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बाजार में तबाही के संकेत, गिफ्ट निफ्टी 900 अंक तक फिसला, 2500 अंक गैप डाउन के साथ खुल सकता है सेंसेक्स

शेयर बाजार में भारी तबाही के संकेत नजर आ रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी मॉर्निंग सेशन में 900 अंक से ज्यादा की गिरावट के साथ 23,661 तक फिसल चुका है। इसके अलावा सभी एशियाई बाजार भारी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। जापानी बेंचमार्क निक्केई 225 7 फीसदी नीचे है।

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मार्च में लगातार तबाही जारी

Global Market Crash: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की वजह ग्लोबल ऑयल सप्लाई चरमरा गई है। इसका असर दुनियाभर के शेयर बाजारों पर है। सोमवार 9 मार्च को सभी एशियाई शेयर बाजार भारी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैंं। वहीं, भारतीय बाजार के बेंचमार्क निफ्टी का फ्यूचर इंडेक्स गिफ्ट निफ्टी भी 900 अंक से ज्यादा की गिरावट के साथ 23,661 अंक तक गिर चुका है। ऐसे में निफ्टी और सेंसेक्स में 2 से तीन फीसदी की गैप डाउन ओपनिंग होने के संकेत मिल रहे हैं।

भारतीय बाजार के लिए शुरुआती संकेत भी कमजोर दिखाई दे रहे हैं। GIFT Nifty 824 अंक यानी 3.47% गिरकर 23,750 पर ट्रेड कर रहा है।इतनी बड़ी गिरावट इस बात का संकेत है कि भारतीय शेयर बाजार में आज दबाव के साथ शुरुआत हो सकती है।

कितने गैप डाउन के साथ खुल सकते हैं सेंसेक्स निफ्टी?

ग्लोबल बाजारों में भारी बिकवाली और GIFT Nifty में करीब 824 अंक (-3.47%) की गिरावट को देखते हुए भारतीय शेयर बाजार में आज तेज गैप-डाउन ओपनिंग के संकेत मिल रहे हैं। अगर यह संकेत कायम रहते हैं तो निफ्टी और सेंसेक्स करीब 3% से 3.5% तक की गिरावट के साथ खुल सकते हैं। 6 मार्च की क्लोजिंग के आधार पर निफ्टी में लगभग 750 से 850 अंक और सेंसेक्स में करीब 2,300 से 2,700 अंक तक का गैप-डाउन संभव माना जा रहा है।

इंडेक्स6 मार्च क्लोजिंगसंभावित गैप-डाउन (%)संभावित गिरावट (अंक)अनुमानित ओपनिंग लेवल
निफ्टी 5024,4503% – 3.5%730 – 860 अंक23,590 – 23,720
सेंसेक्स78,9183% – 3.5%2,360 – 2,760 अंक76,160 – 76,560

एशियाई बाजारों में बड़ी गिरावट

एशियाई बाजारों में आज तेज बिकवाली का माहौल है। जापान का Nikkei 225 करीब 6.89% गिरकर 52,035 पर आ गया। दक्षिण कोरिया का KOSPI 7.04% टूटकर 5,217 पर पहुंच गया। ताइवान का Taiwan Weighted Index भी 6.05% गिरकर 31,681 पर आ गया। इसके अलावा Hang Seng करीब 2.47% फिसलकर 25,136 पर ट्रेड कर रहा है। एशिया में इस भारी गिरावट से साफ संकेत मिल रहे हैं कि निवेशक जोखिम से दूरी बना रहे हैं।

बाजार / इंडेक्सगिरावट
KOSPI (दक्षिण कोरिया)लगभग 7% – 8% गिरावट
Nikkei 225 (जापान)करीब 6% – 7% गिरावट
Taiwan Weightedकरीब 5% – 6% गिरावट
Hang Seng (हांगकांग)लगभग 3% गिरावट
Straits Times (सिंगापुर)करीब 2% – 3% गिरावट
Shanghai Composite (चीन)लगभग 1% – 1.5% गिरावट

अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी

अमेरिकी बाजारों में भी दबाव बना हुआ है। Dow Jones Futures करीब 1,038 अंक यानी 2.19% टूटकर 46,463 पर आ गया है।

S&P 500 1.33% गिरकर 6,740 पर है। टेक्नोलॉजी शेयरों से भरा Nasdaq 1.53% गिरकर 22,400 पर पहुंच गया है और इसका ट्रेंड “Very Bearish” दिख रहा है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि ग्लोबल इक्विटी मार्केट में फिलहाल जोखिम बढ़ गया है।

यूरोपीय बाजारों में भी दबाव

यूरोप के प्रमुख बाजार भी कमजोरी में बंद हुए। ब्रिटेन का FTSE करीब 1.26% गिरकर 10,284 पर बंद हुआ। फ्रांस का CAC 0.65% फिसलकर 7,993 पर रहा। जर्मनी का DAX भी 0.95% गिरकर 23,591 पर बंद हुआ। यूरोप के तीनों प्रमुख इंडेक्स का टेक्निकल ट्रेंड भी कमजोर यानी Bearish से Very Bearish दिखाई दे रहा है।

कच्चे तेल में 24% का बड़ा उछाल

कमोडिटी मार्केट में सबसे बड़ा मूव कच्चे तेल में देखने को मिला है। Brent Crude करीब 24.16% उछलकर 115 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। वहीं Crude Oil भी 24.60% चढ़कर 113 डॉलर पर ट्रेड कर रहा है। तेल की कीमतों में यह उछाल वैश्विक महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता को और बढ़ा सकता है।

डॉलर इंडेक्स में मजबूती

डॉलर इंडेक्स में हल्की मजबूती दिखाई दी है। Dollar Index करीब 0.56% बढ़कर 99.54 पर पहुंच गया है। डॉलर की मजबूती से उभरते बाजारों में पूंजी का दबाव बढ़ सकता है।

भारतीय बाजार पर क्या असर

ग्लोबल संकेतों को देखते हुए भारतीय बाजार में आज दबाव के साथ शुरुआत होने की संभावना है। एशियाई बाजारों में भारी गिरावट, GIFT Nifty में बड़ी कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल निवेशकों की चिंता बढ़ा रहे हैं। अगर क्रूड की तेजी बनी रहती है तो इसका असर भारतीय बाजार के साथ-साथ महंगाई और रुपये पर भी देखने को मिल सकता है।

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Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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