाल किले से 'दिमागी नक्सल' शब्द के इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का इशारा देश के उन युवाओं, छात्रों और राजनीतिक विरोधियों की तरफ है, जो सरकार की नीतियों से असहमत हैं। उन्होंने कहा, ''युवा और बुद्धिजीवी इस बात को समझ चुके हैं कि इस देश में तीन तरह के तानाशाह हैं, उसमें सरकारी तानाशाह, सामाजिक तानाशाह और पैदाशी तानाशाह शामिल हैं।''
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'महिला आरक्षण पर सरकार की नियत साफ नहीं'
लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी ने महिला आरक्षण लागू करने के लिए विपक्ष का सहयोग मांगा। प्रधानमंत्री के इस बयान पर कपिल सिब्बल ने कहा कि यह बिल पहले ही संसद में पारित हो चुका है। विपक्ष पहले ही इस बिल का समर्थन कर चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार इसे तुरंत लागू क्यों नहीं कर रही है? इसी लोकसभा में आप 33 फीसदी आरक्षण दीजिए, लेकिन आपकी मंशा तो कुछ और ही है।
उन्होंने आशंका जताई कि सरकार की असली मंशा दो-तिहाई बहुमत हासिल कर परिसीमन (डीलिमिटेशन) और सीटों की जेरीमैंडरिंग के जरिए संविधान बदलने की है। इसलिए आप महिला आरक्षण पारित नहीं करना चाहते हैं। उन्होंने जंतर-मंतर पर महिला पहलवानों के साथ हुए व्यवहार का भी जिक्र किया।
