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India-Russia Trade : भारत के साथ 100 अरब डॉलर का कारोबार चाहते हैं पुतिन, क्या US की जगह ले पाएगा रूस?

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत के साथ द्विपक्षीय ट्रेड 100 अरब डॉलर से ज्यादा करना चाहते हैं। रूस पहले भी यह कह चुका है भारत को अमेरिका से लगे टैरिफ के झटके से उबरने में पूरी मदद देगा।

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भारत के साथ कारोबार बढ़ाना चाहता है रूस

India-Russia Partnership : भारत और रूस टाइम टेस्टेड सदाबहार साथी हैं। रूसी राष्ट्रपति दोनों देशों के बीच कारोबार को 100 अरब डॉलर से ज्यादा ले जाना चाहते हैं। सेंट पीटर्सबर्ग में दुनिया की प्रमुख समाचार एजेंसियों के प्रमुखों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, भारत और रूस के बीच व्यापार जल्द ही 100 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि भारत की तेज आर्थिक वृद्धि PM Modi की नीतियों और मेहनत का नतीजा है।

पुतिन के मुताबिक वर्ष 2025 में भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार 68.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के आर्थिक रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं और आने वाले वर्षों में व्यापार 100 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर सकता है। बहरहाल, अगर यह लक्ष्य हासिल होता है, तो मौजूदा स्तर से व्यापार में 30 फीसदी से अधिक की वृद्धि दर्ज होगी।

भारत को नकारना असंभव

पुतिन ने कहा कि भारत आज दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और सबसे तेज विकास दर दिखाने वाले देशों में से एक है। उन्होंने कहा, "भारत की आर्थिक सफलता कोई संयोग नहीं है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार द्वारा किए गए लगातार प्रयासों का नतीजा है।"

इसके साथ ही रूसी राष्ट्रपति ने भारत को रूस का एक महत्वपूर्ण और भरोसेमंद आर्थिक साझेदार बताते हुए कहा कि नए ग्लोबल ऑर्डर में भारत को नजरंदाज नहीं किया जा सकता है। भारत दुनिया की बड़ी शक्तियों में शामिल है।

क्या अमेरिका की जगह ले सकता है रूस?

भारत और अमेरिका के बीच 2025 में वस्तुओं और सेवाओं को मिलाकर कुल 238 अरब डॉलर का द्विपक्षीय कारोबार किया। जबकि, रूस के साथ इस दौरान कुल कारोबार 70 अरब डॉलर से कम रहा। भारत-अमेरिका और भारत-रूस की ट्रेड में सबसे बड़ा फर्क ट्रेड सरप्लस का है। अमेरिका और भारत के ट्रेड में अब तक भारत ट्रेड सरप्लस मे रहा है। वहीं, रूस के साथ भारत घाटे में रहता है।

अगले एक दशक में भारत और रूस के बीच ट्रेड वॉल्यूम का भारत-अमेरिका के स्तर पर तक पहुंचना व्यावहारिक रूप से संभव नजर नहीं आता है। इसके पीछे कई इकोनॉमिक फंडामेंटल इश्यूज हैं। अमेरिका की तुलना में रूस का बाजार बहुत छोटा है और खपत की क्षमता बहुत कम है। ऐसे में भले ही भारत अपना 100 फीसदी ऑयल-गैस भी रूस से आयात करे, तब भी यह आंकड़ा भारत-अमेरिका के बराबर मुश्किल से पहुंच पाएगा।

क्यों अमेरिका का मुकाबला नहीं कर सकता रूस

ट्रेड बैलेंस दो देशों के कारोबार में बड़ा मुद्दा होता है। रूस के पास भारत को ऑफर करने के लिए हथियार और एनर्जी हैं। वहीं, रूस भारत से फार्मास्युटिकल्स, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, ऑटो पार्ट्स, इंजीनियरिंग एवं मशीनरी और आईटी सेवाएं और डिजिटल टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट आयात करता है। जहां भारत का कुल एनर्जी आयात 120 से 130 अरब डॉलर के बीच है। वहीं, भारत से रूस को जो निर्यात किया जाता है, उन सभी बड़े सेक्टर्स का कुल बाजार करीब 250 अरब डॉलर का है। जाहिर है कि न तो भारत अपना पूरा आयात रूस से कर सकता है और न रूस इन सेक्टर्स का पूरा आयात भारत से करेगा। ऐसे में व्यावहारिक तौर पर दोनों देशों के बीच नए क्षेत्रों की तलाश करते हुए भी 100 अरब डॉलर तक पहुंचना एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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