Systematic withdrawal plan: नौकरी में रहते पैसे की टेंशन नहीं होती है क्योंकि हर मंथ के अंत में एक तय अमाउंट बैंक खाते में आ जाता है। लेकिन रिटायरमेंट के बाद यह स्थिति नहीं रहती है। इसलिए समय से पहले इसकी तैयारी जरूरी है। आज हम आपको बता रहे हैं कि कैसे आप अभी म्यूचुअल फंड में निवेश शुरू कर एक बड़ा फंड बनाकर रिटायरमेंट के बाद रेगुलर पेंशन पा सकते हैं। यह काम आप सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान, यानी SWP के जरिये कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि क्या है SWP और ये कैसे काम करता है।
SWP क्या है और कैसे काम करता है?
आपको बता दें कि SWP, SIP का उल्टा है। SWP में आप हर महीने पैसे डालने के बजाय, अपने म्यूचुअल फंड से एक तय रकम निकालते हैं, जबकि बाकी बैलेंस इन्वेस्टेड रहता है। रिटायर लोग SWP पसंद करते हैं क्योंकि वे तय कर सकते हैं कि उन्हें हर महीने कितने पैसे चाहिए। फंड मैनेजर पोर्टफोलियो चलाता रहता है और मार्केट से होने वाला कोई भी फायदा पैसे निकालने के असर को कम करता है।
कितने समय तक निकाल सकते हैं पैसा?
अब आपके मन में यह सवाल होगा कि आप कितने समय तक पैसा निकाल पाएंगे? एक सस्टेनेबल SWP आमतौर पर सालाना 5 प्रतिशत से 7 प्रतिशत के बीच होता है। , जो फंड के प्रकार और आप कितना जोखिम उठा सकते हैं, इस पर निर्भर करता है। अगर आप 4 प्रतिशत से 5 प्रतिशत सालाना विड्रॉल से शुरू करते हैं, तो 25 से 30 साल तक आसानी से हर महीने एक फिक्स रकम निकाल सकते हैं।
टैक्सेशन कैसे काम करता है?
हर SWP विड्रॉल पर इनकम के तौर पर टैक्स नहीं लगता है। यह बस आपके म्यूचुअल फंड यूनिट्स का रिडेम्पशन है। टैक्स सिर्फ उन यूनिट्स में शामिल कैपिटल गेन पर लगता है। अगर आप एक साल बाद इक्विटी-ओरिएंटेड फंड से विड्रॉल करते हैं, तो गेन पर छूट की सीमा से ऊपर 10 प्रतिशत टैक्स लगता है। डेट फंड होल्डिंग पीरियड और इंडेक्सेशन नियमों के आधार पर शॉर्ट- और लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन नियमों का पालन करते हैं।
