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रिटायरमेंट के बाद हर महीने 75,000 रुपये चाहिए? SWP बना सकता है आसान इंतजाम

अगर आप चाहते हैं कि रिटायरमेंट के बाद भी हर महीने 75,000 रुपये की इनकम मिले और साथ ही आपकी जमा पूंजी भी बढ़ती रहे, तो SWP एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। सही फंड चुनकर और रिस्क-रिटर्न का संतुलन बनाकर आप आराम से और निश्चिंत होकर अपना रिटायरमेंट बिता सकते हैं।

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Retirement Fund

रिटायरमेंट के बाद ज्यादातर लोगों की सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि इनकम तो बंद हो जाएगी, लेकिन खर्चे चलते रहेंगे। ऐसे समय में अगर हर महीने जेब में नियमित इनकम आती रहे और जमा पूंजी साल-दर-साल बढ़ती जाए, तो इससे बेहतर क्या हो सकता है। म्यूचुअल फंड का सिस्टमेटिक विदड्रॉल प्लान यानी SWP इस चिंता का समाधान हो सकता है।

SWP क्या है और कैसे काम करता है?

SWP यानी Systematic Withdrawal Plan निवेश की एक रणनीति है, जिसमें आप अपने रिटायरमेंट कॉर्पस को किसी फंड में निवेश करने के बाद हर महीने, तिमाही या सालाना आधार पर तय रकम निकाल सकते हैं। SIP में जहां आप हर महीने पैसे डालते हैं, वहीं SWP में आप अपने निवेश से नियमित पैसे निकालते हैं। निवेश की बाकी राशि फंड में बनी रहती है और उस पर रिटर्न मिलता रहता है। इस तरह आपको रेगुलर इनकम भी मिलती है और आपका कॉर्पस भी लंबे समय तक बढ़ता रहता है।

कैसा होगा कैलकुलेशन?

मान लीजिए आपके पास रिटायरमेंट के समय 90 लाख रुपये का कॉर्पस है और आप SWP का इस्तेमाल करते हैं। इस स्थिति में 20 साल तक 12% सालाना अनुमानित रिटर्न पर अगर आप हर महीने 75,000 रुपये निकालते हैं, तो 20 साल में कुल 1.80 करोड़ रुपये आपके पास इनकम के रूप में आ जाएंगे। सबसे खास बात यह है कि इस दौरान आपका मूल निवेश भी खत्म नहीं होगा, बल्कि 20 साल बाद आपके पास लगभग 2.31 करोड़ रुपये का कॉर्पस भी बचा रहेगा।

12% रिटर्न के लिए कहां करें निवेश?

इतना ऊंचा रिटर्न आमतौर पर सिर्फ इक्विटी म्यूचुअल फंड्स से ही मिल सकता है। पिछले 10 सालों के औसत सालाना रिटर्न भी यही बताते हैं। मिड कैप फंड्स ने 16.26%, लार्ज एंड मिड कैप फंड्स ने 14.88%, ELSS फंड्स ने 14.10%, फ्लेक्सी कैप फंड्स ने 13.82% और लार्ज कैप फंड्स ने 13% का औसत रिटर्न दिया है। इसके अलावा एग्रेसिव हाइब्रिड फंड्स का औसत रिटर्न 12.13% और सोने (Gold) ने 13.53% रिटर्न दिया है।

रिस्क और रिटर्न का बैलेंस जरूरी

SWP रिटायरमेंट के बाद रेगुलर इनकम का अच्छा विकल्प है, लेकिन ध्यान रहे कि म्यूचुअल फंड्स के रिटर्न मार्केट पर निर्भर करते हैं। ऐसे में रिस्क को भी समझना जरूरी है। अपने पोर्टफोलियो को ज्यादा स्टेबिलिटी देने के लिए रिटायरमेंट कॉर्पस का एक हिस्सा डेट फंड्स, हाइब्रिड फंड्स या गोल्ड ETF जैसे विकल्पों में लगाया जा सकता है। ये विकल्प इक्विटी की तरह ज्यादा रिटर्न नहीं देते, लेकिन इन्हें सुरक्षित और स्थिर माना जाता है। इससे आपके पोर्टफोलियो में बैलेंस बना रहता है।

अगर आप चाहते हैं कि रिटायरमेंट के बाद भी हर महीने 75,000 रुपये की इनकम मिले और साथ ही आपकी जमा पूंजी भी बढ़ती रहे, तो SWP एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। सही फंड चुनकर और रिस्क-रिटर्न का संतुलन बनाकर आप आराम से और निश्चिंत होकर अपना रिटायरमेंट बिता सकते हैं।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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