फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने स्पष्ट कर दिया है कि पान मसाला (Pan Masala) और तंबाकू उत्पादों की पैकेजिंग अब पहले जैसी नहीं रहेगी। नए ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक, इन उत्पादों की पैकिंग के लिए अब कागज, पेपर बोर्ड या किसी अन्य प्राकृतिक (Natural) सामग्री का ही इस्तेमाल करना होगा। अब तक हम जो प्लास्टिक, पॉलीथिन या पीवीसी वाले सैशे देखते आए हैं, उनका उपयोग पूरी तरह बंद करने का प्रस्ताव है। यहाँ तक कि एल्युमिनियम फॉयल वाली पैकिंग, जो अक्सर नमी से बचाने के लिए उपयोग होती है, उस पर भी रोक लगाई जा सकती है।
क्या है सरकार का प्रस्ताव?
सरकार ने केवल बिक्री ही नहीं, बल्कि इन उत्पादों की स्टोरेज और मैन्युफैक्चरिंग पर भी सख्त रुख अपनाया है। नियमों में साफ कहा गया है कि किसी भी रूप में प्लास्टिक (चाहे वह कितना भी पतला क्यों न हो) का इस्तेमाल इन उत्पादों को पैक करने के लिए नहीं किया जाएगा। सरकार ने इस ड्राफ्ट को सार्वजनिक कर दिया है और अगले 30 दिनों के भीतर आम जनता, विशेषज्ञों और संबंधित कंपनियों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। इन सुझावों पर विचार करने के बाद ही इस नियम को अंतिम रूप देकर लागू किया जाएगा।
क्यों पड़ी इस सख्त कदम की जरूरत?
इस फैसले के पीछे दो मुख्य कारण हैं पान मसाला और गुटखा के छोटे प्लास्टिक पैकेट 'सिंगल यूज प्लास्टिक' का सबसे बड़ा स्रोत हैं। ये पैकेट आकार में इतने छोटे होते हैं कि इन्हें रीसायकल करना लगभग नामुमकिन होता है। नालियों के जाम होने से लेकर मिट्टी की उर्वरता खत्म होने तक, ये छोटे सैशे पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं।
इसके अलावा प्लास्टिक में मौजूद रसायनों का सीधा संपर्क जब तंबाकू या पान मसाला जैसी चीजों से होता है, तो यह सेहत के लिए और भी अधिक घातक हो सकता है। प्राकृतिक सामग्री के इस्तेमाल से इस जोखिम को कम करने की कोशिश की जा रही है।
उद्योग पर क्या होगा असर?
अगर ये नियम लागू हो जाते हैं, तो पान मसाला कंपनियों को अपनी पूरी प्रोडक्शन लाइन और पैकेजिंग यूनिट में बदलाव करना होगा। कागज या प्राकृतिक सामग्री का इस्तेमाल करने से कंपनियों की लागत (Cost) बढ़ सकती है, जिसका असर ग्राहकों की जेब पर भी पड़ सकता है। हालांकि, पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय में यह देश के लिए एक वरदान साबित होगा।
