जेनसोल इंजीनियरिंक (Gensol Engineering) ने शुक्रवार को एक्सचेंज फाइलिंग के माध्यम से जानकारी दी कि कंपनी के प्रमोटर्स ने लगभग 2.37% इक्विटी शेयर (9 लाख शेयर) बेचे हैं। यह कदम कंपनी की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने और लिक्विडिटी बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है। प्रमोटर्स ने स्पष्ट किया है कि इस बिक्री से प्राप्त राशि को कंपनी में दोबारा निवेश किया जाएगा। वे इस रकम को इक्विटी इनफ्यूजन के जरिए कंपनी की बैलेंस शीट को सुधारने में उपयोग करेंगे।
इसके अलावा, प्रमोटर्स ने यह भी आश्वासन दिया है कि वे इस बिक्री से मिली राशि या इससे अधिक को 18 जून 2024 को प्रस्तावित वारंट सब्सक्रिप्शन राउंड में फिर से निवेश करेंगे। बिक्री के बावजूद, प्रमोटर्स अभी भी कंपनी में 59.70% हिस्सेदारी बनाए हुए हैं, जिससे उनकी नियंत्रित हिस्सेदारी बनी रहेगी।
कर्ज में कमी लाने की योजना, क्रेडिट रेटिंग में गिरावट
हाल ही में, CARE Ratings ने Gensol Engineering की क्रेडिट रेटिंग घटा दी थी। लॉन्ग-टर्म बैंक फैसिलिटी की रेटिंग को CARE BB+ से घटाकर CARE D कर दिया गया। शॉर्ट-टर्म फैसिलिटी की रेटिंग को CARE A4+ पर रखा गया। रेटिंग में गिरावट का मुख्य कारण कंपनी की खराब लिक्विडिटी और बढ़ते कर्ज को बताया गया है।
इसके जवाब में, Gensol Engineering ने कर्ज को कम करने की रणनीति अपनाई है। कंपनी ने 2,997 इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री और एक सहायक कंपनी के विनिवेश की घोषणा की है। इन कदमों से कंपनी को ₹665 करोड़ तक का कर्ज कम करने में मदद मिलेगी। इससे कंपनी का डेब्ट-इक्विटी रेशियो 1.95 से घटकर 0.8 हो जाएगा। कंपनी ने अपनी मौजूदा वित्तीय स्थिति को "शॉर्ट-टर्म लिक्विडिटी मिसमैच" बताया है और कहा है कि यह किसी बुनियादी बिजनेस समस्या का संकेत नहीं है।
Gensol Engineering के शेयरों में गिरावट
हाल के दिनों में कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। पिछले एक हफ्ते में शेयर तीन बार लोअर सर्किट पर पहुंचा है। पिछले 12 महीनों में Gensol Engineering के शेयर 68.21% तक लुढ़क गए हैं। शुक्रवार को शेयर 2.33% गिरकर ₹334.80 पर बंद हुआ, जबकि NSE Nifty 50 इंडेक्स 0.03% बढ़ा। Gensol Engineering प्रमोटर्स द्वारा शेयर बिक्री और नए इक्विटी इनफ्यूजन से कंपनी की वित्तीय स्थिति को स्थिर करने और कर्ज को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, स्टॉक की भारी गिरावट और क्रेडिट रेटिंग में कटौती से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
