SIP Inflows March 2026: मार्च 2026 में भारी बाजार उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों ने SIP के जरिए निवेश जारी रखा। Association of Mutual Funds in India (AMFI) के आंकड़ों के मुताबिक, महीने के दौरान SIP इनफ्लो बढ़कर ₹32,087 करोड़ पहुंच गया, जो फरवरी के ₹29,845 करोड़ से करीब 7.5% ज्यादा है। यह बढ़ोतरी दिखाती है कि रिटेल निवेशक बाजार गिरावट के बावजूद SIP को लॉन्ग-टर्म निवेश का भरोसेमंद माध्यम मान रहे हैं। फरवरी में हल्की गिरावट का कारण कम दिन और बैंकिंग कैलेंडर था, जिसका असर मार्च में रिकवर हुआ।
| महीना (2026) | SIP इनफ्लो (₹ करोड़) |
|---|---|
| जनवरी | ~26,400* |
| फरवरी | 29,845 |
| मार्च | 32,087 (इस साल सबसे ज्यादा) |
AUM पर पड़ा बाजार गिरावट का असर
हालांकि निवेश बढ़ा, लेकिन SIP एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में गिरावट दर्ज की गई। फरवरी के ₹16.64 लाख करोड़ से घटकर मार्च में यह ₹15.11 लाख करोड़ रह गया। इस गिरावट की मुख्य वजह मार्क-टू-मार्केट (MTM) नुकसान रही, क्योंकि इसी दौरान बाजार में तेज गिरावट आई। सेंसेक्स करीब 11.5% और निफ्टी 11.3% टूटे, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी 10% से ज्यादा की गिरावट देखी गई।
SIP अकाउंट बढ़े, लेकिन स्टॉपेज भी रिकॉर्ड स्तर पर
मार्च में SIP निवेशकों की संख्या बढ़कर 9.72 करोड़ हो गई, जो फरवरी में 9.44 करोड़ थी। यह संकेत है कि नए निवेशक लगातार जुड़ रहे हैं। लेकिन दूसरी तरफ चिंता की बात यह रही कि SIP स्टॉपेज रेशियो 101% तक पहुंच गया। इस दौरान 52.82 लाख नए SIP रजिस्टर हुए, लेकिन साथ ही 53.38 लाख SIP अकाउंट बंद या मैच्योर हुए। इसका मतलब साफ है कि जितने नए SIP शुरू हुए, उससे ज्यादा बंद हो गए।
| महीना | SIP इनफ्लो (₹ करोड़) | SIP AUM (₹ लाख करोड़) | योगदान करने वाले SIP अकाउंट (करोड़) | नया SIP (लाख) | बंद/मैच्योर SIP (लाख) | स्टॉपेज रेशियो (%) |
|---|---|---|---|---|---|---|
| फरवरी 2026 | 29,845 | 16.64 | 9.44 | ~49* | ~51* | ~104%* |
| मार्च 2026 | 32,087 | 15.11 | 9.72 | 52.82 | 53.38 | 101% |
कुल म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में SIP की हिस्सेदारी
SIP का योगदान अब कुल म्यूचुअल फंड AUM का करीब 20.5% हो गया है। यह बताता है कि भारतीय निवेशकों के पोर्टफोलियो में SIP की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। मार्च के आंकड़े एक मिश्रित तस्वीर पेश करते हैं। एक तरफ SIP इनफ्लो मजबूत है और निवेशक जुड़े हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ बाजार गिरावट और बढ़ते स्टॉपेज शॉर्ट-टर्म चिंता को दिखाते हैं। लॉन्ग-टर्म निवेशक व्यवहार अभी भी स्थिर नजर आता है, लेकिन वोलैटिलिटी के समय निवेशकों का धैर्य एक अहम फैक्टर बनकर उभर रहा है।
डिस्क्लेमर: TimesNow Hindi किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।
