आज AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल दुनिया की रीढ़ डेटा सेंटर हैं। इन्हीं में से एक ऐसा डेटा सेंटर है, जो अपने आकार और उपयोगिता की वजह से पूरी दुनिया में अलग पहचान रखता है। अमेरिका के नेवाडा राज्य में बना Switch का Citadel Campus दुनिया के सबसे बड़े डेटा सेंटर कैंपस में गिना जाता है। यह इतना विशाल है कि इसका पूरा आकार करीब 72 लाख वर्गफुट यानी लगभग 166 एकड़ है। आसान भाषा में कहें तो यह लगभग 100 क्रिकेट मैदानों या 125 फुटबॉल मैदानों के बराबर क्षेत्र में फैला हुआ है।
100% नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल
Citadel Campus की पूरी बिजली खपत 650 मेगावाट के करीब है। अगर इसकी तुलना करें, तो यह चंडीगढ़ जैसे शहर की पीक बिजली मांग से भी ज्यादा है। इतनी क्षमता इसलिए रखी गई है, ताकि हजारों सर्वर चौबीसों घंटे बिना रुके काम कर सकें। इस विशाल परियोजना को अमेरिकी कंपनी Switch Inc. ने विकसित किया है। इसकी अनुमानित लागत करीब 1.3 अरब डॉलर यानी मौजूदा विनिमय दर के हिसाब से ₹11,000 करोड़ से अधिक आंकी गई है। यह कैंपस नेवाडा के Tahoe Reno Industrial Center में स्थित है और इसे 100% नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
सैकड़ों वैश्विक ग्राहक
दिलचस्प बात यह है कि यह किसी एक कंपनी का निजी डेटा सेंटर नहीं है। यह एक Colocation Data Center है, जहां कई कंपनियां अपने सर्वर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करती हैं। eBay इसका प्रमुख शुरुआती ग्राहक रहा है। इसके अलावा हेल्थकेयर नेटवर्क Renown Health, ई-कॉमर्स कंपनियां, सेमीकंडक्टर कंपनियां और कई बड़े एंटरप्राइज ग्राहक यहां अपनी डिजिटल सेवाएं चलाते हैं। Switch के अनुसार, उसके डेटा सेंटर नेटवर्क से सैकड़ों वैश्विक ग्राहक जुड़े हुए हैं।
क्या काम आता है ये सेंटर
यहीं से क्लाउड कंप्यूटिंग, AI वर्कलोड, ऑनलाइन बैंकिंग, ई-कॉमर्स, वीडियो स्ट्रीमिंग, हेल्थकेयर डेटा और मिशन-क्रिटिकल बिजनेस एप्लिकेशन जैसी सेवाएं संचालित होती हैं। यानी जब आप ऑनलाइन पेमेंट करते हैं, क्लाउड पर फाइल सेव करते हैं, वीडियो देखते हैं या AI टूल इस्तेमाल करते हैं, तो उसके पीछे काम करने वाली डिजिटल ताकत ऐसे ही विशाल डेटा सेंटर होते हैं। AI के तेजी से बढ़ते दौर में ऐसे मेगा डेटा सेंटरों की अहमियत लगातार बढ़ रही है। OpenAI, xAI, Microsoft, Amazon और Google जैसी कंपनियां भी अब अरबों डॉलर के नए AI डेटा सेंटर बनाने में निवेश कर रही हैं। ऐसे में दुनिया के सबसे बड़े डेटा सेंटर सिर्फ इंटरनेट ही नहीं, बल्कि आने वाले AI युग की भी बुनियाद बनते जा रहे हैं।
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