आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने वाले उन भारतीय टैक्सपेयर्स के लिए एक बेहद बड़ी और महत्वपूर्ण वित्तीय खबर सामने आ रही है, जिनकी विदेश में किसी भी तरह की संपत्ति है या फिर वहां से कोई कमाई होती है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) और आयकर विभाग (Income Tax) ने टैक्स चोरी को रोकने तथा कर अनुपालन को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। अब आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर उपलब्ध एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) के भीतर टैक्सपेयर्स के विदेशी एसेट्स और विदेशी स्रोतों से होने वाली आय (Foreign Assets and Income) का पूरा डेटा लाइव कर दिया गया है।
अब पोर्टल पर दिखेगी आपकी कमाई की जानकारी
इस नए और महत्वपूर्ण तकनीकी बदलाव का सीधा मतलब यह है कि अगर आपके पास विदेश में कोई बैंक खाता है, कोई अचल संपत्ति या प्रॉपर्टी है, विदेशी कंपनियों के शेयर या म्यूचुअल फंड हैं, या फिर वहां से किसी भी प्रकार की सैलरी, डिविडेंड या रॉयल्टी के रूप में कमाई होती है, तो उसका पूरा ब्यौरा अब आपके एआईएस फॉर्म में पहले से ही दर्ज दिखाई देगा। ऐसे में, सभी संबंधित टैक्सपेयर्स के लिए यह बेहद अनिवार्य हो गया है कि वे अपना नया आईटीआर फॉर्म सबमिट करने से ठीक पहले अपने एआईएस को बहुत ही बारीकी से चेक कर लें, ताकि उनके वास्तविक वित्तीय लेनदेन और रिटर्न में दी जाने वाली जानकारी के बीच कोई विसंगति न रहे।
नहीं छुपा सकेंगे ये जानकारी
इस नए कदम के पीछे आयकर विभाग का मुख्य उद्देश्य टैक्सपेयर्स के लिए विदेशी संपत्तियों की घोषणा (Foreign Assets Disclosure) करने की प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाना और साथ ही जानबूझकर या अनजाने में जानकारी छिपाने वालों पर नकेल कसना है। पूर्व के वर्षों में, कई टैक्सपेयर्स विदेशी बैंक खातों या निवेशों की जानकारी अपने आईटीआर के 'शेड्यूल एफए' (Schedule FA) में भरना भूल जाते थे या इसे एक जटिल काम मानकर छोड़ देते थे, जिसके कारण बाद में उन्हें भारी वित्तीय जुर्माने और आयकर विभाग के कड़े कानूनी नोटिसों का सामना करना पड़ता था।
अब विभाग को विभिन्न देशों के साथ होने वाले स्वचालित सूचना विनिमय (Automatic Exchange of Information) समझौतों के तहत यह सारा डेटा पहले ही प्राप्त हो जाता है, इसलिए इसे सीधे टैक्सपेयर के एआईएस प्रोफाइल से जोड़ दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यवस्था से जहां एक तरफ ईमानदार करदाताओं को अपने रिटर्न में सही आंकड़े भरने में मदद मिलेगी और उनका काम आसान होगा, वहीं दूसरी तरफ डेटा छिपाने की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। यह अपडेट विशेष रूप से उन अनिवासी भारतीयों (NRIs), भारत लौट चुके नागरिकों (RNOR) और उन घरेलू निवेशकों के लिए बेहद संवेदनशील है जो लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत विदेशों में निवेश करते हैं।
टैक्सपेयर्स को सतर्क रहने की जरुरत
इस नए नियम के आलोक में टैक्सपेयर्स को बहुत अधिक सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि विदेशी संपत्ति के मामले में थोड़ी सी भी लापरवाही या गलत जानकारी ब्लैक मनी एक्ट (Black Money Act) के तहत बेहद गंभीर कानूनी संकट और भारी-भरकम पेनल्टी को आकर्षित कर सकती है। यदि आपके एआईएस में कोई विदेशी आय प्रदर्शित हो रही है, तो आईटीआर दाखिल करते समय उसे छुपाने का प्रयास बिल्कुल न करें, बल्कि यदि एआईएस में दर्ज किसी डेटा में कोई त्रुटि या विसंगति नजर आती है, तो पोर्टल पर ही तत्काल अपना ऑनलाइन फीडबैक दर्ज करें ताकि उसे सुधारा जा सके।
आयकर कानून के तहत विभाग के पास पुराने टैक्स मामलों को दोबारा खोलने की बहुत लंबी समय सीमा होती है, विशेष रूप से विदेशी संपत्तियों से जुड़े मामलों में विभाग पिछले 16 साल तक के पुराने रिकॉर्ड की स्क्रूटनी कर सकता है।
