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Retirement के बाद भी बनेगी हर महीने 50,000 रुपये की आय, आज ही शुरू करें ये निवेश रणनीति

रिटायरमेंट के बाद हर महीने 50 हजार की आय के लिए एक सही और समय पर की गई योजना मायने रखती है। इसके लिए केवल एफडी पर भी निर्भर नहीं रहा जा सकता है।

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ऐसे करें रिटायरमेंट प्लानिंग (AI Generated Image)

रिटायरमेंट (Retirement) के बाद सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि नियमित आय का इंतजाम कैसे होगा। नौकरी के दौरान हर महीने सैलरी आती रहती है, लेकिन कोई भी व्यक्ति जब रिटायर हो जाता है तो उसकी आय बंद हो जाती है। ऐसे में अगर पहले से सही वित्तीय योजना नहीं बनाई गई, तो रोजमर्रा के खर्च पूरे करना मुश्किल हो सकता है।

आज के समय में बढ़ती महंगाई, मेडिकल खर्च और लंबी जीवन प्रत्याशा को देखते हुए रिटायरमेंट प्लानिंग (Retirement Planning) पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गई है। अगर आपका लक्ष्य रिटायरमेंट के बाद हर महीने 50,000 रुपये की आय प्राप्त करना है, तो उसके लिए पहले से पर्याप्त रिटायरमेंट फंड तैयार करना होगा।

पहले तय करें सालाना खर्च

हर महीने 50,000 रुपये की आय का मतलब है कि आपको एक साल में करीब 6 लाख रुपये की जरूरत होगी। इसमें घर का खर्च, बिजली-पानी का बिल, दवाइयां, यात्रा, बीमा और अन्य दैनिक जरूरतें शामिल हो सकती हैं। हालांकि, यह राशि हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकती है। इसलिए सबसे पहले अपने संभावित मासिक और सालाना खर्च का आकलन करना जरूरी है।

कितना होना चाहिए रिटायरमेंट कॉर्पस?

अगर आप चाहते हैं कि आपका निवेश लंबे समय तक चलता रहे और हर महीने नियमित आय भी मिलती रहे, तो केवल बैंक खाते में पैसा रखना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए ऐसा रिटायरमेंट कॉर्पस बनाना जरूरी है, जिससे निकासी के बाद भी बची हुई राशि निवेशित रहकर बढ़ती रहे। आमतौर पर वित्तीय योजना बनाते समय कई विशेषज्ञ सुरक्षित निकासी (Safe Withdrawal) का सिद्धांत अपनाने की सलाह देते हैं। इसके अनुसार रिटायरमेंट फंड इतना होना चाहिए कि हर साल आवश्यक खर्च निकाला जा सके और शेष राशि भविष्य की महंगाई का मुकाबला करने के लिए बढ़ती रहे।

केवल FD पर निर्भर रहना सही नहीं

कई लोग रिटायरमेंट के बाद पूरी बचत फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में लगा देते हैं। हालांकि FD सुरक्षित निवेश का विकल्प है, लेकिन लंबे समय में इसकी ब्याज दर हमेशा महंगाई से ज्यादा नहीं रहती। दूसरी ओर, पूरा पैसा केवल शेयर बाजार में लगाना भी जोखिम भरा हो सकता है।

हेल्थ इंश्योरेंस भी है जरूरी

रिटायरमेंट के बाद मेडिकल खर्च तेजी से बढ़ सकते हैं। अगर पर्याप्त स्वास्थ्य बीमा नहीं है, तो अस्पताल का एक बड़ा बिल आपकी वर्षों की बचत पर असर डाल सकता है। इसलिए रिटायरमेंट प्लानिंग के साथ पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस और जरूरत पड़ने पर सुपर टॉप-अप कवर भी लेना समझदारी भरा कदम हो सकता है।

समय रहते करें शुरुआत

रिटायरमेंट के लिए जितनी जल्दी निवेश शुरू किया जाएगा, उतना ही कम मासिक निवेश करके बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है। वहीं अगर रिटायरमेंट नजदीक है और बचत लक्ष्य से कम है, तो खर्चों की समीक्षा, बचत बढ़ाने और जरूरत पड़ने पर रिटायरमेंट की योजना में बदलाव पर भी विचार किया जा सकता है।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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