Vedanta Demerger: माइनिंग सेक्टर की दिग्गज वेदांता के डीमर्जर को मुंबई NCLT ने मंजूरी दे दी है। ET NOW की रिपोर्ट के मुताबिक डीमर्जर प्लान के तहत वेदांता को अपनी पांच कंपनियों को बाजार में अलग से लिस्ट करने की मंजूरी मिल गई है। वेदांता एक मल्टीनेशनल कंपनी है। खासतौर पर माइनिंग सेक्टर में दबदबा रखने वाली यह कंपनी लंबे समय से डीमर्जर की तैयारी में जुटी है। बाजार के जानकारों का मानना है कि डीमर्जर की वजह से कंपनी के वैल्यूएशन में सुधार होगा।
पांच कंपनियां अलग से होंगी लिस्ट
रिपोर्ट के मुताबिक वेदांता के डीमर्जर प्लान के तहत पांच कंपनियों की भारतीय बाजार में अलग से लिस्टिंग होगी। इनमें वेदांता एल्युमीनियम, वेदांता स्टील एंड फेरस फ्रेम, वेदांता ऑयल एंड गैस, वेदांता पावर और वेदांता बेस मेटल्स शामिल हैं।
NCLT से मिली हरी झंडी
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की मुंबई बेंच ने 16 दिसंबर को वेदांता लिमिटेड के डीमर्जर प्लान को मंजूरी दे दी। इस फैसले के बाद माइनिंग सेक्टर की इस दिग्गज कंपनी के शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली।
क्या है वेदांता का प्लान?
वेदांता ने NCLT मुंबई बेंच के सामने जो डीमर्जर प्लान पेश किया है उसके मुताबिक समूह की पांच कंपनियां का डीमर्जर किया जाना है। ट्रिब्यूनल की मंजूरी के साथ अब इस बड़ी कॉरपोरेट रीस्ट्रक्चरिंग को औपचारिक वैधता मिल गई है। शुरुआत में वेदांता ने खुद को छह कंपनियों में बांटने की योजना बनाई थी। इसमें Vedanta Aluminium, Vedanta Oil & Gas, Vedanta Power, Vedanta Steel and Ferrous Materials, Vedanta Base Metals और Vedanta Ltd शामिल थीं। हालांकि, बाद में इस प्लान में बदलाव किया गया और बेस मेटल्स बिजनेस को पैरेंट कंपनी वेदांता लिमिटेड के भीतर ही रखने का फैसला लिया गया है।
शेयर बाजार में दिखा असर
डीमर्जर की मंजूरी की खबर का असर सीधे शेयर बाजार में दिखा। बाजार में खबर आते ही Vedanta Share Price 4.20% उछल गया और दिन के आखिर में 572.50 रुपये पर बंद हुआ। इससे साफ होता है कि डीमर्जर को लेकर निवेशकों की उम्मीदों को मजबूती मिली है।
डीमर्जर का मकसद क्या है
कंपनी का कहना है कि डीमर्जर का असल मकसद कंपनी के ऑपरेशंस को आसान बनाना है। इससे मैनेजमेंट के फोकस को बेहतर करने में मदद मिलेगी। मार्च 2025 में वेदांता ने डीमर्जर के लिए समयसीमा 30 सितंबर, 2025 तय की थी। हालांकि, NCLT की तरफ से मंजूरियों में देर लग गई। अब NCLT से मंजूरी मिलने के बाद डीमर्जर प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। इसके साथ ही कंपनी का दावा है कि डीमर्जर का एक मकसद शेयरहोल्डर्स के लिए वैल्यू अनलॉक करना भी है। अलग-अलग बिजनेस के ढांचे से हर यूनिट को बेहतर वैल्यूएशन मिलने और कैपिटल एलोकेशन ज्यादा प्रभावी होने की उम्मीद है।
निवेशकों को क्या फायदा?
Vedanta Demerger का फायदा उन तमाम निवेशकों को होगा, जिनके पास रिकॉर्ड डेट से पहले कंपनी के शेयर होंगे। ET NOW की रिपोर्ट के मुताबिक डीमर्जर प्लान के तहत प्रत्येक शेयर होल्डर को उसके पास मौजूद प्रत्येक शेयर के बदले अलग होने वाली कंपनियों के 1-1 शेयर मिलेंगे। बहरहाल, आने वाले महीनों में निवेशकों की नजर रिकॉर्ड डेट, शेयर अलॉटमेंट और नई इकाइयों की लिस्टिंग टाइमलाइन पर बनी रहेगी।
