प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव शक्तिकान्त दास ने गुरुवार को कहा कि भारत के पास वैश्विक चुनौतियों को अवसर में बदलने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि देश न केवल संकट से पार पा चुका है बल्कि उथल-पुथल से गुजरते हुए और भी मजबूत होकर उभरा है। दास ने यहां एआईएमए के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक संकट में भारत ने अपने आप को बखूबी बचाये रखा और उसे अवसर में बदला। इतना ही नहीं चुनौतियों के बीच वास्तव में उल्लेखनीय रूप से मजबूत होकर उभरा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था अलगाव, आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने और असमान वृद्धि के साथ 'अस्थिर और तनावपूर्ण वातावरण’ का सामना कर रही है। इसमें जोखिम लगातार बना हुआ है।
भारतीय इकोनॉमी में मजबूती बनी हुई
आरबीआई के पूर्व गवर्नर Shaktikanta Das ने भारत के मजबूत आर्थिक प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि पिछले पांच वर्षों में औसत वृद्धि 7.8 प्रतिशत रही है। उन्होंने कहा कि भारत की चुनौतियों से पार पाने की काबिलियत अकेले पूरी कहानी बयां नहीं करती। भारत ने उथल-पुथल के दौर को केवल सहन ही नहीं किया, बल्कि उससे गुजरते हुए खुद को महत्वपूर्ण रूप से रूपांतरित किया। दास ने यह भी बताया कि इस मजबूती के कई आधार हैं, जिनमें वृहद आर्थिक स्थिरता, नीतियों के मोर्चे पर निरंतरता, बुनियादी ढांचा आधारित विकास और मजबूत घरेलू मांग शामिल हैं।
महंगाई को काबू करना जरूरी
शीर्ष अधिकारी ने मुद्रास्फीति नियंत्रण के महत्व का जिक्र करते हुए इसे आर्थिक स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। दास ने कहा, मुद्रास्फीति को अक्सर गरीबों पर कर के रूप में देखा जाता है। कम मुद्रास्फीति का अर्थ है उपभोक्ता के हाथों में खर्च करने की शक्ति में वृद्धि। संकट के दौरान भारत की नीतिगत प्रतिक्रिया का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश ने एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाया। उदार राजकोषीय और मौद्रिक नीति को समय पर वापस लिया गया, जिससे व्यवस्था में बुलबुले वाली स्थिति या अस्थिरता उत्पन्न नहीं हुई।
अर्थव्यवस्था में स्ट्रक्चरल चेंज किए गए
दास ने अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव का भी उल्लेख किया। इनमें तीव्र डिजिटलीकरण, बुनियादी ढांचे का विस्तार और इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर जैसे विनिर्माण क्षेत्रों में वृद्धि शामिल है।बाह्य मोर्चे पर उन्होंने कहा कि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और विविध साझेदारियों ने किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता को कम कर दिया है। ’’हम अपने राष्ट्रीय हित में निर्णय लेते हैं। दास ने India growth story को अस्थिर वैश्विक परिवेश में एक सुरक्षित आधार बताया, जो स्थिरता, भरोसा और दीर्घकालिक वृद्धि संभावनाएं प्रदान करता है।
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