उत्तर प्रदेश सरकार ने किरायेदारी से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए रेंट एग्रीमेंट को पहले से 90% तक सस्ता कर दिया है। इसका सीधा असर उन लाखों मकान मालिकों और किरायेदारों पर पड़ेगा जो हर साल किराया अनुबंध बनाते हैं। पहले किराया एग्रीमेंट के पंजीकरण के लिए भारी स्टांप शुल्क देना पड़ता था, जिसके कारण लोग अक्सर रेंट एग्रीमेंट बनवाने से बचते थे। लेकिन अब सरकार के फैसले के बाद यह प्रक्रिया बेहद सस्ती और आसान हो गई है। नई व्यवस्था के शासनादेश भी जारी कर दिए गए हैं और पंजीकरण विभागों ने इसे लागू करना शुरू कर दिया है।
पहले कितना लगता था?
अधिकारियों के मुताबिक, यह कदम रेंट एग्रीमेंट के पंजीकरण को बढ़ावा देगा। पहले स्थिति यह थी कि अगर सालाना किराया दो लाख रुपये तक है और एक साल के लिए अनुबंध किया जाता है, तो स्टांप व निबंधन शुल्क मिलाकर लगभग 10,000 रुपये देने पड़ते थे। इतनी अधिक लागत के कारण अधिकतर लोग औपचारिक एग्रीमेंट कराने से कतराते थे। मगर अब यही शुल्क घटाकर सिर्फ 1,000 रुपये कर दिया गया है। इतना बड़ा अंतर किरायेदारी सिस्टम को पूरी तरह बदल देगा और अधिक लोग अपने अनुबंध का विधिवत पंजीकरण कराएंगे।
5 साल के एग्रीमेंट पर कितना लगता था?
अगर एग्रीमेंट पांच साल के लिए होता था, तो शुल्क पहले 30,000 रुपये तक पहुंच जाता था। अब यह घटकर सिर्फ 3,000 रुपये कर दिया गया है। इसी तरह दस वर्ष की अवधि के अनुबंध में पहले 40,000 रुपये तक स्टांप और पंजीकरण शुल्क देना पड़ता था, जो कि अब मात्र 4,000 रुपये में पूरा हो जाएगा। सरकार ने दो से छह लाख रुपये तक वार्षिक किराया वाली संपत्तियों के लिए भी स्टांप शुल्क को पुराने शुल्क का सिर्फ 10% निर्धारित किया है। छह से दस लाख रुपये तक वार्षिक किराया वाले अनुबंध पर भी इसी तरह की बड़ी छूट दी गई है। कुल मिलाकर सरकार ने हर श्रेणी में इतना बड़ा परिवर्तन किया है कि किरायेदारी सिस्टम अधिक पारदर्शी और सुलभ बन जाएगा।
निबंधन विभाग का कहना है कि लोग पहले भारी शुल्क की वजह से एग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन कराने से बचते थे। विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मेरठ जनपद में हर महीने औसतन 70 से 80 किराया अनुबंध पंजीकृत होते थे। लेकिन अब जब शुल्क नाममात्र रह गया है, यह संख्या दस गुना तक बढ़ सकती है। यानी एक महीने में करीब 700–800 अनुबंध पंजीकृत होने की संभावना है। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि निबंधन विभाग की आय भी कई गुना बढ़ जाएगी, क्योंकि कम शुल्क का मतलब ज्यादा लोग पंजीकरण करवाएंगे।
किसको होगा सबसे ज्यादा फायदा?
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अब हर मकान मालिक और किरायेदार आसानी से एग्रीमेंट बनवा सकेंगे। इससे दोनों पक्षों के बीच होने वाले विवाद कम होंगे, क्योंकि पंजीकृत अनुबंध कानूनी रूप से मजबूत होता है और किसी भी समस्या की स्थिति में दोनों पक्षों के अधिकार स्पष्ट रहते हैं। इससे अनौपचारिक समझौते करने या अवैध प्रथाओं में शामिल एजेंटों पर भी रोक लगेगी। किराएदारों की सुरक्षा बढ़ेगी और मकान मालिकों को भी अपने अधिकार सुरक्षित रखने में आसानी होगी।
सरकार का मानना है कि किराये के बाजार में पारदर्शिता बढ़ने से प्रदेश में रियल एस्टेट क्षेत्र और किरायेदारी व्यवस्था और मजबूत होगी। पहले जहां लोग भारी स्टांप शुल्क के कारण पंजीकरण नहीं करवाते थे और अनौपचारिक एग्रीमेंट पर निर्भर रहते थे, वहीं अब कम शुल्क का फायदा उठाते हुए वे बिना किसी झंझट के अनुबंध का विधिवत रजिस्ट्रेशन कराएंगे। इससे भविष्य में होने वाली कानूनी समस्याओं में भी कमी आएगी।
