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ईरान से संधी कराई नहीं लेकिन ट्रंप से पाकिस्तान ने मांगी अपनी कीमत, इतने अरब डॉलर की रखी डिमांड

समाचार पत्र ’डॉन’ ने बुधवार को खबर दी कि उसे इस अनुरोध की पुष्टि वॉशिंगटन स्थित पाकिस्तान के दूतावास से हुई है।

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ईरान-अमेरिका डील

ईरान और अमेरिका के बीच संधी कराने को लेकर पाकिस्तान ने दुनियाभर में सुर्खियां बटोरी थी। खुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने डील साइन की फोटो सोशल मीडिया पर डाली थी। हालांकि, डील तो हुई नहीं लेकिन पाकिस्तान ने अपनी बिचौलिया बनने की कीमत अमेरिका से मांग ली है। बता दें कि पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट से 10 अरब डॉलर की मुद्रा विनिमय स्थिरता सुविधा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। एक मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। वहीं, जानकारों का कहना है कि यह मांग सीधे नही घुमा-फिरा कर की गई है।

पाकिस्तानी समाचार पत्र ने पुष्टि की

समाचार पत्र ’डॉन’ ने बुधवार को खबर दी कि उसे इस अनुरोध की पुष्टि वॉशिंगटन स्थित पाकिस्तान के दूतावास से हुई है। हालांकि, दूतावास ने इस संबंध में कोई अतिरिक्त जानकारी साझा नहीं की।

अखबार ने इस बारे में अमेरिकी वित्त मंत्रालय से भी प्रतिक्रिया मांगी लेकिन उसकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। दूतावास की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, औरंगजेब ने अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों तक बेहतर पहुंच, विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि और देश की 'सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग’ में सुधार पर आधारित पाकिस्तान की ’रोड-टू-मार्केट’ रणनीति के लिए अमेरिका का समर्थन मांगा।

विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने का लक्ष्य

पाकिस्तान की 'रोड-टू-मार्केट’ रणनीति का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों तक स्वतंत्र एवं पूर्ण पहुंच बहाल करना और विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाना है। यह रणनीति राजकोषीय घाटे और मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अनुशासन का पालन करने पर आधारित है। आधिकारिक बयान में हालांकि 10 अरब डॉलर की राशि का कोई उल्लेख नहीं किया गया।

वॉशिंगटन स्थित राजनयिक सूत्रों ने ’डॉन’ को बताया कि पाकिस्तान के 10 अरब डॉलर के स्थिरीकरण सहायता संबंधी अनुरोध को मंजूरी मिलने की ’’प्रबल संभावना’’ है। एक सूत्र ने अखबार को बताया कि अमेरिकी प्रशासन पाकिस्तान के साथ जुड़ाव बनाए रखने का इच्छुक है और उसने एक से अधिक बार देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद का आश्वासन दिया है।

वित्तीय खस्ताहाली में फंसा हुआ है पाकिस्तान

पाकिस्तान की आर्थिक सुधार प्रक्रिया अब भी नाजुक बनी हुई है और देश विदेशी सहायता पर काफी हद तक निर्भर है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) द्वारा वर्ष 2023 में तीन अरब डॉलर के ऋण कार्यक्रम को मंजूरी दिए जाने के बाद पाकिस्तान भुगतान चूक से बाल-बाल बचा था। फिलहाल, वह वर्ष 2024 में स्वीकृत सात अरब डॉलर के आईएमएफ कार्यक्रम के तहत आर्थिक सुधार लागू कर रहा है जो कई नीतिगत शर्तों से जुड़ा हुआ है।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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