Russia Oil Export: अमेरिका-इजराइल के ईरान के साथ युद्ध के बीच रूस ने कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के निर्यात से भारी कमाई की है। शोध संस्थान सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर ने हाल ही में पाया कि रूस का दैनिक राजस्व फरवरी की तुलना में औसतन 14 प्रतिशत बढ़ गया है। इसका मतलब है कि रूस को अब लगभग सात अरब अमेरिकी डॉलर रोजाना की कमाई हो रही है।
यूरोप की नजर रूस के राजस्व पर
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक यूरोप के एक शोध संस्थान ने वास्तविक समय में रूस के जीवाश्म ईंधन निर्यात से होने वाले राजस्व पर निगरानी शुरू की है। इस तरह की रिपोर्ट से पता चलता है कि रूस को अभी भी तेल और गैस से भारी लाभ हो रहा है, भले ही कई देशों ने उस पर प्रतिबंध लगाए हों। यह जानकारी उर्गेवाल्ड नामक जर्मन गैर-लाभकारी संस्था ने प्रकाशित की है।
उर्गेवाल्ड का अभियान
उर्गेवाल्ड एक जर्मन गैर-लाभकारी संस्था है, जो जीवाश्म ईंधन के वित्तपोषण के खिलाफ काम करती है। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में तेल, गैस और कोयला जैसे ऊर्जा स्रोतों के व्यापार पर नियंत्रण बढ़ाना और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले वित्तीय लेन-देन को रोकना है। संस्था का कहना है कि रूस को जीवाश्म ईंधन निर्यात पर कड़े प्रतिबंध लगाना चाहिए ताकि युद्ध और पर्यावरण पर उसका नकारात्मक असर कम किया जा सके।
प्रतिबंधों पर राजनीतिक बहस
हालांकि, राजनीतिक स्तर पर इस मुद्दे पर मतभेद हैं। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने रूस के खिलाफ लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में ढील देने पर विचार किया है। इसका मतलब है कि रूस को अभी भी तेल और गैस का व्यापार जारी रखने का अवसर मिल सकता है। उर्गेवाल्ड जैसी संस्थाएं इस ढील का विरोध कर रही हैं और उनका कहना है कि अगर प्रतिबंध कमजोर किए गए तो रूस को युद्ध और ऊर्जा क्षेत्र में फायदा मिलता रहेगा।
रूस की तेल और गैस से होने वाली कमाई दर्शाती है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में इस समय रूस की स्थिति मजबूत बनी हुई है। उर्गेवाल्ड और अन्य पर्यावरणीय संस्थाओं का मानना है कि कड़े प्रतिबंध ही इस कमाई को रोक सकते हैं और रूस को अपने सैन्य और राजनीतिक लक्ष्यों के लिए कम संसाधन मिलेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक समुदाय को रूस के जीवाश्म ईंधन व्यापार पर ध्यान देना चाहिए ताकि न केवल युद्ध को रोका जा सके बल्कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ भी लड़ाई जारी रखी जा सके।
