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पेट्रोल -डीजल की कीमतों में आग के बाद खाना पकाने को भी मोहताज होंगे पाकिस्तानी! कतर ने रोकी LNG सप्लाई

गैस के साथ-साथ पाकिस्तान कच्चे तेल (Crude Oil) की कमी से भी जूझ रहा है। देश के पास पेट्रोलियम का बहुत सीमित भंडार बचा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और डॉलर की कमी की वजह से नए ऑर्डर देना पाकिस्तान के लिए नामुमकिन जैसा होता जा रहा है।

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pakistani Inflation

पड़ोसी देश पाकिस्तान की आर्थिक हालत पहले से ही खराब थी, लेकिन अब मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के तनाव ने उसकी कमर तोड़ दी है। पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतों के बीच अब पाकिस्तान के सामने 'रसोई गैस' और 'बिजली' का महासंकट खड़ा हो गया है। खबर है कि कतर ने पाकिस्तान को होने वाली एलएनजी (LNG - लिक्विफाइड नेचुरल गैस) की सप्लाई रोक दी है और इसके लिए 'फोर्स मेज्योर' (Force Majeure) नोटिस भी जारी कर दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अनिश्चित काल के लिए पाकिस्तान को गैस की सप्लाई नहीं मिल पाएगी, जिससे वहां चूल्हे ठंडे पड़ने और कारखाने बंद होने की नौबत आ गई है।

कतर ने क्यों उठाया यह सख्त कदम?

मिडिल ईस्ट में चल रहे सैन्य टकराव और तनाव की वजह से समुद्री रास्तों और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों का खतरा बढ़ गया है। सुरक्षा कारणों और उत्पादन में आई बाधा के चलते कतर को अपने कई शिपमेंट रोकने पड़े हैं। पाकिस्तान के संघीय ऊर्जा मंत्री अली परवेज मलिक ने खुद इस बात को स्वीकार किया है कि कतर से आने वाले गैस कार्गो पर अब अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। चूंकि पाकिस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर है, इसलिए कतर का यह फैसला उसके लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है।

99% निर्भरता बनी पाकिस्तान की कमजोरी

पाकिस्तान के लिए यह संकट इसलिए भी जानलेवा है क्योंकि उसकी कुल एलएनजी जरूरत का लगभग 99 फीसदी हिस्सा खाड़ी देशों (कतर और यूएई) से ही आता है। पाकिस्तान के पास अपना कोई बड़ा गैस भंडार नहीं है और न ही उसके पास इस संकट से निपटने के लिए कोई 'प्लान-बी' तैयार है। अगर खाड़ी देशों से गैस नहीं आती, तो पाकिस्तान के पास तुरंत कोई दूसरा विकल्प मौजूद नहीं है जिससे वह अपनी जनता की जरूरतें पूरी कर सके। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान को गैस की कीमतों में भारी बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है या फिर उद्योगों की सप्लाई काटकर घरों तक गैस पहुंचानी होगी।

भारत के मुकाबले पाकिस्तान की स्थिति नाजुक

दिलचस्प बात यह है कि कतर से गैस भारत और बांग्लादेश भी खरीदते हैं, लेकिन भारत की स्थिति पाकिस्तान के मुकाबले काफी मजबूत है। आंकड़ों के मुताबिक, भारत अपनी जरूरत का केवल 53 फीसदी हिस्सा कतर और यूएई से लेता है, जबकि बाकी जरूरतों के लिए वह अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों से भी गैस खरीदता है। भारत के पास विकल्पों की कमी नहीं है, लेकिन पाकिस्तान के पास न तो इतना पैसा है और न ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में इतनी साख कि वह रातों-रात नए सप्लायर ढूंढ सके।

अंधेरे में डूब सकता है पाकिस्तान

गैस की कमी का असर सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं रहेगा। पाकिस्तान में बिजली उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा गैस से चलने वाले पावर प्लांट पर निर्भर है। अगर एलएनजी की सप्लाई रुकती है, तो पूरे देश में लंबी बिजली कटौती (Load Shedding) शुरू हो सकती है। हालांकि पाकिस्तान में सोलर एनर्जी का इस्तेमाल बढ़ा है, लेकिन वह इतनी बड़ी मांग को पूरा करने के लिए काफी नहीं है। इसके अलावा, ईरान से मिलने वाली बिजली और ऊर्जा सप्लाई भी मौजूदा युद्ध जैसे हालात के कारण प्रभावित हुई है, जिससे संकट और गहरा गया है।

ईंधन और कच्चे तेल का भी संकट

गैस के साथ-साथ पाकिस्तान कच्चे तेल (Crude Oil) की कमी से भी जूझ रहा है। देश के पास पेट्रोलियम का बहुत सीमित भंडार बचा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और डॉलर की कमी की वजह से नए ऑर्डर देना पाकिस्तान के लिए नामुमकिन जैसा होता जा रहा है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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