कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत संचालित होने वाला पीएफ (PF) खाता देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के बुढ़ापे का सबसे बड़ा और सुरक्षित वित्तीय सहारा है। नौकरी के दौरान हर महीने कर्मचारी और नियोक्ता दोनों की तरफ से इस खाते में एक निश्चित योगदान जमा किया जाता है, जिस पर सरकार हर साल आकर्षक ब्याज देती है, लेकिन अक्सर कर्मचारियों के बीच यह भ्रम रहता है कि क्या रिटायरमेंट के बाद भी उनके पीएफ खाते पर ताउम्र ब्याज मिलता रहेगा या इसकी कोई तय समय सीमा होती है।
कब ब्याज मिलना बंद हो जाता है?
ईपीएफओ के नियमों के मुताबिक पीएफ खाते पर ब्याज मिलने की एक निश्चित उम्र और शर्तें तय हैं, जिसके बाद खाते में होने वाली कमाई पूरी तरह से बंद हो जाती है। मौजूदा नियमों के तहत, जब कोई कर्मचारी 55 वर्ष की आयु प्राप्त कर लेता है और सक्रिय नौकरी से पूरी तरह सेवानिवृत्त (Retire) हो जाता है, तो उसके बाद उसके पीएफ खाते को ईपीएफओ की भाषा में एक तरह से 'इनऑपरेटिव' या निष्क्रिय माना जाने लगता है, और अंततः 58 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद उस खाते पर मिलने वाला वार्षिक ब्याज पूरी तरह से बंद कर दिया जाता है, इसलिए नौकरी छोड़ने या रिटायर होने के बाद सही समय पर पीएफ का पैसा निकालना बेहद जरूरी है।
रिटायरमेंट के बाद कब निकाल सकते हैं पूरा पैसा?
इस पूरी प्रक्रिया और नियमों के तकनीकी पहलुओं को गहराई से समझना हर नौकरीपेशा के लिए आवश्यक है ताकि उन्हें किसी भी प्रकार का वित्तीय नुकसान न उठाना पड़े। ईपीएफओ के नियमानुसार, यदि कोई कर्मचारी 55 वर्ष की आयु के बाद नौकरी से रिटायर हो जाता है और अगले 36 महीनों (यानी 3 साल) तक अपने पीएफ खाते से कोई निकासी नहीं करता है और न ही उसमें कोई नया योगदान जमा होता है, तो उसका खाता आधिकारिक तौर पर 'इनऑपरेटिव अकाउंट' (Inoperative Account) की श्रेणी में डाल दिया जाता है।
हालांकि, यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 55 साल की उम्र से लेकर 58 साल की उम्र तक (यानी इन 3 सालों के दौरान) खाते में जमा राशि पर ब्याज मिलना जारी रहता है, लेकिन जैसे ही कर्मचारी 58 वर्ष की आयु सीमा को पार करता है, वैसे ही उस निष्क्रिय खाते पर ब्याज का कैलकुलेशन पूरी तरह से रोक दिया जाता है। इसके विपरीत, यदि कोई कर्मचारी कम उम्र में (मान लीजिए 35 या 40 वर्ष की आयु में) नौकरी छोड़ देता है और किसी नए संगठन में शामिल नहीं होता है, तो उसका खाता 55 वर्ष की आयु तक पहुंचने तक पूरी तरह सक्रिय माना जाएगा और उस पर हर साल निर्धारित दर से ब्याज मिलता रहेगा, बशर्ते वह 55 वर्ष की आयु के बाद भी पैसे न निकाले, तब जाकर 36 महीने बाद वह खाता निष्क्रिय होगा।
