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फोनपे यूजर्स को बड़ा झटका! वसूले जाएंगे 100 रुपए, जानें क्या है चार्ज से बचने का तरीका?

फोनपे ने इनएक्टिव वॉलेट यूजर्स के लिए नया नियम लागू किया है, जिसके तहत 12 महीने से बंद पड़े वॉलेट पर हर तिमाही 100 मेंटेनेंस चार्ज लगेगा। हालांकि, साल में एक बार लेनदेन करके या वॉलेट बंद करके आप इस चार्ज से बच सकते हैं।

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Phonepe

यदि आप भी ऑनलाइन शॉपिंग, मोबाइल रिचार्ज या दोस्तों को पैसे ट्रांसफर करने के लिए फोनपे (PhonePe) ऐप का इस्तेमाल करते हैं, तो आपके लिए एक बेहद जरूरी और चौंकाने वाली खबर है। देश के सबसे बड़े डिजिटल पेमेंट और यूपीआई (UPI) प्लेटफॉर्म्स में से एक, फोनपे ने अपने करोड़ों ग्राहकों के लिए एक नया नियम लागू किया है। इस नए अपडेट के मुताबिक, अगर आपका फोनपे वॉलेट (PhonePe Wallet) लंबे समय से बंद या इनएक्टिव पड़ा है, तो कंपनी आपसे हर तीन महीने में 100 का मेंटेनेंस चार्ज (Maintenance Fee) वसूलेगी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे एक्स (X) और रेडिट (Reddit) पर कई यूजर्स ने इसके स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं, जिसके बाद से आम जनता के बीच हड़कंप मच गया है। आइए जानते हैं कि यह पूरा मामला क्या है, यह चार्ज किन लोगों पर लगेगा और आप अपने 100 डूबने से कैसे बचा सकते हैं।

किन लोगों पर लागू होगा ये नियम

सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि यह नियम किस फीचर पर लागू हो रहा है। दरअसल, भारत में ज्यादातर लोग फोनपे ऐप का इस्तेमाल सीधे अपने बैंक खाते से यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन करने के लिए करते हैं। लेकिन इसी ऐप के भीतर 'फोनपे वॉलेट' का एक अलग फीचर भी होता है। यह एक डिजिटल पर्स की तरह काम करता है, जिसमें आप एडवांस में पैसे लोड करके रख सकते हैं ताकि बैंक का सर्वर डाउन होने पर भी आपका पेमेंट न रुके। असलियत यह है कि देश के करोड़ों यूजर्स सिर्फ यूपीआई का इस्तेमाल करते हैं और उन्हें यह पता भी नहीं होता कि उनके ऐप में कोई वॉलेट भी चालू है। कंपनी का यह नया नियम आपके यूपीआई ट्रांजैक्शन पर बिल्कुल भी असर नहीं डालेगा; यह केवल फोनपे वॉलेट के लिए है।

कब कटेगा 100 रुपए चार्ज

अब बात करते हैं कि यह 100 का चार्ज कब और कैसे कटेगा। फोनपे के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि कोई यूजर लगातार 12 महीनों (यानी पूरे 1 साल) तक अपने फोनपे वॉलेट से कोई भी लेनदेन (Financial Transaction) नहीं करता है, तो उसके वॉलेट को 'इनएक्टिव' (Inactive) मान लिया जाएगा। एक बार वॉलेट इनएक्टिव होने के बाद, उसे सिस्टम में मेंटेन रखने के एवज में कंपनी हर तिमाही (Quarterly) यानी हर 3 महीने में ₹100 का शुल्क काटेगी। राहत की बात यह है कि यह चार्ज सिर्फ आपके 'फोनपे वॉलेट बैलेंस' से ही काटा जा सकता है। आपके लिंक किए गए मुख्य बैंक खाते (Bank Account) से कंपनी एक भी रुपया नहीं निकाल सकती। नियम के मुताबिक, यदि आपके वॉलेट में ₹100 से कम (मान लीजिए ₹20 या ₹30) हैं, तो कंपनी सिर्फ उतनी ही रकम काटेगी और आपका वॉलेट बैलेंस जीरो (0) हो जाएगा, यह कभी भी माइनस (-) में नहीं जाएगा।

इस अनचाहे जुर्माने या चार्ज से बचने के मुख्य रूप से दो आसान तरीके हैं। पहला तरीका यह है कि आप अपने वॉलेट को दोबारा 'एक्टिव' कर लें। इसके लिए आपको ज्यादा कुछ नहीं करना है; साल में कम से कम एक बार अपने फोनपे वॉलेट में ₹10 या ₹20 ऐड (लोड) कर लें या वॉलेट में पड़े पैसों से कोई भी छोटा-मोटा मोबाइल रिचार्ज या मर्चेंट पेमेंट कर दें। ऐसा करते ही आपका वॉलेट अगले 12 महीनों के लिए एक्टिव श्रेणी में आ जाएगा और आप ₹100 के चार्ज से पूरी तरह बच जाएंगे।

दूसरा और सबसे पक्का तरीका यह है कि यदि आप भविष्य में कभी भी वॉलेट का इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं, तो आप अपने फोनपे वॉलेट को हमेशा के लिए बंद (Close) कर सकते हैं। वॉलेट बंद करने के लिए आपको फोनपे ऐप के प्रोफाइल सेक्शन में जाना होगा, वहां 'फोनपे वॉलेट' पर क्लिक करके 'क्लोज वॉलेट' (Close Wallet) का विकल्प चुनना होगा। हालांकि, कुछ तकनीकी जानकारों और यूजर्स का कहना है कि वॉलेट को क्लोज करने के लिए ऐप में अपनी पूरी केवाईसी (KYC) प्रक्रिया को पूरा करना अनिवार्य हो सकता है। एक बार वॉलेट सफलतापूर्वक बंद हो जाने के बाद, आप पर किसी भी तरह का मेंटेनेंस चार्ज लगने का खतरा हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। इसलिए आज ही अपना फोनपे ऐप खोलें, वॉलेट का स्टेटस चेक करें और सावधानी बरतते हुए अपने पैसे बचाएं।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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