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Railway Kavach Update : कितना मजबूत हुआ रेलवे का 'कवच', सरकार ने संसद में बताया कहां तक पहुंचा काम?

भारतीय रेलवे पिछले कई वर्षों ट्रेन के सफर को सुरक्षित बनाने के लिए कवच प्रणाली पर काम कर रहा है। सरकार ने आज संसद में बताया कि देश में कुल कितना ट्रैक कवच के दायरे में आ चुका है।

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रेलवे कवच पर सरकार ने दिया बड़ा अपडेट

Railway Kavach Update : देशभर में ट्रेन के सफर को सुरक्षित बनाने के लिए भारतीय रेल कवच परियोजना पर काम कर रही है। यह स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम ऐसी स्थिति में खुद दखल देकर ट्रेन की रफ्तार नियंत्रित करता है और जरूरत पड़ने पर अपने आप ब्रेक भी लगा देता है। अब सरकार ने संसद में इसकी ताजा प्रगति रिपोर्ट पेश की है। सरकार के मुताबिक, कवच अब देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों तक पहुंच चुका है और हजारों किलोमीटर नेटवर्क पर इसका विस्तार जारी है।

लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक लिखित जवाब में बताया कि 20 जुलाई, 2026 तक कवच वर्जन 4.0 को 2,569 रूट किलोमीटर पर चालू किया जा चुका है। इसके अलावा 21,858 रूट किलोमीटर के नेटवर्क पर ट्रैक साइड कवच लगाने का काम चल रहा है। इसमें हाई डेंसिटी, हाई ट्रैफिक और दुर्घटना संभावित रेल मार्गों को प्राथमिकता दी जा रही है।

इसके साथ ही उन्होंने बताया कि जून 2026 तक कवच परियोजना पर ₹3,874 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं। वहीं 2026-27 के लिए ₹2,066 करोड़ का प्रावधान किया गया है। रेलवे का कहना है कि परियोजना की प्रगति के अनुसार धन उपलब्ध कराया जा रहा है और काम पूरे देश में तेजी से चल रहा है।

रेल मंत्रालय के मुताबिक रेलवे में सुरक्षा सुधारों का असर दुर्घटनाओं के आंकड़ों में भी दिखाई दिया है। वर्ष 2014-15 में 135 परिणामी रेल दुर्घटनाएं हुई थीं, जबकि 2025-26 में यह संख्या घटकर 16 रह गई। यानी करीब 88% की कमी आई है। वहीं दुर्घटना सूचकांक भी 91% तक घटा है। सरकार का कहना है कि कवच समेत कई तकनीकी और परिचालन सुधारों ने रेलवे सुरक्षा को मजबूत किया है।

कहां तक पहुंचा कवच?

सरकार की तरफ से दिए आंकड़ों के मुताबिक फिलहाल दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावाड़ा रूट पर दो सबसे अहम और सबसे व्यस्त रेलवे कॉरिडोर हैं, जहां कवच पिरयोजना को लागू किया गया है।

रूटकवच की प्रगति
दिल्ली–मुंबई1,423 रूट किमी
दिल्ली–हावड़ा1,146 रूट किमी
कुल2,569 रूट किमी

दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर में तिलक ब्रिज, पलवल, मथुरा, कोटा, नागदा, रतलाम, वडोदरा और विरार तक कई सेक्शन कवच से जुड़ चुके हैं। वहीं दिल्ली-हावड़ा कॉरिडोर में टुंडला, कानपुर, लखनऊ, गया और हावड़ा की ओर कई हिस्सों में यह सिस्टम चालू हो चुका है।

अभी कितना काम बाकी है?

रेल मंत्रालय की तरफ से दिए गए जवाब के मुताबिक कवच का विस्तार केवल ट्रैक पर उपकरण लगाने तक सीमित नहीं है। इसके लिए ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क, टेलीकॉम टावर, स्टेशन डेटा सेंटर और लोकोमोटिव में विशेष उपकरण लगाने पड़ते हैं। इसके अलावा 7,327 लोकोमोटिव और 1,200 ईएमयू/मेमू ट्रेनों में भी कवच लगाने का काम चल रहा है।

कामप्रगति
ऑप्टिकल फाइबर केबल11,253 किमी
टेलीकॉम टावर1,668
स्टेशन डेटा सेंटर988 स्टेशन
ट्रैक साइड उपकरण7,726 रूट किमी
लोकोमोटिव में कवच6,153

दक्षिण भारत के इन रूटों पर भी चल रहा काम

रेल मंत्री ने बताया कि जिन 21,858 रूट किलोमीटर पर काम जारी है, उनमें दक्षिण रेलवे के कई अहम सेक्शन भी शामिल हैं। इनमें गुडूर–चेन्नई सेंट्रल, अरक्कोनम–रेणिगुंटा, अरक्कोनम–जोलारपेट्टई और शोरनूर–एर्नाकुलम जैसे मार्ग शामिल हैं।

आखिर कवच करता क्या है?

कवच भारतीय रेलवे का स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है। यदि लोको पायलट लाल सिग्नल पार करने की कोशिश करे, तय गति सीमा से अधिक स्पीड हो जाए या समय पर ब्रेक न लगाए, तो यह सिस्टम अपने आप हस्तक्षेप करता है और ट्रेन को सुरक्षित रखने के लिए ब्रेक लगा देता है। खराब मौसम और घने कोहरे में भी यह सुरक्षित संचालन में मदद करता है।

नया वर्जन क्यों है खास?

रेल मंत्रालय के अनुसार कवच का पहला फील्ड ट्रायल वर्ष 2016 में शुरू हुआ था। जुलाई 2020 में इसे राष्ट्रीय ट्रेन सुरक्षा प्रणाली के रूप में अपनाया गया। इसके बाद विकसित कवच वर्जन 4.0 को जुलाई 2024 में मंजूरी मिली। इसमें अधिक सटीक लोकेशन, बड़े यार्ड में बेहतर सिग्नल सूचना और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग से सीधा जुड़ाव जैसी नई सुविधाएं जोड़ी गई हैं। यही वर्जन अब बड़े पैमाने पर लगाया जा रहा है।

    Yateendra Lawaniya
    यतींद्र लवानियाauthor

    प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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