आम लोगों पर महंगाई का बोझ लगातार बढ़ रहा है। चीनी, तेल, चावल, हरी सब्जी, प्याज के बाद अब दालें महंगी हो गई है। भोपाल के थोक किराना बाजार में पिछले कुछ दिनों में लगभग सभी प्रमुख दालों के भाव में तेजी दर्ज की गई है। इनमें सबसे ज्यादा तेजी तुवर दाल में देखने को मिली है। भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री विवेक साहू ने बताया की अच्छे माल की तुवर दाल जो महज एक सप्ताह पहले करीब ₹119 प्रति किलो थी, अब बढ़कर ₹130 प्रति किलो तक पहुंच गई है। यानी एक सप्ताह में ही करीब ₹10 प्रति किलो की तेजी दर्ज हुई है। वहीं 1 सितंबर को तुवर दाल (अरहर दाल) करीब ₹111 प्रति किलो थी। इस तरह सितंबर की शुरुआत से अब तक तुवर दाल के भाव में लगभग ₹19 प्रति किलो की बढ़ोतरी हो चुकी है।
चना दाल में भी बड़ी तेजी
दालों में तेजी केवल तुवर तक सीमित नहीं है। चना दाल में करीब ₹400 प्रति क्विंटल की तेजी आई है। 1 सितंबर को चना दाल करीब ₹76 प्रति किलो थी, जो अब बढ़कर ₹80 प्रति किलो हो गई है। इसी तरह हरी मूंग ₹85 से बढ़कर ₹89, मूंग मोगर ₹91 से ₹93, उड़द मोगर ₹102 से ₹105 और मसूर दाल ₹73 से बढ़कर ₹76 प्रति किलो तक पहुंच गई है।
त्योहारों से पहले बढ़ी मांग, सीमित आवक ने बढ़ाया दबाव
विवेक साहू के मुताबिक, दालों की कीमतों में मौजूदा तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण मांग और आपूर्ति का बिगड़ा हुआ संतुलन है। गणेश उत्सव के बाद नवरात्रि और दीपावली जैसे बड़े त्योहार के साथ-साथ शादियों का सीजन भी आने वाले हैं। त्योहारों एवं विवाह सीजन में दालों की खपत बढ़ने की संभावना को देखते हुए बाजार में अभी से अग्रिम मांग बन रही है। व्यापारी और मिलर्स भी आने वाली खपत को देखते हुए स्टॉक तैयार कर रहे हैं।
दूसरी ओर उत्पादक राज्यों से मंडियों में दालों की आवक सामान्य से कम रहने और पुराना स्टॉक घटने के कारण उपलब्धता पर दबाव है। नई फसल की पर्याप्त आवक शुरू होने में अभी समय है। ऐसे में मांग बढ़ने और आपूर्ति सीमित रहने का असर सीधे कीमतों पर दिखाई दे रहा है।
मौसम, उत्पादन और आयात का भी असर
दालों के भाव में तेजी को केवल भोपाल के स्थानीय बाजार से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। दलहन उत्पादक क्षेत्रों में बारिश और मौसम की स्थिति, बुवाई, संभावित उत्पादन तथा नई फसल की आवक जैसे घरेलू कारण बाजार को प्रभावित कर रहे हैं। इसके अलावा भारत की आयात जरूरत के कारण म्यांमार, कनाडा सहित दूसरे देशों से आने वाली दालों की कीमत और आपूर्ति का असर भी घरेलू बाजार पर पड़ता है।
बाहर से आने वाले माल की परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत भी कीमतों में जुड़ती है। इसका असर थोक से लेकर खुदरा बाजार तक पहुंचता है और अंततः उपभोक्ता को अधिक कीमत चुकानी पड़ती है।
सरकार के दखल से बदली तस्वीर
विवेक साहू ने दालों की मौजूदा स्थिति के बीच हाल में शक्कर के बाजार में आई तेजी का उदाहरण देते हुए कहा कि शक्कर का भाव एक समय करीब ₹70 प्रति किलो तक पहुंच गया था। इसके बाद सरकार के हस्तक्षेप और बाजार में उपलब्धता बढ़ाने के प्रयासों के बाद कुछ ही दिनों में शक्कर का भाव घटकर करीब ₹52 प्रति किलो तक आ गया।
व्यापारियों के अनुसार, शक्कर के बाजार में आई यह राहत बताती है कि आवश्यक खाद्य वस्तुओं में यदि समय पर पर्याप्त स्टॉक बाजार में उपलब्ध कराया जाए तो कीमतों पर दबाव कम किया जा सकता है। इसी तरह दालों के मामले में भी यदि सरकार की ओर से बफर स्टॉक की पर्याप्त मात्रा खुले बाजार में उतारी जाए, तो तेजी पर नियंत्रण पाने में मदद मिल सकती है।
त्योहारी सीजन से पहले बढ़ी चिंता
फिलहाल तुवर में एक सप्ताह में ₹10 की तेजी और सितंबर की शुरुआत से करीब ₹19 की बढ़ोतरी सहित चना, मूंग, उड़द और मसूर के बढ़ते भाव ने त्योहारी सीजन से पहले उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। व्यापारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में नई फसल की आवक, बाजार में उपलब्ध स्टॉक और सरकारी हस्तक्षेप दालों की कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
