Digital Loan App Fraud: आरबीआई फर्जी लोन ऐप के फ्रॉड को रोकने के लिए अहम कदम उठाने जा रहा है। इसके तहत डिजिटल लोन देने वाले ऐप के बारे में सार्वजनिक तौर पर दी जाएगी। जिससे फर्जी इकाइयों पर लगाम लगाई जा सके। इसके लिए आरबीआई ने बैंक तथा एनबीएफसी को डिजिटल लोन ऐप के आंकड़े (रिपॉजिटरी) तैयार करने का प्रस्ताव दिया है। इस कदम से उपभोक्ताओं को अनधिकृत ऋण देने वाले ऐप की पहचान करने में मदद मिलेगी।
क्या होगा फायदा
आरबीआई कगवर्नर शक्तिकान्त दास ने कहा कि अनधिकृत डिजिटल ऋण देने वाले ऐप (डीएलए) से उत्पन्न होने वाली समस्याओं के समाधान के लिए आरबीआई ने बैंक तथा एनबीएफसी के डीएलए के आंकड़े (रिपॉजिटरी) तैयार करने का प्रस्ताव दिया है। इसमें विनियमित संस्थाएं (आरई) अपने डीएलए के बारे में जानकारी देंगे और समय के साथ उसे अपडेट भी करेंगी। इस कदम से उपभोक्ताओं को अनधिकृत ऋण देने वाले ऐप की पहचान करने में मदद मिलेगी। यानी कस्टम लोन लेने से पहले डिजिटल लोन ऐप की पूरी पड़ताल कर सकेंगे।
कैसे चलेगा फर्जी ऐप का पता
आरबीआई ने बैंकों को जो रिपॉजिटरी बनाने की बात कही है, उससे फायदा यह होगा कि जब भी किसी कस्टमर के पास फर्जी डिजिटल लोन ऐप का कॉल आएगा, तो वह बड़ी आसानी से बैंकों की लिस्ट को चेक कर सकेगा। ऐसे में उसे पता चल सकेगा कि कौन डिजिटल लोन ऐप फर्जी है या असली है। आरबीआई का यह कदम बड़े लेवल पर कस्टमर को फ्रॉड से बचा सकता है।
