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LPG Cylinder New Rule: जरा भी बर्बाद नहीं गैस! सिलेंडर में बची रहने वाली गैस को बचाने का तेल कंपनियों का नया मास्टरप्लान

घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खबर है। अब सिलेंडरों में बची रह जाने वाली गैस की बर्बादी को पूरी तरह रोकने के लिए तेल कंपनियां 'लिक्विड एलपीजी सिलेंडर' का नया मास्टरप्लान लाई हैं, जिससे देश को सालाना ₹21,900 करोड़ की भारी बचत होगी।

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सिलेंडर में बची रहने वाली गैस को बचाने का तेल कंपनियों का नया मास्टरप्लान

भारत में घरेलू रसोई गैस (LPG) का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आ रही है। अक्सर देखा जाता है कि जब हमारे घरों में एलपीजी सिलेंडर पूरी तरह से खाली हो जाता है और चूल्हा जलना बंद हो जाता है, तब भी उस सिलेंडर के भीतर कुछ मात्रा में लिक्विड या गैस बची रह जाती है। तकनीकी सीमाओं के कारण इस बची हुई गैस का उपयोग आम उपभोक्ता नहीं कर पाते और सिलेंडर वापस लेते समय यह ईंधन तेल कंपनियों के पास ही लौट जाता है।

इस अदृश्य लेकिन बड़े पैमाने पर होने वाले ईंधन के नुकसान (Fuel Loss) को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए देश की बड़ी सरकारी तेल कंपनियों ने एक नया मास्टरप्लान तैयार किया है, जिसके तहत अब पारंपरिक सिलेंडरों की जगह विशेष रूप से डिजाइन किए गए 'लिक्विड एलपीजी सिलेंडरों' (Liquid LPG Cylinders) के नए विकल्प को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। इस नई तकनीक का सबसे प्राथमिक और सीधा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं द्वारा खरीदे गए ईंधन की एक-एक बूंद का शत-प्रतिशत उपयोग हो सके, जिससे न सिर्फ आम जनता के पैसों की सीधी बचत होगी बल्कि देश के ऊर्जा संसाधनों का भी अधिकतम और सही इस्तेमाल मुमकिन हो सकेगा।

क्यों बनाया जा रहा है ये प्लान

इस नई तकनीक और मास्टरप्लान के पीछे का अर्थशास्त्र बेहद चौंकाने वाला और व्यापक है। एक अनुमान के मुताबिक, यदि देश भर के सभी घरेलू और व्यावसायिक सिलेंडरों में बची रह जाने वाली इस अवशिष्ट गैस (Residual Gas) को पूरी तरह से उपयोग में लाया जा सके, तो इससे राष्ट्रीय स्तर पर सालाना लगभग ₹21,900 करोड़ की भारी-भरकम बचत हो सकती है। वर्तमान में, भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, ऐसे में इतनी बड़ी राशि की बचत देश के आयात बिल को कम करने और अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में एक मील का पत्थर साबित होगी।

कैसे काम करेगा ये सिस्टम?

तेल कंपनियों द्वारा लाए जा रहे इस नए लिक्विड एलपीजी सिलेंडर के विकल्प में अत्याधुनिक वॉल्व और आंतरिक संरचना का उपयोग किया गया है, जो कम दबाव (Low Pressure) पर भी सिलेंडर के भीतर मौजूद आखिरी ग्राम लिक्विड को पूरी तरह से वेपराइज (भाप में तब्दील) करके रेगुलेटर तक पहुंचाने में सक्षम है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब उपभोक्ताओं को 'सिलेंडर जल्दी खत्म होने' या 'पैसा वसूल ईंधन न मिलने' की शिकायत हमेशा के लिए दूर हो जाएगी और उन्हें अपनी गाढ़ी कमाई का पूरा लाभ मिलेगा।

इसके अलावा, यह नई पहल केवल आर्थिक बचत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षा के लिहाज से भी एक बड़ा कदम है। सिलेंडरों में बची हुई गैस को रिसाइकल करने या वापस डिपो में खाली करते समय होने वाले उत्सर्जन के जोखिम को यह तकनीक पूरी तरह से खत्म कर देती है। तेल कंपनियां इस योजना को चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में लागू करने की तैयारी कर रही हैं, जिसमें पहले चरण में औद्योगिक और बड़े व्यावसायिक उपभोक्ताओं को जोड़ने के बाद इसे घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए अनिवार्य या व्यापक रूप से उपलब्ध कराया जाएगा।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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